लद्दाख के चुशुल घाटी स्थित रेजांगला की मिट्टी लेकर निकली ऐतिहासिक कलश यात्रा जयपुर पहुंच गई है। यह यात्रा सर्वोच्च वीरता और बलिदान को नमन करने के उद्देश्य से निकाली जा रही है। रविवार को स्टेच्यू सर्किल स्थित बिड़ला सभागार में राजस्थान यादव महासभा और राजस्थान युवा यादव महासभा संयुक्त रूप से इस कलश यात्रा का स्वागत करेंगे। राजस्थान युवा यादव महासभा के प्रदेश अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक मदन यादव ने बताया कि कलश यात्रा का शुभारंभ रविवार सुबह 10 बजे वैशालीनगर के गांधी पथ स्थित जानकी मैरिज गार्डन से होगा। यहां से एक मोटरसाइकिल और वाहन रैली निकाली जाएगी, जो सोडाला होते हुए दोपहर करीब एक बजे बिड़ला ऑडिटोरियम पहुंचेगी। रेजांगला युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को सम्मानित होंगे
बिड़ला ऑडिटोरियम में रेजांगला रज कलश यात्रा का औपचारिक स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर रेजांगला युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, अहीर समाज से आरएएस में चयनित युवाओं का भी सम्मान होगा। राजस्थान युवा यादव महासभा की नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह भी
महेंद्र कुमार यादव ने इस दौरान कहा कि सैनिक देश के लिए बलिदान देता है, चाहे वह किसी भी समाज का हो। कार्यक्रम के दौरान राजस्थान युवा यादव महासभा की नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह भी होगा। इसमें राजस्थान यादव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. स्वपन घोष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सत्यप्रकाश सिंह और राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष प्रदीप बेहरा यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के राष्ट्रीय संयोजक दिनेश यादव रहेंगे मौजूद
इस आयोजन में अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के राष्ट्रीय संयोजक दिनेश यादव, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. करण सिंह यादव, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुमार यादव, हर सहाय यादव, राष्ट्रीय प्रभारी गोविंद भाई कांगड़, राष्ट्रीय सह प्रभारी भारत यादव, राष्ट्रीय सचिव मंजू यादव, डी.आर. यादव और महिला प्रदेश अध्यक्ष चंचल यादव सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। कार्यक्रम में राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, दिल्ली और मध्य प्रदेश से 1500 से 2000 समाजबंधुओं के जुटने की उम्मीद है। 13 अप्रेल को हुआ था शुभारंभ:
राजस्थान युवा यादव महासभा के प्रदेश अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक मदन यादव ने बताया कि 13 अप्रेल को रज कलश यात्रा लद्दाख से रवाना होकर देश के लगभग सभी राज्यों से होते हुए राजस्थान की राजधानी में प्रवेश कर रही है। यात्रा ने करीब 70 हजार किलो मीटर की दूरी तय कर ली है। यात्रा के साथ 25 लोग है। स्थानीय लोग अलग से यात्रा के साथ चलते हैं। कलश यात्रा 29 अक्टूबर तक राजस्थान में रहेगी। उसके बाद हरियाणा में प्रवेश करेगी। 18 नवंबर को दिल्ली में यात्रा का समापन होगा। रेजांगला युद्ध
​​​​​​​रेजांगला युद्ध 18 नवंबर 1962 को लद्दाख के चुशुल घाटी में हुआ। इस युद्ध में भारतीय सेना की 13 कुमाऊं रेजिमेंट की मात्र 120 जवानों की टुकड़ी ने चीन की विशाल सेना का सामना किया, जिसमें करीब 1,300 सैनिक शामिल थे। भारतीय जवानों के पास सीमित हथियार और गोला-बारूद था, जबकि चीनी सेना के पास भारी तोप और गोले थे। युद्ध का नेतृत्व मेजर शैतान सिंह कर रहे थे, जिन्हें बाद में उनकी असाधारण बहादुरी के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। सुबह 3:30 बजे चीनी सैनिकों ने अचानक हमला किया, लेकिन 13 कुमाऊं के वीर जवानों ने अपने अंतिम सांस तक लड़ाई जारी रखी। गोला-बारूद समाप्त होने के बाद उन्होंने नंगे हाथों से भी दुश्मन का मुकाबला किया। इस साहसिक लड़ाई में 114 जवान शहीद हुए और केवल छह जिंदा बचे। बचा हुआ सैनिक मानद कैप्टन रामचंद्र यादव था, जिसने युद्ध के बाद पूरी कहानी देश को सुनाई। सैनिकों ने अकेले ही कई दुश्मन सैनिकों को मार गिराया। रे जांगला युद्ध में शामिल सैनिक दक्षिण हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र से थे, जिनके गांव रेवाड़ी, गुडग़ांव, नरनौल और महेंद्रगढ़ में स्मारक बनाए गए हैं। रेजांगला चुशुल घाटी में एक पहाड़ी दर्रा है, जो इस युद्ध का अंतिम मोर्चा था। 13 कुमाऊं के जवानों की वीरता और बलिदान भारतीय इतिहास में अद्वितीय मिसाल है। इस युद्ध ने दिखाया कि संख्या और हथियार कम होने के बावजूद साहस और समर्पण से किसी भी दुश्मन को रोका जा सकता है। रेजांगला शौर्य दिवस हर साल रेवाड़ी में मनाया जाता है और इन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाती है।