राजस्थान में दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग पूरी होते ही शुक्रवार को सभी 309 शहरी निकायों में मतदान खत्म हो गया। जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और पाली निगमों सहित 147 नगर निकायों में शुक्रवार को शाम 6 बजे तक औसतन 70.01% से ज्यादा वोटिंग हुई। कई जगह रिकॉर्ड भी टूटे। बालोतरा जिले की धोरीमन्ना नगर पालिका में सबसे ज्यादा 91.59% वोटिंग हुई। नगर निगमों की बात करें तो दूसरे चरण में जयपुर नगर निगम में सबसे कम 63.55% और सबसे ज्यादा जोधपुर में 71.95% वोटिंग हुई। पिछली बार से तुलना करें तो उदयपुर में करीब 12, जोधपुर में 11 और जयपुर में करीब 5 प्रतिशत ज्यादा वोटिंग हुई। इससे पहले 9 सितंबर को पहले चरण में 162 शहरी निकायों में औसतन 76.41% वोटिंग हुई है। आंकड़ों को अंतिम रूप देने को लेकर निर्वाचन विभाग में काम जारी है। जल्द फाइनल आंकड़े जारी होंगे। यदि नगर निगमों को लेकर दोनों चरणों की तुलना करें तो सबसे ज्यादा भरतपुर नगर निगम में 73.68% वोटिंग रही। दूसरे चरण में जोधपुर और उदयपुर में पिछले निकाय चुनाव के मुकाबले बढ़े वोटिंग परसेंटेज ने सभी को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट में पढ़िए.. जयपुर, जोधपुर सहित 6 बड़े निगमों के वोटिंग पर्सेंटेज क्या संकेत दे रहे हैं। जयपुर : राजधानी में वोटर्स ने दिखाया जोर, क्या एक निगम होने का फायदा राजधानी में वोटिंग प्रतिशत बढ़ गया है। पिछली बार 2 निगम थे और दोनों निगमों की औसत वोटिंग 57.5 प्रतिशत तक पहुंची थी। इस बार वोटिंग बढ़ने से बीजेपी खेमा अपने बोर्ड के रास्ते को खुलने जैसा मान रहा है। वहीं कांग्रेस भी कुछ समीकरणों के आधार पर गुणा-भाग में जुटी हुई है। सीएम भजनलाल शर्मा का सांगानेर, डिप्टी सीएम दीया कुमारी का विद्याधर नगर, मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ का झोटवाड़ा, सीनियर विधायक कालीचरण सराफ का मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र जयपुर शहर में ही आते हैं। इन सभी का तेज प्रचार चर्चा में भी रहा। दो समीकरण से बीजेपी को फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। एक, जयपुर में पिछली बार दो निगमों में कुल 250 वार्ड में चुनाव हुआ था, वहीं इस बार 150 पर वोटिंग हुई है। वोटिंग पिछली बार के 2 निगमों के औसत से बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है, जो बीजेपी के खेमे में खुशी जगा रहा है। दूसरा, प्रदेश की सत्ता बीजेपी के हाथ में है, जो बीजेपी के लिए फायदे वाला माना जा रहा है। जेन-जी की असंतुष्टि का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस ने ज्यादातर नए चेहरों को मौका दिया। विधायक रफीक खान व अमीन कागजी, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास जैसे विपक्ष के नेताओं ने गली-गली जाकर कांग्रेस को जिताने की अपील की। इन नेताओं का मानना है कि सरकार और विधायकों के कामों से लोग असंतुष्ट हैं और एंटी इन्कम्बेंसी से वोटिंग पर्सेंटेज बढ़ा है, जो विपक्ष को फायदा देगी। वहीं, मुसलमानों को भी कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। जयपुर की वालसिटी में 8 मुस्लिम चेहरों से कांग्रेस को काफी आशा है। पिछली बार : भष्टाचार में फंसी मेयर के कारण कांग्रेस ने गंवाया बोर्ड
साल 2020 में जयपुर नगर नगम को हेरिटेज और ग्रेटर, दो भागों में बांटकर वोटिंग करवाई गई थी। हेरिटेज में 58.31% और ग्रेटर में 57.82% वोटिंग हुई थी। हेरिटेज में 100 में से 47 वार्ड कांग्रेस ने, 42 बीजेपी ने और 11 वार्ड निर्दलीयों ने जीते। कुछ निर्दलीयों को मिलाकर कांग्रेस ने हेरिटेज में बोर्ड बनाया। इधर, ग्रेटर में 150 में से बीजेपी ने 88 वार्ड जीतकर बोर्ड बना लिया। कांग्रेस और निर्दलीयों ने 49 वार्ड जीते थे। इसके बाद 2024 में हेरिटेज निगम की मेयर मुनेश गुर्जर को भ्रष्टाचार के मामले को लेकर पद से हटा दिया गया। बीजेपी ने 8 कांग्रेसी पार्षदों के समर्थन से बीजेपी का बोर्ड बनाया। इस तरह बीजेपी के दोनों निगमों में बोर्ड बन गए। जोधपुर : 11% से ज्यादा वाेटिंग, बदल सकते हैं समीकरण जोधपुर में पिछली बार दो निगम थे और वोटिंग का औसत 60.7 फीसदी रहा था। इस बार एक निगम के लिए चुनाव हो रहे हैं। वोटिंग 11 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है। जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की रणनीति के कारण मुकाबला एक तरफा नहीं माना जा रहा है। वोटिंग के बाद जनता के बीच चर्चा है कि ज्यादा वोटिंग बीजेपी को फायदा दे सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछली बार दो निगम में से एक पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था। इस बार एक निगम होने के कारण समीकरण बदले हुए दिखाई दे सकते हैं। यहां पार्टियों से ज्यादा गजेंद्र सिंह और गहलोत के चेहरों पर नजरें टिकी हुई हैं। पिछली बार : बीजेपी और कांग्रेस ने बनाया एक-एक बोर्ड साल 2020 में जोधपुर नगर निगम को उत्तर और दक्षिण, दो भागों में बांटकर वोटिंग करवाई गई थी। उत्तर में 62.64% और दक्षिण में 58.76% वोटिंग हुई थी। उत्तर में 80 में से 53 वार्ड कांग्रेस ने जीते और बोर्ड बनाया। दक्षिण में 80 में से 43 वार्ड बीजेपी ने जीते और बोर्ड बनाया। कांग्रेस ने 23 और 14 वार्ड निर्दलीय जीते थे। कोटा : वोटिंग पैटर्न फिर बता रहा है…टक्कर अच्छी है कोटा में पिछले निकाय चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस में बोर्ड बनाने को लेकर जैसी खींचतान चली। इस बार का वोटिंग पैटर्न बता रहा है कि इस बार भी वैसी ही टक्कर देखे को मिल सकती है। कोटा में इस बार वोटिंग 67.66% प्रतिशत हुई है, जो पिछली बार के मुकाबले 1.89% ज्यादा है। पिछली बार कोटा में दो निगम थे और दोनों में बोर्ड कांग्रेस ने बना लिए थे। ये आंकड़ा बीजेपी पर इस बार बोर्ड बनाने का दवाब बढ़ा रहा है। वोटिंग नहीं बढ़ने से कांग्रेस खेमे में ज्यादा खलबली नहीं है, लेकिन बीजेपी अब ज्यादा बेचैन होकर रिजल्ट की ओर नजरें जमाए हैं। हालांकि बीजेपी का मानना है कि एक निगम के कारण वोटिंग में ज्यादा उतार-चढ़ाव देने को नहीं मिला है। बीजेपी नेताओं का मानना है कि प्रदेश की सत्ता में बीजेपी होने और नेता-कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनाव लड़ने जैसे दोनों समीकरणों से पार्टी को फायदा होगा। कांग्रेस का मानना है कि स्थानीय समस्याओं के कारण वोटर्स में निराशा थी, जो कांग्रेस को फायदा देगी। पिछली बार : निर्दलीयों के सहारे कांग्रेस ने बना लिए दो बोर्ड
साल 2020 में कोटा नगर निगम को उत्तर और दक्षिण, दो भागों में बांट कर वोटिंग करवाई गई थी। उत्तर में 65.12% और दक्षिण में 66.43% वोटिंग हुई थी। उत्तर में कुल 70 में से 47 वार्ड कांग्रेस ने जीते और बोर्ड बनाया। बीजेपी केवल 14 ही जीत पाई थी। वहीं दक्षिण में 80 में से बीजेपी ने 36 वार्ड जीते, कांग्रेस ने 30 और 14 वार्ड निर्दलीयों ने जीते। कांग्रेस ने निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बना लिया। उदयपुर : पिछली बार सबसे फिसड्डी, इस बार दिखा दी ताकत साल 2019 में हुए पिछले निकाय चुनावों में राजस्थान में सबसे कम उदयपुर नगर निगम में 57.81 फीसदी वोटिंग हुई थी। लेकिन इस चुनाव में उदयपुर में ज्यादा लोग घरों से निकलकर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। पिछली बार के मुकाबले इस बार करीब 12 फीसदी ज्यादा 69.77% वोटिंग हुई। माना जाता है कि कम वोटिंग से कांग्रेस को फायदा होता है, लेकिन पिछले चुनाव में कम वोटिंग के बावजूद बीजेपी ने एकतरफा जीत हासिल की थी। बीजेपा का मजबूत गढ़ माने जाने वाले उदयपुर में इस बार वोटिंग का बढ़ना बीजेपी अच्छा संकेत मान रही है। बीजेपी का मानना है कि पिछली बार से ज्यादा वार्ड जीतकर और ज्यादा पार्षदों की संख्या के साथ मजबूती से बोर्ड बनाएंगे। इधर, कांग्रेस का कहना है कि लोगों को शहरी सरकारों से समस्याओं के समाधान नहीं मिल रहे हैं, इस कारण जनता ने इस बार बदलाव के लिए अच्छी वोटिंग की है। पिछली बार : एकतरफा जीत से बीजेपी ने बनाया बोर्ड
उदयपुर निगम में पिछली बार 57.81% वोटिंग हुई थी। निगम के 70 वार्डों में से 44 वार्ड जीतकर बीजेपी ने बोर्ड बनाया। कांग्रेस 20 वार्ड ही जीत सकी थी। अजमेर : पिछली बार के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया अजमेर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के शहर में वोटिंग प्रतिशत पिछली बार के मुकाबले कम रहा। हालांकि अजमेर भी बीजेपी का गढ़ माना जाता है। वोटिंग गिरने से बीजेपी खेमे में बोर्ड बनाने को लेकर ज्यादा चिंता नजर नहीं आ रही। हालांकि यहां दो बार बीजेपी से मेयर रहे धर्मेंद्र गहलोत की बगावत और देवनानी के खिलाफ तीखे बयानों ने इस चुनाव को चर्चा में बना दिया। धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी निर्दलीय खड़ी हुई हैं, ऐसे में कांग्रेस भी गहलोत पर नजर रखे हुए है। यदि निर्दलीय ज्यादा जीते तो बीजेपी के खेल में खलल पड़ सकता है। पिछली बार : बीजेपी की बंपर जीत, टक्कर तक नहीं दे पाई कांग्रेस
अजमेर निगम में पिछले चुनाव में 66.17% वोटिंग हुई थी। यहां 80 वार्ड में से 48 बीजेपी ने जीतकर बोर्ड बनाया। कांग्रेस 18 वार्ड जीत सकी थी। पाली : बढ़ सकती है निर्दलीयों की भूमिका पाली में वोटिंग परसंटेज लगभग पिछली बार के जैसा रहा। पिछली बार 71.35 फीसदी वोटिंग हुई थी। 70 फीसदी से ऊपर वोटिंग होने के बावजूद बीजेपी को बोर्ड बनाने में मशक्कत करनी पड़ी थी। बीजेपी निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बना पाई थी। इस बार भी वोटिंग से कुछ ऐसा ही संकेत मिल रहा है। निर्दलीयों की भूमिका बढ़ सकती है। कांग्रेस इस तरह के वोटिंग परसेंट को मौके के रूप में देख रही है। अब बस रिजल्ट की ओर नजरें टिकी है, जिससे खुद के साथ निर्दलीयों के आंकड़े भी कुछ साफ हो जाए। पिछली बार : बीजेपी ने निर्दलीयों के समर्थन से बनाया था बोर्ड
पाली नगर परिषद के पिछले चुनाव में भी 65 वार्ड थे। पिछले चुनाव में बीजेपी ने 29 वार्ड जीते और कांग्रेस ने 22 जीते। बीजेपी को 14 निर्दलीयों में से 8 ने समर्थन दिया और पार्टी बोर्ड बनाने में सफल हो गई। कांग्रेस सभी निर्दलीयों को साधने में कामयाब नहीं हो सकी। टोंक नगर परिषद : कांग्रेस ने निर्दलीयों के सहयोग से बनाया था बोर्ड कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट के कारण प्रदेश की नजरें टोंक नगर परिषद पर भी टिकी हुई हैं। यहां कांग्रेस का बोर्ड बना था और पायलट की रणनीति के चलते निर्दलीय कांग्रेस की ओर झुक गए थे। इस बार भी बीजेपी और कांग्रेस में अच्छी टक्कर है। इस बार 77.17 फीसदी वोटिंग हुई है, जो पिछली बार के मुकाबले 3.1 फीसदी बढ़ा है। हालांकि कांग्रेस के नेता इसे चुनौती नहीं मान रहे। उनका मानना है कि यहां कांग्रेस काफी मजबूत है और पिछली बार की तरह इस बार भी बीजेपी को हराने की ताकत रखती है। वहीं बीजेपी नेताओं का मानना है कि वोटिंग परसंटेज बढ़ने का फायदा बीजेपी को होगा और कांग्रेस से बोर्ड इस बार छिन सकता है। टोंक नगर परिषद में 2019 के चुनाव में 74.07 प्रतिशत मतदान हुआ था। कुल 60 वार्ड में से कांग्रेस ने 27 वार्ड, बीजेपी ने 23 और निर्दलीयों ने 10 वार्ड जीते थे। कांग्रेस ने निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बनाया था। ये खबरें भी पढ़ें जयपुर-जोधपुर नगर निगम में रिकॉर्ड वोटिंग:कोटा में थाने में धरने पर बैठीं कांग्रेस जिलाध्यक्ष; भरतपुर जिले में वोट देने के बाद नाचने लगीं बुजुर्ग उदयपुर में भाजपा के सभी प्रत्याशी सूटकेस लेकर होटल पहुंचे:झुंझुनूं में वोटिंग-खत्म होने से पहले कांग्रेस ने की बाड़ेबंदी, उम्मीदवारों को बस-कार से भेजा