पाली- रोहट हाईवे पर गाजनगढ़ टोल प्लाजा के पास शुक्रवार की देर रात प्राइवेट बस पलट गई। हादसे में माता-पिता के सामने 2 मासूम बच्चों की मौत हो गई। वहीं, उदयपुर में PHED में कार्यरत महिला JEN की नवंबर में शादी है। वह एक महीने की छुट्‌टी लेकर घर जा रही थी, लेकिन हादसे ने उसे हॉस्पिटल पहुंचा दिया। उसका पैर फ्रेक्चर हो गया। यात्रियों ने बताया कि बस की रफ्तार करीब 100 किलोमीटर थी। ड्राइवर को बस धीरे चलाने के लिए कहा था, लेकिन उसने अनसुना कर दिया। इसके कारण बस पलट गई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट टोकने पर ड्राइवर बोला- मुझे मत बताओ, बस कैसे चलानी है
उदयपुर PHED ऑफिस में कार्यरत JEN किरण मीणा ने बताया- उसकी 1 नंवबर को शादी है। परिवार जोधपुर में रहता है। पिता जयसिंह की रेलवे में नौकरी है। शादी के लिए वह एक महीने की छुट्‌टी लेकर अपने घर जोधपुर जा रही थी। शुक्रवार रात करीब 10 बजे उदयपुर से बस में बैठी थी। शुरू से ही ड्राइवर बस को तेज स्पीड में चला रहा था। बस की स्पीड करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रही होगी। ड्राइवर को कुछ यात्रियों ने टोका भी, लेकिन बोला कि बस कैसे चलानी है, मुझे मत सिखाओ। कई सालों से चला रहा हूं। ड्राइवर जिस तरह से बस चला रहा था, उसे देखकर पूरे रास्ते में उन्हें नींद नहीं आई। रात करीब 2 बजे वह खुद अपनी सीट से उठी और ड्राइवर के पास जाकर उससे बस धीरे चलाने को बोला। इतने में अचानक बस पलट ही गई। किरण मूल रूप से दौसा जिला निवासी है। उनके होने वाले पति अश्विनी कुमार भी JEN है, जो करौली जिले के रहने वाले है। दोनों की इसी साल एक नवंबर को शादी होने वाली है। रोते हुए गजेन्द्र बोला- बेटी का सिर धड़ से अलग हो गया
मध्यप्रदेश के बोरखेड़ा (रतलाम) निवासी गजेन्द्र ने बताया- बच्चों और अन्य रिश्तेदारों के साथ जैसलमेर जा रहे थे। वहां उनके फसल कटाई का काम करना था। हादसे के वक्त वे सो रहे थे। हादसा होने पर उनकी नींद खुली तो साथी यात्री दर्द से चीख रहे थे, चिल्ला रहे थे। मेरी पत्नी और एक बेटी भी शामिल थे। एक साल की बेटी दिव्या नजर नहीं आई तो उसे ढूंढा। उसकी हालत देख मेरी रूह कांप गई। उसका सिर धड़ से अलग हो रखा था। दिल पर पत्थर रखकर उसकी बॉडी बाहर लेकर आया हूं। कमाने के लिए जैसलमेर जा रहे थे, लेकिन दीवाली पर हादसे ने जिंदगी भर नहीं भूलने वाला गम दे दिया। 7 साल की मासूम के सीने में घुसा कांच, बना मौत का कारण
हादसे में 7 साल की मासूम सोना की भी दर्दनाक मौत हुई। मृतका के पिता रामलाल ने बताया कि वे एमपी के खेतपालिया के रहने वाले है। जैसलमेर में फसल कटाने के लिए जा रहे थे। परिवार के कई लोग उनके साथ थे। हादसे के बाद उन्हें जब होश आया, तो उनकी लाडली बेटी सोना का सिर खिड़की में फंसा था और सीने में कांच चुभे हुए थे। बड़ी मुश्किल से उसे निकाला। इलाज के लिए पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लाया गया, जहां डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा सके। कांच से मासूम के हार्ट में गहरी चोट आई। हम तो मजदूरी पर जैसलमेर जा रहे थे, जिससे दीपावली का त्योहार अच्छे से मना सके, लेकिन ने सबकुछ बदल दिया। पुलिसकर्मी बोला- मौके पर पहुंचे तो बस पलटी मिली, यात्री दर्द से चीख रहे थे
रोहट थाने के हेड कॉन्स्टेबल कमल सिंह ने बताया- वे शुक्रवार को नाइट डीओ की ड्यूटी पर थे। हादसे की सूचना मिली तो तुरंत एम्बुलेंस को कॉल किया। साथी पुलिसकर्मी कॉन्स्टेबल श्रवणराम, जेठाराम और दिनेश को साथ लेकर मौके पर पहुंचा। जहां बस पलटी मिली, वहां यात्री दर्द से चीख रहे थे। तुरंत सभी ने मिलकर के आगे के कांच और खिड़कियों के कांच तोड़कर करीब 40 घायलों को बाहर निकाला। तब तक और भी लोग पहुंच गए। सभी की मदद से घायलों को एम्बुलेंस में डालकर हॉस्पिटल के लिए रवाना किया।