कोटा की बेटी अरुंधति ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में इतिहास रच दिया है। अरुंधति ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की बॉक्सिंग (70 किलोग्राम भार वर्ग) में गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ कोटा, बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। अरुंधति ने शनिवार को हुए फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड की खिलाड़ी चैंटेल रीड को एकतरफा शिकस्त दी। अरुंधति के तेवर बचपन से ही आक्रामक थे। वह महज 6 महीने की उम्र में ही आधा लीटर दूध पी जाती थीं। स्कूल के दिनों में लड़कियों से उनका कभी कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं होता था, लेकिन लड़कों से सीधे मुकाबले के लिए वह हमेशा तैयार रहती थीं। कई बार तो ऐसा भी हुआ कि लड़कों की बदमाशी पर अरुंधति ने उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। जब घर तक शिकायत पहुंचती थी, तब माता-पिता को उनके इस कारनामे का पता चलता था। इस पर भी वह अपने माता-पिता से साफ कह देती थीं- कोई बीच में नहीं आएगा, मैं इस मामले को खुद हैंडल करूंगी। पढ़िए अरुंधति चौधरी की कहानी… 6 पॉइंट में अरुंधति चौधरी की कहानी… 1. चंचल स्वभाव और चटपटे खाने की शौकीन, ट्रेनिंग के बाद घर के कामों में भी बंटाती हैं हाथ अरुंधति की मां सुनीता ने बताया- अरुंधति शुरुआत से ही पढ़ाई में बहुत तेज रही हैं। वह स्वभाव से काफी चंचल हैं। मेरी बेटी को गुस्सा भी बहुत जल्दी आता है। उसे खाना-पीना बहुत पसंद है, खासकर चटपटा भोजन। हालांकि, बॉक्सिंग के कारण उन्हें अपने इस पसंदीदा चटपटे खाने को छोड़ना पड़ा। वह इतनी ऊर्जावान हैं कि कठिन ट्रेनिंग के बाद भी बिना थके घर के कामों में हाथ बंटाती हैं। किचन का काम करना बेहद पसंद है। 2. बास्केटबॉल से शुरू हुआ सफर, पिता के दिए 3 विकल्पों में से चुनी बॉक्सिंग अरुंधति के पिता सुरेश चौधरी बताते हैं कि वह शुरुआत में बास्केटबॉल खेलती थीं। खेल के प्रति अरुंधति का गजब के जुनून को देखते हुए मैंने ने उसे तीन विकल्प दिए— बॉक्सिंग, टेनिस और बैडमिंटन। अरुंधति ने बिना झिझक बॉक्सिंग को चुना। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपनी इसी जिद और पक्के इरादे के दम पर वह आज इस मुकाम पर पहुंची हैं। 3. स्कूल में बनवाई रिंग, डाइट के लिए खोला डेयरी फार्म सुरेश चौधरी ने बताया उस समय राजस्थान में बॉक्सिंग का कोई अच्छा कोच नहीं था। बेटी को बेहतरीन ट्रेनिंग दिलाने के लिए उन्होंने जयपुर से लेकर भोपाल तक के चक्कर काटे। उस दौरान अरुंधति सातवीं-आठवीं कक्षा में पढ़ती थीं। जब बाहर कहीं बात नहीं बनी, तो वह वापस कोटा आ गए और यहां के बॉक्सिंग कोच अशोक गौतम से संपर्क किया। बेटी की ट्रेनिंग के लिए उन्होंने स्कूल में ही रिंग तैयार करवाई और उनकी पौष्टिक डाइट के लिए अपने गांव के फार्म हाउस पर एक डेयरी फार्म भी शुरू किया। 4. रोज 150 बादाम और 4 लीटर दूध की डाइट, विदेश दौरों पर साथ जाता था आटे का सत्तू
सुरेश चौधरी ने आगे बताया- अरुंधति बचपन में रोज 150 बादाम, 4 लीटर दूध और करीब आधा किलो पनीर खाती थीं। कोटा से बाहर जब भी वह ट्रेनिंग के लिए जाती थीं, तो उनके लिए घर का देसी घी भेजा जाता था। कई बार विदेश दौरों पर खाने की दिक्कत होने पर वह यहां से आटे का सत्तू बनाकर साथ ले जाती थीं। वह बचपन से ही काफी गुस्सैल रही हैं। भाई-बहनों पर वह अकेली भारी पड़ती थीं और कई बार गुस्से में उन्होंने घर के फर्नीचर और दरवाजे तक तोड़ दिए थे।
5. दोनों हाथों में लगी हैं प्लेट्स, फिर भी नहीं मानी हार सुरेश चौधरी ने कहा- बॉक्सिंग एक कड़ा खेल है जिसमें चोटें (इंजरी) बहुत लगती हैं। अरुंधति भी इससे अछूती नहीं रहीं। उनके कलाई (रिस्ट) के दो ऑपरेशन हो चुके हैं और दोनों हाथों में प्लेट लगी हुई है। इसके अलावा उनकी एड़ी में भी फ्रैक्चर हो चुका है। बीच में करीब 2-3 साल तक फेडरेशन के साथ कुछ विवाद रहा, जिसके कारण उनके करियर में 3 साल का उतार-चढ़ाव आया। लेकिन जो भी रहा, यह सफर बेहद खूबसूरत और सफलता से भरा रहा। 6. फैटी लीवर के कारण बदलना पड़ा डाइट चार्ट, 12 किलो वजन घटाकर की शानदार वापसी कोच अशोक गौतम ने बताया- अरुंधति कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुकी हैं। साल 2021 तक वह 60 किलो भार वर्ग में खेलती थीं। साल 2022 से उन्होंने सीनियर कैटेगरी में खेलना शुरू किया। फैटी लीवर की शिकायत होने के कारण भारतीय टीम के डाइटिशियन ने उनकी डाइट से भारी चीजें बंद करवा दीं। इसके बाद अरुंधति ने अपनी डाइट बदली और अब वह दाल, चावल, चपाती, प्रोटीन और लिक्विड डाइट लेती हैं। वह रोज सुबह 5 बजे उठकर 6-7 घंटे कड़ा वर्कआउट करती हैं। कोच ने बताया कि एक समय वजन घटाने के कारण उनमें कमजोरी आ गई थी, लेकिन साल 2024 से उन्होंने 70 किलो भार वर्ग में खेलना शुरू किया और शानदार वापसी की।