भारत-पाकिस्तान बॉर्डर से सटे श्रीगंगानगर जिले में 15 अगस्त से पहले सेना की नई डिजिटल पैटर्न कॉम्बैट यूनिफॉर्म के नकली कपड़े बाजार में बिकने का खुलासा हुआ है। साथ ही दिल्ली से सप्लाई चेन को भी पकड़ा है। आर्मी इंटेलिजेंस की सूचना पर दिल्ली के अजाद मार्केट की करीब 600 दुकानों पर कार्रवाई की गई, जहां से अधिकांश दुकानें बिना लाइसेंस सेना की वर्दी से मिलता-जुलता कपड़ा श्रीगंगानगर की दुकानों पर सप्लाई कर रही थी। इसके बाद श्रीगंगानगर की कोतवाली पुलिस और आर्मी इंटेलिजेंस की संयुक्त टीम ने एक साथ मुख्य बाजारों में दबिश दी और दुकानों पर रखे नकली कपड़ों को जब्त किया। रेलवे स्टेशन रोड स्थित करीब एक दर्जन दुकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें कॉम्बैट फैब्रिक, जूते, फीते, कैप और सेना से जुड़े अन्य सामान भी जब्त किए गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि खुले बाजार में बिना लाइसेंस यह प्रतिबंधित कॉम्बैट फैब्रिक से बनी वर्दी के लोगों से करीब 1500 से 5 हजार रुपए तक वसूल रहे थे। आर्मी इंटेलिजेंस की टीम ने एक हजार से ज्यादा मीटर कपड़ा जब्त किया है। कोतवाली थाना प्रभारी तेजवंत सिंह बराड़ ने बताया- आर्मी इंटेलिजेंस से इनपुट मिला था कि कुछ दुकानों पर सेना की प्रतिबंधित नई डिजिटल पैटर्न कॉम्बैट यूनिफॉर्म खुलेआम बेची जा रही है, जिसमें नकली कपड़ा यूज किया जा रहा है। इन दुकानों पर की गई छापेमारी अपना आर्मी टेलर्स, जय भोले आर्मी स्टोर, आरडी आर्मी स्टोर, पंजाबी आर्मी टेलर्स, चरण आर्मी टेलर, श्री प्रयाग आर्मी स्टोर, कुक्कड़ आर्मी स्टोर, राज आर्मी स्टोर, जेएमडी आर्मी टेलर सहित कई दुकानों पर कार्रवाई की गई। दिल्ली से सप्लाई चेन जांच में सामने आया कि ये कपड़ा दिल्ली के आजाद नगर (महालक्ष्मी मार्केट) से लाया जा रहा है। वहां करीब 600 दुकानें सेना की ड्रेस का कपड़ा बेचती हैं। श्रीगंगानगर के इन दुकानदारों के पास कोई लाइसेंस नहीं है। 2023 से लागू नया पैटर्न रक्षा मंत्रालय के पास है, फिर भी खुले बाजार में इसकी अवैध बिक्री हो रही है। आर्मी इंटेलिजेंस की जांच में श्रीगंगानगर में रेलवे स्टेशन रोड स्थित अपना आर्मी टेलर्स की जांच के दौरान दुकान संचालक भजनलाल ने पूछताछ में बताया कि वह सेना की कॉम्बैट यूनिफॉर्म की सिलाई करता है और इसके लिए कपड़ा डोडा ट्रेडर्स से खरीदता है। इसके बाद डोडा ट्रेडर्स की जांच में सामने आया कि हर्ष नाम का व्यक्ति सेना की कॉम्बैट यूनिफॉर्म से मिलता-जुलता कपड़ा श्रीगंगानगर के कई टेलर्स और दुकानों के अलावा जिले के बाहर तथा आम ग्राहकों को भी उपलब्ध करा रहा था। रिपोर्ट में इस सप्लाई चेन की पहचान कर आगे आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने और अनधिकृत बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। आतंकवादियों द्वारा गलत इस्तेमाल की आशंका आर्मी इंटेलिजेंस के सूत्रों ने बताया कि भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे इस संवेदनशील इलाके में आतंकवादी गतिविधियां होने की संभावना बनी रहती है। आतंकवादी सेना की वर्दी का गलत इस्तेमाल कर आसानी से घुसपैठ या हमले की योजना बना सकते हैं। अगर कोई आतंकवादी सेना की ड्रेस पहनकर किसी कार्यक्रम या संवेदनशील जगह पर पहुंच जाए तो उसे आसानी से रोकना मुश्किल हो जाता है। इसका फायदा उठाकर बड़े हमले या ब्लास्ट जैसी घटनाएं अंजाम दी जा सकती हैं। 2023 में लागू हुई सेना की नई डिजिटल पैटर्न कॉम्बैट यूनिफॉर्म की मांग काफी बढ़ गई है। सीएसडी कैंटीन और बीएसएफ में यह कपड़ा आसानी से उपलब्ध नहीं होता, इसलिए अवैध बाजार में इसकी काफी कीमत मिल जाती है। हालांकि, इस कपड़े को खरीदने के लिए फौजी 4 से 5 हजार रुपए तक दे देते हैं। 1500 में मिल रही आर्मी की वर्दी सीएसडी कैंटीन में कपड़ा 1700 रुपए का मिलता है। सिलाई 1500 रुपए में होती है। 3500 रुपए में सेना की वर्दी तैयार हो जाती है। अवैध दुकानों पर यह कपड़ा 1500 रुपए में बिक रहा है। दुकानदार 5 हजार रुपए भी वसूल कर रहे हैं। मुनाफे के चक्कर में दुकानदार देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। आर्मी इंटेलिजेंस ने अब तक 1000 मीटर से ज्यादा कपड़ा जब्त किया है। कार्रवाई के बाद कई दुकानदारों ने स्टॉक छुपा लिया। सेना ने नई यूनिफॉर्म का IPR कराया है सेना के अनुसार भारतीय सेना ने 2022 में अपनी नई डिजिटल कैमोफ्लाज पैटर्न कॉम्बैट यूनिफॉर्म (ड्रेस नंबर-7/2022) लागू की थी। इस यूनिफॉर्म के डिजाइन और कैमोफ्लाज पैटर्न का इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) भारतीय सेना के नाम रजिस्टर कराया गया है। सेना के मुताबिक इस पैटर्न के कपड़े या वर्दी का किसी भी व्यक्ति या विक्रेता द्वारा निर्माण, बिक्री पूरी तरह अवैध है और ऐसा करने वालों के खिलाफ सिविल कोर्ट में मुकदमा और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। नई डिजिटल कॉम्बैट यूनिफॉर्म केवल नियंत्रित व्यवस्था के तहत केंद्रीय खरीद और सीएसडी (कैंटीन स्टोर्स डिपो) के माध्यम से ही उपलब्ध कराई जाएगी तथा इसे खुले नागरिक बाजार में बेचने की अनुमति नहीं है। सेना ने पुराने कॉम्बैट यूनिफॉर्म की खुले बाजार में आसान उपलब्धता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बताया है। कुछ खुफिया इनपुट्स के आधार पर आशंका जताई गई है कि राष्ट्रविरोधी तत्व नई डिजिटल पैटर्न यूनिफॉर्म हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं, इसलिए सैन्य क्षेत्रों और छावनियों के आसपास इस तरह के कपड़े की अनधिकृत बिक्री रोकने के लिए सभी राज्यों के डीजीपी, पुलिस आयुक्तों, स्थानीय सैन्य प्राधिकरणों और सैन्य पुलिस को समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आर्मी इंटेलिजेंस का कहना है कि मुनाफे के लालच में ये दुकानदार सुरक्षा तंत्र को कमजोर कर रहे हैं। आगे और छापेमारी की संभावना है। सुरक्षा एजेंसियां इस सप्लाई चेन को तोड़ने की कोशिश में जुटी हुई हैं।
