जिस व्यक्ति के नाम 50 बीघा जमीन थी, उसकी मौत को 33 साल बीत चुके थे, लेकिन जमीन हड़पने के लिए उसी के नाम से फर्जी मालिक खड़ा कर दिया गया। असली वारिसों ने जमीन बेचने से इनकार किया तो आरोपियों ने फर्जी आधार-पैन और गवाह तैयार कर रजिस्ट्री कराने की साजिश रच ली। बीकानेर के खाजूवाला उप रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री से पहले ही यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया। जांच में सामने आया कि रजिस्ट्री कराने पहुंचा व्यक्ति असली जमीन मालिक नहीं था, बल्कि फर्जी तरीके से खड़ा किया गया था। तहसीलदार ने मामले का खुलासा किया, जिसके बाद पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और षड्यंत्र की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पढ़िए… सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम जमीन के दो बैनामे रजिस्ट्री के लिए पेश किए गए तहसीलदार हरीश कुमार टाक ने बताया – 27 जुलाई को चक 6 बीजीएम स्थित 50 बीघा जमीन के दो बैनामे रजिस्ट्री के लिए पेश किए गए थे। इन दस्तावेजों में दानाराम पुत्र गिरधारी लाल को जमीन का विक्रेता और वेदप्रकाश पुत्र सूजाराम को खरीदार बताया गया था। रजिस्ट्री की प्रक्रिया चल रही थी, इसी दौरान असली दानाराम के वारिसों ने आपत्ति दर्ज कराई। वारिसों की आपत्ति के बाद जांच शुरू हुई, फर्जी निकले दस्तावेज वारिसों ने बताया – तहसील कार्यालय में मौजूद व्यक्ति असली दानाराम नहीं है, क्योंकि वास्तविक जमीन मालिक दानाराम भाट पुत्र खियाराम की वर्ष 1993 में ही मौत हो चुकी थी। वह फतेहपुर, जिला सीकर का निवासी थे। आपत्ति मिलने के बाद पूरे मामले पर शक हुआ और दस्तावेजों की जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि पेश किए गए आधार कार्ड और पैन कार्ड भी फर्जी थे। पुलिस ने मृतक दानाराम के वारिसों को भी जांच में शामिल होने के लिए बुलाया है। पूछताछ में खुलासा, चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज पूछताछ में फर्जी दानाराम ने बताया – वह दानाराम पुत्र खियाराम नहीं, बल्कि दानाराम पुत्र गिरधारी लाल निवासी सोनपालसर, सरदारशहर (चूरू) है। हालांकि दस्तावेजों में उसने अपना पता जैतपुर, लूणकरणसर दर्ज कराया था। पूछताछ में सामने आया कि उसके साथ दानाराम का बेटा प्रकाश भाट भी आया था, जो पुलिस की भनक लगते ही वहां से निकल गया। फर्जी दानाराम के नाम पर कोई जमीन भी नहीं है। जमीन नहीं बेची तो फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराने पहुंचे मामले के अनुसार, तीन-चार महीने पहले रजिस्ट्री में गवाह बने अन्नाराम निवासी छत्तरगढ़ ने फतेहपुर (सीकर) जाकर मृतक दानाराम के परिजनों से संपर्क किया था। उसने जमीन बेचने की बात कही, लेकिन परिजनों ने जमीन बेचने से मना कर दिया था। आरोप है कि अन्नाराम ने अपने रिश्तेदार को दानाराम बनाकर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करवाने की योजना बनाई। 27 जुलाई को जब वे रजिस्ट्री करवाने तहसील कार्यालय पहुंचे, उसी समय मूल जमीन मालिक के वारिस भी वहां पहुंच गए और उन्होंने आपत्ति दर्ज करा दी। जांच में यह भी सामने आया कि वेदप्रकाश विश्नोई ने जेठूराम के जरिए गवाह अन्नाराम भाट (छत्तरगढ़) से संपर्क किया और उसे बुलाया। दूसरा गवाह राऊराम भाट खाजूवाला का निवासी है। जांच के बाद चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज जांच और पूछताछ के बाद खाजूवाला थाने में 27 जुलाई रात करीब 9 बजे दानाराम पुत्र भींवाराम, राऊराम, अन्नाराम और वेदप्रकाश के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच एसआई कोहरसिंह को सौंपी गई है। कंटेंट : दलीप नोखवाल, खाजूवाला