सलूम्बर में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को जिलेभर में श्रद्धा और गुरु भक्ति का संगम देखने को मिला। शहर स्थित गायत्री शक्तिपीठ, लकापा और सेमारी के राजा वासक शेषावतार गातोड़जी धाम में दिनभर धार्मिक आयोजन हुए। सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और वैदिक मंत्रोच्चार, गुरु महिमा के जयघोष तथा भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। लकापा स्थित गायत्री शक्तिपीठ में प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया। इसके बाद गुरु पूजन, प्रार्थना और विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालुओं ने गुरुजनों का आशीर्वाद लिया। शक्तिपीठ के संस्थापक-संयोजक हेमंत कुमार भट्ट और अध्यक्ष कांतिलाल सोनी ने कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का पर्व है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने सद्मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। गातोड़जी धाम में श्रद्धालुओं की लगी लंबी कतारें सेमारी स्थित राजा वासक शेषावतार गातोड़जी धाम में पीठाधीश्वर संत फलाहारी महाराज के सान्निध्य में गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावट से सजाया गया। सुबह पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। सुबह 7 से 9 बजे तक आरती हुई, जिसके बाद हवन-यज्ञ में श्रद्धालुओं ने विश्व कल्याण की कामना के साथ आहुतियां दीं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्त श्रीफल, वस्त्र, फूल-मालाएं और दक्षिणा अर्पित कर संत फलाहारी महाराज का आशीर्वाद लेते रहे। ‘गातोड़जी महाराज की जय’ और ‘फलाहारी महाराज की जय’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। महिलाओं ने समूह में मंगल गीत प्रस्तुत किए। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने गुरु दीक्षा ग्रहण कर आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर होने का संकल्प लिया। प्रेम, सेवा और सदाचार का दिया संदेश संत फलाहारी महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए प्रेम, सेवा और सदाचार का संदेश दिया। उन्होंने सभी भक्तों से समाज में सकारात्मक मूल्यों को अपनाने और महाप्रसादी में शामिल होने का आग्रह किया। दिनभर चले धार्मिक आयोजनों के बाद महाप्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सलूम्बर जिले के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और दूर-दराज से पहुंचे भक्तों की बड़ी संख्या ने गुरु पूर्णिमा महोत्सव को भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।