डूंगरपुर के आसपुर के रहने वाले किसान अमरीजी पाटीदार ने 1.50 करोड़ की 10.15 बीघा जमीन सांवलिया सेठ के नाम कर दी है। इसके साथ ही अपने मकान की रजिस्ट्री भी सांवलिया सेठ के नाम करने का स्टांप मंदिर प्रशासन को सौंपा है। इसकी प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद करीब डेढ़ करोड़ का मकान भी भगवान के नाम हो जाएगा। अमरीजी पाटीदार शनिवार को सांवलिया जी पहुंचे। उन्होंने बताया कि 23 जुलाई को रजिस्ट्री कार्यालय में भगवान के नाम रजिस्ट्री कराई। इसके लिए 10 साल तक चक्कर काटे। इस जमीन पर आम के पेड़ भी है। ये सब सांवलिया जी को समर्पित कर दिए हैं। उनकी इच्छा है कि यहां गौशाला का निर्माण हो या फिर किसी की सामाजिक कार्यक्रम के उपयोग आ सके। जमीन भगवान के नाम करने में 10 साल लगे अमरजी पाटीदार ने बताया- वे साल 2013 से लगातार भगवान श्री सांवलिया सेठ के दर्शन करने आते रहे हैं। साल 2015-16 के दौरान उन्होंने मंदिर प्रशासन के सामने अपनी पूरी संपत्ति भगवान को दान करने की इच्छा जताई थी। जब मंदिर प्रशासन ने डॉक्यूमेंट्स की जांच की तो सामने आया कि जमीन अलग-अलग टुकड़ों में उनके रिश्तेदारों के नाम हैं। ऐसे में, सीधे दान की प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं था। इसके बाद मामला कुछ समय तक रुका रहा। पाटीदार ने बताया- इसके बाद कुल 16 बीघा जमीन मेरे हिस्से आनी थी। बीच-बीच में जमीन रिश्तेदारों के नाम थी। ऐसे में उन्होंने 16 बीघा एक साथ ले ली। इसके लिए जो भी खर्चा था, वो उन्होंने ही उठाया। इसके बाद 10.15 बीघा जमीन उन्होंने सांवलिया जी के नाम की। नायब तहसीलदार एवं मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी प्रथम शिव शंकर पारीक ने बताया कि सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब 1.165 हेक्टेयर यानी लगभग 10 बीघा से ज्यादा जमीन भगवान श्री सांवलिया सेठ के नाम भेंट स्वरूप दर्ज करवाई गई। दान-पत्र पर साइन कर प्रक्रिया पूरी की पाटीदार कहते हैं- इस दौरान कई प्रशासनिक अधिकारी, मंदिर मंडल के सीईओ और अध्यक्ष बदले। मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारी द्वितीय एवं लेखाकार राजेंद्र सिंह, संपदा प्रभारी भैरू गिरी गोस्वामी और पूर्व गिरदावर गोपाल सिंह आसपुर आए। इसके बाद अमरजी सांवलियाजी पहुंचे और अपने बहुमंजिला मकान को भी भगवान के नाम अर्पित करने के लिए दान पत्र पर हस्ताक्षर कर जरूरी कार्रवाई पूरी कर दी। परिवार में अकेले, मां की 1 किलो चांदी भी चढ़ाएंगे पाटीदार कहते हैं- पिता का निधन 12 दिसंबर 2012 को हो गया था। इसके बाद परिवार में केवल मां और मैं ही रह गए थे। अन्य रिश्तेदार भी हैं, लेकिन वो दूसरे राज्यों और जिलों में रहते हैं। साल 2023 में माताजी का भी निधन हो गया। माता-पिता की सेवा के चलते शादी भी नहीं की। मेरी भगवान कृष्ण और भगवान राम में उनकी बचपन से गहरी आस्था रही है। इसी आस्था के चलते तय किया कि पूरी संपत्ति भगवान की होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पहले साल 2013-14 में अपने पिता के कानों की सोने की मूर्कियां भी भगवान सांवलिया सेठ को अर्पित कर चुके हैं।अब उनकी इच्छा है कि मां की करीब एक किलो चांदी के आभूषण भी भगवान को चढ़ाए जाएं। …… ये खबर भी पढ़ें… सांवलियाजी को चढ़ाई 25.65 लाख की चांदी की सिल्लियां:श्रद्धालु ने बेटे के लिए मांगी थी मन्नत, पूरी होने पर MP से आया परिवार चित्तौड़गढ़ में सांवलिया सेठ मंदिर में बुधवार को एक श्रद्धालु ने 11 किलो 400 ग्राम वजन चांदी की 19 सिल्लियां भेंट कीं। इनकी बाजार कीमत करीब 25 लाख 65 हजार रुपए आंकी गई है। मध्यप्रदेश के देवास जिले के सोहनगंज क्षेत्र निवासी श्रद्धालु ने अपना नाम सार्वजनिक नहीं किया। मंदिर प्रशासन को बताया कि उसने बेटे से जुड़ी एक मनोकामना लेकर सांवलिया सेठ के दरबार में प्रार्थना की थी। पूरी खबर पढ़ें…
