आठवीं तक पढ़ा एक शराब कारोबारी घाटे और बढ़ते कर्ज के बाद अफीम तस्कर बन गया। पिता के नाम वैध अफीम खेती का पट्टा होने से उसे इस कारोबार और नेटवर्क की पूरी जानकारी थी। उसने अपने खेत के साथ आसपास के किसानों से भी अफीम जुटाकर राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात में सप्लाई शुरू कर दी। पुलिस से बचने के लिए वह बस और कुरियर से पार्सल भेजता, अलग-अलग रास्तों और गाड़ियों का इस्तेमाल करता था। दौसा में एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज होने के बाद वह पुलिस की नजर में आया। करीब एक साल तक फरार रहने के बाद एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने चित्तौड़गढ़ में शादी समारोह से लौटते समय पीछा कर घेराबंदी करते हुए दबोच दिया। बदमाश ने रास्ता बदलकर भागने की भी कोशिश की, लेकिन पकड़ा गया। पहले पढ़ें… कैसे पकड़ा गया तस्कर 1. एक साल दे रहा था पुलिस को चकमा आईजीपी विकास कुमार ने बताया- मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले का रहने वाला सुखलाल आंजना पर 25 हजार रुपए घोषित था। करीब एक साल से पुलिस को चमका दे रहा था। राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात में एनडीपीएस एक्ट समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। 2. शादी में गया था, लौटते समय बिछाया जाल पुलिस को सूचना मिली थी कि मंदसौर निवासी सुखलाल आंजना काले रंग की थार से भीलवाड़ा में शादी समारोह में आया है। कार्यक्रम के बाद चित्तौड़गढ़ होते हुए अपने गांव लौटेगा। सूचना मिलते ही ANTF की टीम सादे कपड़ों में चित्तौड़गढ़-भीलवाड़ा हाईवे पर निगरानी करने लगी। कुछ देर बाद संदिग्ध थार दिखाई दी तो पुलिस ने उसका पीछा शुरू कर दिया। 3. रास्ता बदलकर बचने की कोशिश की, घेरकर पकड़ा पुलिस की भनक लगते ही आरोपी ने पहले भीलवाड़ा रोड से उदयपुर रोड की तरफ गाड़ी मोड़ी, फिर कुछ दूरी पर यू-टर्न लेकर कोटा रोड की ओर निकलने की कोशिश की। हालांकि दूसरी टीम पहले से ही निंबाहेड़ा रोड स्थित ओछड़ी टोल नाके पर तैनात थी। जैसे ही थार वहां पहुंची, दोनों टीमों ने घेराबंदी कर गाड़ी रुकवाई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
अब जानिए … कैसे बना अपराधी और तस्करी का तरीका 1. खेती और शराब के कारोबार में घाटा हुआ तो अफीम तस्करी में उतर गया आईजीपी विकास कुमार ने बताया – आरोपी ने आठवीं तक पढ़ाई करने के बाद खेती शुरू की थी, लेकिन इसमें उसे उम्मीद के मुताबिक फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उसने शराब के ठेके लिए, लेकिन वहां भी लगातार नुकसान होता गया और कर्ज बढ़ गया। जल्दी ज्यादा पैसा कमाने के लालच में उसने अफीम की तस्करी शुरू कर दी। उसके पिता के नाम वैध अफीम खेती का पट्टा था, इसलिए उसे अफीम उत्पादन और उससे जुड़े नेटवर्क की अच्छी जानकारी थी। इसी का फायदा उठाकर वह अपने खेत की अफीम के साथ-साथ आसपास के किसानों से भी अवैध तरीके से अफीम जुटाने लगा और राजस्थान, मध्यप्रदेश व गुजरात में सक्रिय तस्करों तक पहुंचाकर मोटा मुनाफा कमाने लगा। 2. बस और कुरियर से भेजता था माल, पुलिस से बचने के लिए बदलता था रास्ते जांच में सामने आया कि आरोपी हर बार खुद माल लेकर नहीं जाता था। कई बार वह बसों के जरिए कुरियर से पार्सल भेजता था और जरूरत पड़ने पर खुद भी डिलीवरी करता था। पुलिस से बचने के लिए वह हर बार अलग-अलग गाड़ियां और रास्ते अपनाता था। मोबाइल पर भी कम बात करता था और ज्यादातर व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क रखता था, ताकि उसकी लोकेशन और नेटवर्क का पता नहीं चल सके। आईजीपी ने बताया कि आरोपी खुद को सिर्फ माल पहुंचाने और भुगतान लेने तक सीमित रखता था, ताकि उसके नेटवर्क के दूसरे लोगों की पहचान सामने नहीं आए। 3. दौसा में केस दर्ज होने के बाद फरार हुआ, तीन राज्यों में हैं कई मामले आईजीपी ने बताया कि दौसा जिले के मेहंदीपुर बालाजी थाना क्षेत्र में एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गया था। इसके बाद एसपी दौसा ने उस पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात में कई मामले दर्ज हैं। वर्ष 2025 में गुजरात के गांधीनगर और राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी में एनडीपीएस एक्ट के केस दर्ज हुए, जबकि 2026 में मध्यप्रदेश के नाहरगढ़ थाने में हत्या के प्रयास और मारपीट का मामला भी दर्ज हुआ। आईजीपी विकास कुमार ने बताया कि मध्यप्रदेश अफीम उत्पादन और अवैध नेटवर्क का बड़ा केंद्र है। इसी वजह से ANTF लगातार वहां सक्रिय तस्करों पर नजर रख रही है। सुखलाल इस अभियान में मध्यप्रदेश से गिरफ्तार किया गया 11वां तस्कर है।
