चित्तौड़गढ़ क्रिकेट एसोसिएशन का चुनाव अब बड़े विवाद की वजह बन गया है। चुनाव कराने का दावा किया गया, लेकिन जिस जगह मतदान होना बताया गया था, वहां चुनाव जैसी कोई गतिविधि नहीं मिली और चुनाव कार्यालय पर ताला लगा मिला। कई सदस्यों का कहना है कि उन्हें चुनाव की सूचना ही नहीं दी गई। जिला खेल अधिकारी और राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) तक को आखिरी समय में जानकारी मिली। इतना ही नहीं, चुनाव के बाद भी नतीजों की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। ऐसे में पूरा चुनाव सवालों के घेरे में आ गया है और इसकी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। तय जगह पर नहीं मिला चुनाव, दूसरे होटल में होने की चर्चा जानकारी के अनुसार, चित्तौड़गढ़ क्रिकेट एसोसिएशन पिछले करीब दो साल से तदर्थ (एडहॉक) कमेटी के जरिए संचालित हो रही है। कुछ सदस्यों ने चुनाव नहीं होने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद कोर्ट ने चुनाव कराने के निर्देश दिए। आरोप है कि 25 मई की तारीख का नोटिफिकेशन जारी दिखाया गया और 19 जुलाई को मतदान तय कर दिया गया, लेकिन इसकी जानकारी न तो एसोसिएशन के अधिकांश सदस्यों को दी गई और न ही समय पर संबंधित विभागों तक पहुंची। रविवार को जब सदस्य और अन्य लोग सांवलियाजी स्थित गोकुल विश्रांति गृह पहुंचे, जहां चुनाव होना बताया गया था, तो वहां चुनाव अधिकारी नहीं मिले और चुनाव कार्यालय बताए गए कमरे पर ताला लगा मिला। हालांकि चर्चा रही कि मंगलवाड़ क्षेत्र के एक होटल में कुछ लोगों की मौजूदगी में चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली गई, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी। 24 घंटे बाद भी नहीं आए नतीजे चुनाव को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर मतदान हो चुका था तो उसके बाद परिणाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए। आमतौर पर चुनाव पूरा होने के बाद चुनाव अधिकारी विजेताओं की घोषणा करता है, लेकिन यहां 24 घंटे से ज्यादा समय बीतने के बाद भी कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं हुई। चुनाव अधिकारी, तदर्थ समिति के अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कई लोगों ने फोन नहीं उठाया। कुछ सदस्यों का आरोप है कि एसोसिएशन के पुराने सदस्यों को सूचना नहीं दी गई और नए सदस्यों को जोड़कर चुनाव कराने की कोशिश की गई। उनका यह भी कहना है कि तदर्थ समिति को नए सदस्य बनाने का अधिकार ही नहीं है। ऐसे में पूरे चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश और प्रक्रिया पर भी उठे सवाल इस मामले में सदस्यों का कहना है कि हाईकोर्ट ने समय पर चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन चुनाव की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं अपनाई गई। आरोप है कि मतदाता सूची सार्वजनिक नहीं की गई, सदस्यों को नोटिस नहीं भेजा गया और चुनाव की जानकारी भी अंतिम समय में दी गई। जिला खेल अधिकारी और आरसीए को भी समय पर सूचना नहीं मिलने की बात सामने आई है। अब एसोसिएशन के कई सदस्य पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और चुनाव प्रक्रिया की वैधता की जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि क्रिकेट जैसे महत्वपूर्ण खेल से जुड़े संगठन में चुनाव पूरी पारदर्शिता और तय नियमों के अनुसार होने चाहिए, ताकि खिलाड़ियों और खेल के हितों पर किसी तरह का सवाल खड़ा न हो।
