प्रदेश में सरकार ने ग्रामीण-शहरी शिविर की अवधि 31 अगस्त तक बढ़ा दी है। एक बार फिर प्रदेशभर में यह शिविर मंगलवार से लगेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को सीएमआर में राज उन्नति की 7वीं बैठक के दौरान शिविरों के समीक्षा करते हुए इनकी डेट बढ़ाने का फैसला लिया। बैठक में सीएम ने 7 विभागों की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की। सीएम ने कहा- विकास परियोजनाओं को टाइमलाइन में पूरा कर जनता को समय पर लाभ पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों को संदेश दिया- वे काम में बहाने नहीं बनाएं और जनता के काम को समय पर पूरा करें। दो अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई मुख्यमंत्री भजनलाल ने बैठक में संपर्क पोर्टल पर दर्ज परिवादों की समीक्षा करते हुए बूंदी जिले में प्रसूति सहायता योजना के तहत लाभार्थी मनीषा मीणा को समय पर लाभ नहीं मिलने पर संयुक्त श्रम आयुक्त दीपक यादव और संकेत मोदी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। परिवादी ने साल 2023 में प्रसूति सहायता योजना के तहत आवेदन किया था, जिसे दस्तावेज अपूर्ण बताते हुए निरस्त कर दिया गया। वहीं प्रतापगढ़ में चुपना के राजीविका के जागृति क्लस्टर संगठन की शिकायत पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से चार्जशीट देने के निर्देश दिए। संगठन ने शिकायत दी थी कि ब्लॉक परियोजना प्रबंधक धर्मेन्द्र पंवार द्वारा उनके क्लस्टर संगठन का खाता बंद कर दिया गया और उनसे कमीशन की मांग की गई। इस संबंध में संगठन ने विभिन्न स्तरों पर परिवाद दर्ज कराया। शिकायत प्रथमदृष्टया सही पाई जाने के बावजूद लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई में देरी पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को चार्जशीट दिए जाने के निर्देश दिए। 15 जुलाई तक 19 हजार से ज्यादा शिविर लगे प्रदेशभर में 12 जून से 15 जुलाई तक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 19 हजार से ज्यादा शिविर आयोजित हो चुके हैं। शहरी सेवा शिविरों में 42 हजार से अधिक पट्टे जारी करने के साथ ही 13 हजार से अधिक नाम हस्तांतरण भी किए गए। वहीं, 1 लाख से अधिक जन्म-मृत्यु और विवाह पंजीकरण, पालनहार योजना में 12 हजार से अधिक सत्यापन, 18 हजार से अधिक पीएम स्वनिधि ऋण आवेदन तथा 41 हजार से अधिक विद्युत कनेक्शन उपलब्ध करवाए गए। इसी प्रकार ग्रामीण सेवा शिविरों में 1 लाख 97 हजार से अधिक नामांतरण, लगभग 48 हजार से अधिक पत्थरगढ़ी/सीमाज्ञान, 27 हजार से अधिक आपसी सहमति से विभाजन तथा 18 हजार से अधिक रास्तों के प्रकरणों का निस्तारण किया गया। साथ ही ग्रामीण सेवा शिविरों में 25 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार, 11 लाख से अधिक की टीबी स्क्रीनिंग तथा साढ़े 4 लाख से अधिक महिलाओं की ओरल, ब्रेस्ट एवं सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग भी की गई।
