सलूंबर जिले के सुथारवाड़ी क्षेत्र की महिलाओं ने अच्छी बारिश, भरपूर फसल और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। महिलाओं ने स्थानीय नदी तट पर पहुंचकर वर्षा के देवता भगवान इंद्र का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं मंगल गीत गाते हुए नदी तट तक पहुंचीं। यहां उन्होंने जल देवता और इंद्र भगवान की विशेष पूजा की। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान प्रकृति संरक्षण और अच्छी वर्षा के महत्व पर भी जोर दिया गया, जो लोक आस्था और ग्रामीण परंपरा का प्रतीक रहा। पूजन के बाद भगवान इंद्र को पारंपरिक गूगरी का भोग लगाया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच गूगरी की प्रसादी वितरित की गई। प्रसाद वितरण के पश्चात महिलाओं ने ढोल की थाप पर पारंपरिक लोकगीतों पर नृत्य किया और इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए भजन-कीर्तन किए। यह आयोजन निर्मला सुथार के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इसमें ममता सुथार, प्रियंका सुथार, सुमित्रा सुथार, रेणुका सुथार, सुगना सुथार, कमला सुथार, जुगनू सुथार, मीनाक्षी सुथार, दीपिका सुथार, मीना सुथार, एकता सुथार, नर्बदा सुथार और रेखा सुथार सहित सुथारवाड़ी की अनेक महिलाओं और बालिकाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। लोक आस्था और सामाजिक एकजुटता का संदेश ग्रामीण अंचल में आयोजित यह पारंपरिक अनुष्ठान प्रकृति और लोक आस्था से जुड़े रीति-रिवाजों को जीवंत बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है। अच्छी बारिश और समृद्ध फसल की कामना के साथ आयोजित इस आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती देने का संदेश दिया।