ग्रामीण इलाकों की पहचान और पारंपरिक देसी थाली का अहम हिस्सा रही काचरी और ग्वार फली की सब्जियां अब लोगों की रसोई से गायब होले लगी है। कभी खेतों में सहजता से उगने वाली और पोषक तत्वों से भरपूर काचरी अब न बाजारों में दिखती है और न ही नई पीढ़ी की थाली में। पहले यह हर घर की पसंदीदा सब्जी थी, मगर अब यह बुजुर्गों की यादों और कुछ घरों तक सीमित रह गई है। काचरी, जिसका वैज्ञानिक नाम माउस मेलन है, प्रोटीन, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर से भरपूर होती है। यह पाचन के लिए लाभकारी और कई बीमारियों से सुरक्षा देने वाली देसी सुपरफूड मानी जाती है। बावजूद इसके, नई पीढ़ी इसका सेवन भूल चुकी है। फास्ट फूड और चाइनीज व्यंजनों की बढ़ती लोकप्रियता ने देसी स्वाद को धीरे-धीरे पीछे धकेल दिया है। पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार जंक फूड खाने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता घटती है, जबकि काचरी जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ प्राकृतिक इम्यूनिटी बढ़ाते हैं।