हाईकोर्ट ने शहरी सेवा शिविर में सरकारी जमीन पर बसी कॉलोनियों और अवैध कब्जों के नियमन पर सोमवार को रोक लगा दी । कोर्ट ने यूडीएच विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और शासन सचिव से पूछा- आपने किस अधिकार से यह गैर कानूनी आदेश जारी किया। एसीएस यूडीएच और सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र पेश करने के लिए भी कहा। यह अंतरिम आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। कोर्ट ने नगरीय विकास और आवासन विभाग (यूडीएच) के 10 जून को जारी सर्कुलर पर रोक लगाई दी। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को नियमित करने के लिए 12 जून से शिविर लगाए जा रहे हैं। ये शिविर 15 जुलाई तक चलेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट पीसी भंडारी और डॉ. टीएन शर्मा ने कोर्ट को बताया- राज्य सरकार भू-माफिया के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन कर रही है। सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि अनधिकृत निर्माणों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी गलत सहानुभूति होगी। नियमन योजनाएं केवल अपवादस्वरूप परिस्थितियों में, विस्तृत सर्वे के बाद, आवासीय मकानों के लिए केवल एक बार के उपाय (वन टाइम मेजर) के रूप में ही लाई जा सकती है। राजस्थान सरकार पहले ही 1 जनवरी 1999 तक के अतिक्रमणों के नियमन की एकमुश्त छूट दे चुकी है। ऐसे में बार-बार नियमन योजनाएं लाना अवैध कब्जाधारियों और भू-माफियाओं को संरक्षण देने जैसा है। कब्जा कर लो, सरकार नियमन कर देगी याचिका में कहा गया कि सरकार के ऐसे कदमों से आम जनता में यह गलत संदेश जाता है कि पहले सरकारी जमीन पर कब्जा कर लो। बाद में सरकार उसे वैध (रेगुलाइज) कर देगी। इस कारण ही आमजन बिना डर के जानबूझकर अतिक्रमण करने को प्रेरित होते हैं। इससे शहरों का नियोजित विकास बाधित होता है। प्रशासनिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। अवैध कब्जों को नियमित करने से कानून का पालन करने वाले ईमानदार नागरिकों के हितों की अनदेखी होती है। …………… जयपुर में जमीन और मकान खरीदना होगा महंगा:5 से 49% तक डीएलसी रेट बढ़ाने की तैयारी, 4 महीने में दूसरी बार हुई बढ़ोतरी जयपुर में जमीन और मकान खरीदना अब महंगा होगा। सरकार ने डीएलसी दरों में जुलाई महीने से ही 5 से लेकर 49 फीसदी तक बढ़ोतरी को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। (पूरी खबर पढ़ें)
