टोंक में भद्रकाली मंदिर के पीठाधीश्वर पर आरएसी कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में डमी अभ्यर्थी बैठाकर नौकरी हासिल करने का आरोप लगा है। 15 साल बाद मिली शिकायत पर एसओजी ने एफआईआर दर्ज करवाई है। आरोपी श्रीराम मीणा टोंक के निवाई तहसील के कांटोली गांव का रहने वाला है। भर्ती में चयन के बाद भी उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ था। बाद में हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें जॉइनिंग मिली थी। पिछले करीब एक साल से आरोपी कॉन्स्टेबल बिना अनुमति ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहा है। पुलिस भर्ती से जुड़े मूल दस्तावेज मंगवाकर उनका सत्यापन करेगी। साथ ही आरोपी से पूछताछ कर उसके वर्तमान हस्ताक्षरों का भर्ती के समय के हस्ताक्षरों से मिलान भी कराया जाएगा। पहले पढ़ें… आरोपी बाबा ने क्या कहा? आरोपों पर बाबा ने कहा- मैं वर्ष 2006 से मंदिर में साधना कर रहा हूं, जबकि नौकरी बाद में लगी थी। पहले भी आरोप लगाए गए थे कि मैं अनपढ़ हूं और फर्जी तरीके से नौकरी हासिल की है। उस समय जांच के बाद ही मुझे जॉइनिंग मिली थी। लोगों ने मंदिर भी नहीं बनने दिया और जमीन पर कब्जा करने के आरोप भी लगाए थे, लेकिन जांच में सभी आरोप गलत पाए गए। अब एसओजी की जांच में भी सच्चाई सामने आ जाएगी। इस मामले में मैं मानहानि का दावा भी करूंगा। अब पढ़िए … सिलसिलेवार पूरा मामला एसपी रोशन मीणा ने बताया- मामला टोंक में 9वीं आरएसी बटालियन में तैनात कॉन्स्टेबल श्रीराम मीणा से जुड़ा है। एसओजी को शिकायत मिली थी, जिसमें 15 साल पहले भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने का आरोप लगाया गया था। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद एसओजी ने आरएसी बटालियन कमांडेंट को मामला दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके बाद कमांडेंट राजेश चौधरी ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दी, जिस पर एफआईआर दर्ज की गई। 2011 की परीक्षा में डमी बैठाकर नौकरी पाने का आरोप कोतवाली थानाधिकारी भंवरलाल (बीएल) वैष्णव ने बताया – एसओजी परिवाद संख्या-3499 की प्रारंभिक जांच के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए गए। आरोप है कि 23 जनवरी 2011 को आरएसी कॉन्स्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा के दौरान टैगोर बाल निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थित परीक्षा केंद्र पर श्रीराम मीणा ने खुद परीक्षा देने के बजाय डमी अभ्यर्थी को बैठाया। चयन होने के बाद उसने 2 जुलाई 2011 को बटालियन मुख्यालय टोंक में दस्तावेज जमा किए और बाद में 18 जुलाई 2014 को हाईकोर्ट के आदेश के बाद कॉन्स्टेबल के रूप में नियुक्ति मिली। तब से वह वेतन और अन्य भत्तों का लाभ लेता रहा। अब दस्तावेज और हस्ताक्षरों का होगा मिलान थानाधिकारी वैष्णव ने बताया – जांच के तहत आरएसी मुख्यालय जयपुर से भर्ती से जुड़े मूल दस्तावेज मंगवाए जाएंगे। उनके सत्यापन के बाद आरोपी को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। उसके वर्तमान हस्ताक्षरों का भर्ती के समय किए गए हस्ताक्षरों से मिलान भी कराया जाएगा। पुलिस भर्ती रिकॉर्ड, परीक्षा दस्तावेज और विभागीय अभिलेखों की भी जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित था या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह भी सक्रिय था। 2024 से ड्यूटी से गैरहाजिर, गांव में पीठाधीश्वर के रूप में पहचान थानाधिकारी ने बताया कि श्रीराम मीणा 18 जुलाई 2014 से आरएसी में कॉन्स्टेबल के पद पर कार्यरत था, लेकिन 14 सितंबर 2024 से बिना अनुमति लगातार ड्यूटी से गैरहाजिर है। उसके खिलाफ 16 सीसीए के तहत विभागीय कार्रवाई भी चल रही है। पुलिस के अनुसार आरोपी की तलाश जारी है। दूसरी ओर श्रीराम मीणा पिछले दो-तीन वर्षों से कांटोली गांव स्थित प्राचीन मां भद्रकाली मंदिर का पीठाधीश्वर भी है। वह नशामुक्ति और कथित घर वापसी अभियानों को लेकर भी चर्चा में रहा है।
