बेटे-बहू और पोते-पोती की मौत के बाद 65 साल की सीता देवी अंदर से टूट चुकीं हैं। कहती हैं- बेटे ने दोबारा आने कहा था, अगर मालूम होता कि उसकी लाश आएगी तो उसे कभी नहीं जाने देती। बेबसी का आलम ये है कि उनके 70 साल के लकवाग्रस्त पति को भी वही संभालती हैं। वहीं मानसिक रूप से बीमार सबसे छोटे बेटे की सेवा भी 65 साल की मां ही कर रही है। उन्हें खाना खिलाना और नहलाना। अब घर में 4 मौतों के बाद सुध बुध खो बैठी हैं। दरअसल, 30 जून को सीता देवी के बेटे गेनाराम (35) उसकी पत्नी पुष्पा (32), बेटी खुशबू (13) और बेटे किशन (10) का शव फलौदी जिले के फतेहगढ़ में मिला था। गेनाराम फंदे पर लटका था और तीनों खाट पर पड़े थे। पुलिस ने आशंका जताई कि पत्नी और दोनों बच्चों की हत्या कर गेनाराम फंदे पर झूल गया। अब पढ़िए 65 साल की मां की बेबसी की कहानी… कहा था- बहू को यही छोड़ दे मैं सेवा कर लूंगी सीतादेवी बतातीं हैं- सोमवार 29 जून की दोपहर करीब 1 बजे बेटा गेनाराम अपनी पत्नी पुष्पा को लेकर बीठू आया था। बोला- पुष्पा की तबीयत कुछ ठीक नहीं है। कुलदेवी के दर्शन करवाने लाया हूं। इसके बाद दोनों मंदिर गए दर्शन के लिए चले गए। नारियल चढ़ाकर वापस आए। कुछ देर रुका और बोला- अब गांव जा रहा हूं फिर आ जाऊंगा। इस पर मैंने कहा- पुष्प को तो यही रहने दे, कुछ दिन मैं इसकी सेवा कर लूंगी। डॉक्टर को दिखा आउंगी। उसे लगता था पत्नी पर कोई साया है इसके बाद बेटे ने कहा- माता जी के दर्शन को फिर आऊंगा तब इसे गांव छोड़ जाऊंगा। मां ने दावा किया कि उसे लगता था कि उसकी पत्नी पर भूत-प्रेत का साया है। इससे उसकी तबीयत खराब हो रही है। इतना कहते ही बुजुर्ग सीता देवी के आंसू छलक गए। कुछ देर रूकने के बाद बोली कि सोचा नहीं था कि सुबह बेटे-बहू और पोता-पोतियों की मौत की खबर मिलेगी। पता होता तो हरगिज भी उन्हें वापस गांव नहीं जाने देती। बहन ने कहा था- बच्चे अकेले हैं, जाना पड़ेगा बीठू गांव में ही रहने वाले गेनाराम की पत्नी पुष्पा के ममेरे भाई कानाराम ने बताया- सोमवार शाम करीब 5 बजे जीजा और बहन पुष्पा मेरी शॉप पर आए थे। नारियल लेकर गए और मंदिर में कुलदेवी को चढ़ाया। उन्हें देख कर ऐसा नहीं लगा कि कल सुबह उनकी मौत की खबर मिलेगी। मैंने बहन को पूछा कि रात रूकोगे क्या लेकिन बहन बोली कि बच्चे घर पर अकेले हैं। इसलिए रात नहीं रह सकती और फिर चली गई। भाई ने देखा था भाई, भाभी और बच्चों के शव गेनाराम का छोटा भाई शिवाराम भी गेनाराम के पड़ोस के खेत में ही किसानी का काम करता था। सोमवार सुबह 5 बजे गेनाराम फसल सिंचाई के लिए फव्वारा शुरू कर देता था। लेकिन उस सुबह 7 बजे तक भी फव्वारा शुरू नहीं हुआ तो वह खेत पर गया। जहां देखा कि उसकी भाभी, भतीजा और भतीजी का शव पलंग पर पड़े थे और भाई गेनाराम फंदे पर झूल रहा था। यह देख उसके होश उड़ गए और तुरंत आस-पास के लोगों को बुलाया और पुलिस को कॉल किया। बुजुर्ग कन्धों पर पति-बेटे की सेवा गेनाराम के पिता जोधाराम पिछले कई सालों से लकवाग्रस्त है। हार्ट के भी मरीज हैं। उन्हें खाना खिलाने से लेकर नहलाने का काम सीतादेवी करती हैं। साथ ही छोटा बेटा राजू जन्म से ही मानसिक रूप से दिव्यांग हैं। उसकी सेवा भी सीतादेवी के बूढे कंधों पर है। मृतक गेनाराम का ससुराल भी बीठू गांव में ही है। मृतक चार भाई और तीन बहनें है। दो भाई चेनाराम और सीयाराम फतेहगढ़ क्षेत्र में ही कृषि कुएं पर खेती बाड़ी का काम करते हैं। घटना से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… पति-पत्नी और बेटा-बेटी का एक चिता पर अंतिम संस्कार:बिलख पड़े लकवाग्रस्त पिता, मां बोलीं-बुढ़ापे में बेटे-पोतों की लाश देखनी पड़ रही पत्नी, बेटे-बेटी की हत्या कर किसान ने सुसाइड किया:महिला पर बताया था भूत-प्रेत का साया; फर्श पर पड़े मिले शव पत्नी और 2-बच्चों की हत्या कर पति ने किया सुसाइड:गेनाराम पति-बच्चों के साथ कल आया था बीठू, मंदिर दर्शन कर शाम को वापस गया, सुबह मिली चारों की बॉडी
