पूर्व CM अशोक गहलोत ने कहा- मुख्यमंत्री समूहों में कलेक्टर और एसपी को बुलाकर भाजपा को निकाय और पंचायत चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंप रहे हैं। मैं यह आरोप पुख्ता फीडबैक और पूरी जिम्मेदारी के साथ लगा रहा हूं। जयपुर स्थित अपने निवास पर रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में गहलोत ने यह बात कही। पूर्व सीएम ने कहा- भाजपा सरकार निकाय और पंचायत चुनाव में संभावित हार से घबराई हुई है। इसी वजह से प्रशासनिक अधिकारियों पर भाजपा के पक्ष में काम करने का दबाव बनाया जा रहा है। गहलोत ने कहा- राज्य सरकार की निकाय और पंचायत चुनाव कराने की मंशा ही नहीं थी। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकार को चुनाव कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। निष्पक्ष भूमिका निभाए प्रशासन अशोक गहलोत ने कहा- अब चुनाव पास आते ही सरकार प्रशासनिक मशीनरी को अपने पक्ष में इस्तेमाल करने का प्रयास कर रही है। पूर्व सीएम ने कहा-चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होने चाहिए और प्रशासन को निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए। भाजपा सरकार में मंत्री को ही धरने पर बैठना पड़ा गहलोत ने कहा- प्रदेश में हालात इतने खराब हो गए हैं कि भाजपा सरकार के मंत्री को ही कलेक्टर और कमिश्नर के खिलाफ करीब 6 घंटे तक धरने पर बैठना पड़ रहा है। सरकार के अपने मंत्री अगर अधिकारियों के खिलाफ धरना देने को मजबूर हैं तो इससे शासन व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। लोहावट ब्लाइंड मर्डर पर सरकार से मांगा जवाब पूर्व मुख्यमंत्री ने जोधपुर के लोहावट में हुए ब्लाइंड मर्डर मामले को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा- घटना को 16 दिन बीत जाने के बावजूद आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। वहीं प्रशासन की ओर से पांच दिन में आरोपियों को पकड़ने का लिखित आश्वासन दिया गया था। गहलोत ने कहा- पुलिस को सुराग मिलने के बावजूद राजनीतिक दबाव के कारण मामले का खुलासा नहीं किया जा रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री और डीजीपी से पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। वंदे मातरम पर भाजपा-RSS को बोलने का नैतिक अधिकार नहीं पूर्व सीएम ने कहा- आजादी की लड़ाई में RSS और भाजपा का कोई योगदान नहीं था। इसलिए उन्हें वंदे मातरम के मुद्दे पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। भूख हड़ताल कर रहे आंदोलनकारियों से बोले- भूखे मत रहो गहलोत ने प्रदेश में अलग-अलग मांगों को लेकर भूख हड़ताल कर रहे युवाओं और लोगों से अपील की कि वे अपनी सेहत खराब न करें। उन्होंने कहा- मौजूदा सरकार आंदोलनकारियों की मांगों और उनकी सेहत की कोई परवाह नहीं कर रही है। ऐसे में आंदोलनकारी भूख हड़ताल के बजाय धरना और अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा- लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह आंदोलनकारियों से संवाद करे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले। कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार को घेरा गहलोत ने कहा- लगातार आपराधिक घटनाओं के कारण आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर कहा- पिछली सरकार की योजनाओं को कमजोर करने से गरीब और जरूरतमंद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गहलोत ने कहा- मौजूदा सरकार को कानून-व्यवस्था और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील होकर काम करना चाहिए।