शिरोमणि अकाली दल की पांच सदस्यीय समिति गुरुवार को जगराओं पहुंची, जहां समिति के सदस्यों ने गुरुद्वारा गोपालसर साहिब गगड़ा और गुरुद्वारा नानकसर कलेरां में माथा टेका। इस दौरान उन्होंने संत-महापुरुषों से मुलाकात कर विभिन्न पंथक मुद्दों पर चर्चा की तथा श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी आदेशों को लेकर विचार-विमर्श किया। समिति में अकाली दल के सरपरस्त बलविंदर सिंह भूंदड़, पूर्व मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा, पूर्व कैबिनेट मंत्री महेशइंदर सिंह ग्रेवाल, राष्ट्रीय एससी विंग के प्रधान गुलजार सिंह रणीके और एसजीपीसी सदस्य अमरजीत सिंह चावला शामिल थे। समिति ने नानकसर साहिब में बाबा घाला सिंह, बाबा गुरजीत सिंह और बाबा गुरचरण सिंह से मुलाकात की। वहीं गुरुद्वारा गोपालसर साहिब गगड़ा में बाबा अमरजीत सिंह, बाबा सरबजीत सिंह डांगो, बाबा कुलवंत सिंह मेहितियाणा, बाबा लखबीर सिंह, बाबा जसनप्रीत सिंह ढोलण, बाबा सरबजीत सिंह भरोवाल और अन्य संत-महापुरुषों से भी चर्चा की गई। समिति सदस्यों बोले- श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश प्रत्येक सिख के लिए सर्वोपरि बैठक के दौरान समिति सदस्यों ने कहा कि गुरु साहिबानों की बेअदबी से जुड़े मामलों में श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश प्रत्येक सिख के लिए सर्वोपरि हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने संगत से भी इन आदेशों का पालन करने की अपील की। समिति के अनुसार, उपस्थित संगत और जत्थेदारों ने भी श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा बनाए रखने का भरोसा दिया। मीडिया से बातचीत में बलविंदर सिंह भूंदड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पर अपने बयानों को लेकर सवाल उठाए और कहा कि संबंधित मामले में विभिन्न समय पर अलग-अलग दावे किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अकाली दल की समिति पूरे पंजाब में संत-महापुरुषों से मुलाकात कर पंथक एकता का संदेश दे रही है। इस दौरान डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा तख्त श्री हजूर साहिब के प्रबंधन संबंधी कानून में प्रस्तावित बदलावों का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर एसजीपीसी और अन्य सिख संस्थाएं पहले भी अपना विरोध दर्ज करा चुकी हैं। कार्यक्रम के अंत में संत-महापुरुषों ने समिति के सदस्यों को सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर अकाली दल के कई पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में संगत भी मौजूद रही।