ग्रीन वॉरियर के नाम से पहचाने जाने वाले पाली के बीसलपुर निवासी कानाराम मेवाड़ा (35) से सीएम भजनलाल शर्मा ने सुमेरपुर में आयोजित सेवा शिविर के दौरान मुलाकात की। कानाराम प्लास्टिक के कचरे को री-साइकिल कर टेबल-कुर्सी बनाते हैं। कानाराम डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वालों से प्लास्टिक लेते हैं। साथ ही स्कूल में जाकर बच्चों को प्लास्टिक की बोतल के बदले में टॉफी देकर प्लास्टिक इकट्ठा करते हैं। इस प्लास्टिक को री-साइकिल कर कानाराम टेबल-कुर्सी बनाते हैं। इसके बाद भामाशाहों के जरिए उन्हें पार्क, स्टेशन, बस स्टैंड, स्कूल और मंदिर जैसी जगहों पर लगवाते हैं। शनिवार को सीएम भजनलाल शर्मा पाली जिले के सुमेरपुर में आयोजित शहरी सेवा शिविर में हिस्सा लेने पहुंचे। इस दौरान सीएम, कानाराम की टेबल-कुर्सी की स्टॉल पर पहुंचे। सीएम भजनलाल ने नवाचार की सराहना की शिविर में बाली विधायक पुष्पेंद्र सिंह राणावत ने सीएम को कानाराम के अभियान की जानकारी दी। इस पर सीएम भजनलाल शर्मा ने कानाराम से प्लास्टिक इकट्ठा करने के साथ बनाने के पूरे प्रोसेस के बारे में जाना। साथ ही सीएम ने कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के साथ कुर्सी पर बैठकर उसे चेक किया। इसके बाद सीएम ने उनके काम की तारीफ की। साथ ही उन्हें आश्वासन दिया कि भविष्य में योजनाओं के जरिए उन्हें मदद की जाएगी। इसके बाद शिविर में प्रभारी मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी कानाराम की स्टॉल को देखा और उनके नवाचार के बारे में जाना। सैलानी की बात मन को चुभी, कचरा मुक्त बनाने का लिया संकल्प कानाराम ने बताया- पाली के बीसलपुर गांव में मेरी छोटी सी चाय की दुकान है। पूरे गांव करीब 400 मकान है। जवाई बांध क्षेत्र टूरिस्ट एरिया है। ऐसे में उस चाय की दुकान से ही उसकी रोजी रोटी चलती थी। साल 2022 में लॉकडाउन के बाद एक बार गांव की नाली प्लास्टिक थैलियों से जाम होने की वजह से गंदा पानी सड़क पर फैल गया। ऐसे में सैलानियों ने अपनी नाक बंद कर ली। साथ ही, अंग्रेजी में कहा कि ‘यहां कितनी गंदगी है।’ सैलानी की बाद कानाराम के मन में चुभ गई। सोचा कि गंदगी से गांव की बदनामी हुई है। कुछ ऐसा किया जाए जिससे गांव में आने वाले मेहमान गांव की तारीफ करें। सामाजिक संगठनों ने की मदद कानाराम ने बताया- पॉलीथिन को लेकर मुंबई में सामाजिक संस्था चलाने वाले बिसलपुर निवासी दिलीप कुमार जैन से मुलाकात हुई। दिलीप ने बताया कि प्लास्टिक जमीन को बंजर बनाता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए गांव को प्लास्टिक मुक्त करना होगा। इसके बाद जवाई क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों को जागरुक कर उनसे प्लास्टिक की थैली और बोतल को इकट्ठा करना शुरू किया। वहीं प्लास्टिक के बदले दुकान से शक्कर देना और चाय पिलाना शुरु किया। ऐसे में कोई अच्छी आय नहीं थी। इस पर डीजेईडी फाउंडेशन के संस्थापक दिलीप जैन और नमोकार फाउंडेशन के संस्थापक अशोक मेहता ने पूरा सहयोग किया। दो साल तक प्लास्टिक इकठ्ठी की, 2024 में खरीदी मशीन कानाराम ने बताया- 2022 से लेकर 2024 तक प्लास्टिक का वेस्ट एकत्रित किया। इसके साथ ही ऑनलाइन रिसर्च करता रहा कि इसे कैसे अच्छी तरह री-साइकिल किया जाएगा। इस दौरान नोएडा में मिलने वाली एक 10 लाख रुपए की मशीन के बारे में पता चला। इसके बाद सामाजिक संस्थाओं की मदद से नोएड़ा से छोटी मशीन खरीदी और टेबल-कुर्सी बनाना शुरू किया। साथ ही सामाजिक संस्था और भामाशाहों की मदद से उन्हें लगवाना शुरू किया। कानाराम ने बताया- मशीन छोटी थी और दो साल में इकट्ठा किया गया वेस्ट ज्यादा था। ऐसे में बड़ी मशीन की जरूरत महसूस होने लगी। ऐसे में सीएसआर फंड की मदद से 25 लाख रुपए में 2026 में बड़ी मशीन खरीदने के बाद निर्माण तेजी आई। इस तरह वेस्ट होता है री-साइकिल 5 साल में 10 टन वेस्ट इकट्ठा किया कानाराम पिछले 5 साल में 10 टन वेस्ट इकट्ठा कर चुके हैं। इसे लेकर उन्होंने बाली क्षेत्र गांवों में अभियान चलाया। जहां स्कूली बच्चे प्लास्टिक की बोतल और पॉलिथीन लेकर आ रहे हैं। इसके बदले उन्हें पेन, पेंसिल और टॉपी दी जा देते हैं। अभियान को बड़ा बनाने का उद्देश्य कानाराम ने बताया कि हमारा उद्देश्य है कि इस अभियान को बड़े स्तर पर चलाया जाए। जिससे क्षेत्र में कचरे की समस्या समाप्त होने के साथ रोजगार भी बढ़ सके। … यह खबर भी पढ़ें CM बोले-बैलों से खेती करने पर 30 हजार अनुदान:किसान हारी जंग लड़ता है, हमारी सरकार कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है दिल्ली में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (GRAM) 2026 रोड शो में मुख्यमंत्री ने कहा- बैलों से खेती करने वाले किसानों को 30 हजार रुपए का अनुदान दिया जा रहा है, जिससे कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल सके और छोटी जोत वाले किसान ठीक प्रकार से पैदावार कर सकें। (पढ़ें पूरी खबर)