पूर्णिमा ग्रुप की ओर से शुक्रवार को कैंपस में तीन दिवसीय हॉस्टल फेस्ट की शुरुआत पर सूफी महोत्सव ‘बिस्मिल की महफिल’ का आयोजन किया गया। शुरुआत में स्टेंडअप कॉमेडियन प्रवीण कुमार (पी के मस्त) ने अपने जोक्स से स्टूडेंट्स का मनोरंजन किया। इसमें भारत के लोकप्रिय सूफी कलाकार बिस्मिल ने कई भावपूर्ण समकालीन प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रोताओं का दिल जीत लिया और श्रोताओं पर सूफी संगीत का जादू सर चढ़कर बोला। उल्लेखनीय है कि बिस्मिल सूफी महोत्सव ‘बिस्मिल की महफिल’ के जरिए देशव्यापी टूर पर हैं। अपनी आत्मीय गायकी और दिलों को जोड़ने की अद्वितीय क्षमता के लिए मशहूर बिस्मिल ने इस जादुई महफिल के जरिए कविता, जुनून और भक्ति से भरे एक अविस्मरणीय संगीतमय सफर का करीब से अनुभव कराया। आर्टिस्ट ने ‘सोचता हूं कि वो कितने मासूम थे, क्यो से क्या हो गए देखते-देखते’ के साथ प्रस्तुति की शुरुआत की। इसके बाद शेरो-शायरी के साथ-साथ, ‘कम से कम इतना कहना हमारा करो’, ‘ये तूने क्या किया’, ‘तोसे नैना जबसे मिले’ सहित कई सुमधुर रचनाएं प्रस्तुत की। बिस्मिल ने नुसरत फतेह अली की रचनाओं को अपने विशिष्ट अंदाज में पेश कर खूब वाहवाही लूटी। यह महफिल सिर्फ संगीत का आयोजन ही नहीं थी, बल्कि, रूह व भक्ति का संगम और सूफी संगीत की असली आत्मा का उत्सव बनी। बिस्मिल ने अपनी विशेष प्रस्तुतियों के जरिए यह संदेश दिया कि सूफी संगीत केवल सुरों का मेल नहीं है, बल्कि दिलों व आत्मा को जोड़ने का जरिया है। इस देशव्यापी महफिल को हर शहर में अलग रंग और संस्कृति के साथ जोड़ा जा रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत में पूर्णिमा ग्रुप के स्टूडेंट वेलफेयर डायरेक्टर अश्विनी लाटा और पूर्णिमा ग्रुप के डायरेक्टर राहुल सिंघी ने हॉस्टलर्स को मोटिवेट किया और अपने दौर की हॉस्टल लाइफ के मजेदार किस्से बनाए।
