भरतपुर के RBM अस्पताल में डॉक्टर सोनोग्राफी सेंटर के बाहर धरने पर बैठ गया। डॉक्टर ने आरोप लगाते हुए कहा- सरकारी अस्पताल में चाइना की मशीनों से सोनोग्राफी हो रही है। मशीनों ने कुछ दिखाई नहीं देता, मरीजों की रिपोर्ट गलत आने से चांस बढ़ गए हैं। इसी को लेकर मैं मरीजों के पास जाकर धरने पर बैठ गया, मैं भी तो जनता ही हूं। मामले को लेकर PMO नगेंद्र भदौरिया ने कहा- जांच के बाद ही कुछ कहना ठीक होगा। फिलहाल हम मामले की जांच करवा रहे हैं। इसके लिए 5 डॉक्टरों की कमेटी बना दी गई है। अब समझिए क्यों धरने पर बैठे डॉक्टर रिपोर्ट गलत आने का खतरा रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर हरिचरण ने बताया- 21 मई को दोनों मशीनों को लेकर अधिकारियों से शिकायत की गई थी कि 15 से 20 दिन के अंदर इन मशीनों को ठीक करवाया जाए नहीं तो, हम इन मशीनों पर हम काम करना बंद कर देंगे। उसके बाद भी अधिकारियों ने हमारी शिकायत नहीं सुनी। इसलिए आज धरने पर बैठना पड़ा। हरिचरण ने बताया- RBM अस्पताल सोनोग्राफी की जो मशीनें लगाई गई हैं, वो मशीनें खराब हैं। मशीनों में कुछ दिखाई नहीं देता। मरीजों की रिपोर्ट गलत आने का खतरा रहता है। इसी को लेकर मैं मरीजों के पास जाकर धरने पर बैठ गया। प्रशासन से मेरी गुजारिश है कि सोनोग्राफी की मशीनों को जल्द से जल्द ठीक किया जाए। ठीक नहीं हुई तो फिर धरने पर बैठ जाऊंगा फिलहाल के लिए 2 मशीनों को बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने इन मशीनों को ठीक करने या नई मशीनों को लगाने का आश्वासन दिया है। अगर 2 दिन के अंदर मशीनें ठीक नहीं होती तो, मैं वापस धरने पर बैठ जाऊंगा। इन मशीनों को 6 महीने पहले ही लगाया गया था। दोनों मशीनें चाइना क्वालिटी की मशीन हैं। मशीनों के अंदर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर ठीक नहीं है। सरकार ने 30 लाख में खरीदी हैं मशीनें डॉ. हरिचरण ने आरोप लगाया कि बड़ी कंपनियों की मशीनें हैं उनकी क्वालिटी पर सवाल नहीं उठा सकता। सरकार ने प्रति मशीन 30 लाख रुपए तक खर्च किए हैं। अस्पताल प्रशासन ने अच्छी क्वालिटी की मशीनें क्यों नहीं खरीदी। अच्छी क्वालिटी की मशीनों से इलाज में भी आसानी रहती है। इन मशीनों से सोनोग्राफी नहीं हो रही। यह मशीन जांच भी सही नहीं बताती। दावा: डॉक्टर भी इन जांचों से संतुष्ट नहीं इन मशीनों से जांच करने के बाद डॉक्टर भी संतुष्ट नहीं होते। डॉक्टर भी ऐसा लगता है जांच कर दी है लेकिन, संशय लगा रहता है कि मरीज के कोई और दिक्कत तो नहीं है। इसके साथ ही इन मशीनों से काम करने में डॉक्टरों को काफी परेशानी होती है। जैसे हाथों में दर्द होता है। इन मशीनों की डिजाइन भी ठीक नहीं है।
