झुंझुनूं में गांव का नाम बदलने के विरोध में पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ग्रामीणों के साथ 22 किलोमीटर पैदल रैली में चले। कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन करते समय गर्मी में पूर्व मंत्री तबीयत बिगड़ गई। अचानक बेहोश होकर सड़क पर ही गिर पड़े। पसीने से तरबतर पूर्व मंत्री ने हॉस्पिटल जाने से मना कर दिया। इस दौरान लोगों तौलिये हवा डाली और पानी छिड़का। गुढ़ा बोले- प्रशासन ने हमें टेंट नहीं लगाने दिया। हमारे पास छाया भी नहीं है। मैं ऐसा नहीं कर सकता कि मेरे सारे भाई 45 डिग्री तापमान में धूप में बैठे रहें और मैं छांव में जाकर बैठ जाऊं। गुढ़ा बोले- नाम बदला तो हम उनका नाम बदल देंगे पैदल मार्च के दौरान राजेंद्र गुढ़ा ने एक युवक का पकड़कर कहा- ये कर्मा भाई हैं। ये मुसलमान राजपूत हैं और मैं हिंदू राजपूत हूं। हम दोनों पीढ़ियों से यहीं रह रहे भाई हैं। शेखावाटी के इतिहास में राव शेखा के हर युद्ध में मुसलमान उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े थे और सूफी संत शेख बुरहान उनके आराध्य हैं। आज ये गांव का नाम बदल रहे हैं, कल शेखावाटी का नाम भी बदलेंगे। अगर नाम बदला गया तो हम उनका नाम बदल देंगे। देखें… प्रदर्शन की तस्वीरें अब पढ़िए … सिलसिलेवार घटनाक्रम … विधायक की सिफारिश के बाद शुरू हुआ विवाद विधायक राजेंद्र भांबू ने इस्लामपुर गांव का नाम बदलकर ‘श्रीरामपुर’ करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी और मुख्यमंत्री को एक सिफारिशी पत्र भेजा था। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस पर संज्ञान लेते हुए झुंझुनूं कलेक्टर को पूरे मामले की रिपोर्ट और फीडबैक भेजने के निर्देश दिए। जैसे ही जिला प्रशासन स्तर पर इस फाइल की कागजी कार्रवाई शुरू हुई, गांव के लोगों को इसकी जानकारी लग गई और इसके विरोध में आंदोलन शुरू हो गया। पैदल मार्च निकाला, कलेक्ट्रेट के पास बिगड़ी तबीयत इस्लामपुर के अंबेडकर चौक से शुरू हुआ यह पैदल मार्च जब झुंझुनूं कलेक्ट्रेट पहुंचा तो तेज धूप और उमस के कारण प्रदर्शनकारियों का बुरा हाल हो चुका था। लंबी दूरी तय करने के बाद पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा की तबीयत बिगड़ गई। कलेक्ट्रेट के बाहर ही सड़क पर गिर गए। पसीने से तरबतर और सड़क पर लेटा देख समर्थकों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों और समर्थकों ने तुरंत मोर्चा संभाला। कोई हाथ के पंखे और लिफाफों से हवा करने लगा तो किसी ने उनके सिर के नीचे साफी बिछा दी। समर्थकों ने उन्हें पानी पिलाया और चेहरे पर पानी छिड़कने लगे। एम्बुलेंस में बैठने से किया इनकार मौके पर पहुंची एम्बुलेंस में बैठने से इनकार करते हुए राजेंद्र गुढ़ा ने कहा- मुस्लिम कोई बाहरी नहीं हैं, वे हमारे भाई हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि गांव के सांप्रदायिक सौहार्द और ऐतिहासिक पहचान को किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने दिया जाएगा। इस पैदल मार्च का नेतृत्व पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के साथ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के नेता राजेंद्र फौजी, अंजुमन-ए-पठान संस्था के सचिव इब्राहिम खान और आमिन मणीयार ने किया। ग्रामीण ‘गांव की पहचान नहीं बदलने देंगे’ के नारे लगाते हुए समसपुर मार्ग से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। 200 साल पुराने रिकॉर्ड और 1897 के दस्तावेज सौंपे कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शनन के दौरान ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर अरुण गर्ग को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने अपनी ऐतिहासिक पहचान साबित करने के लिए प्रशासन के सामने कई अहम डॉक्यूमेंट दिए। प्रदर्शनकारियों ने करीब 200 साल पुराने रिकॉर्ड और वर्ष 1897 के दस्तावेज भी प्रशासन को सौंपे और गांव के नाम में बदलाव का विरोध दर्ज कराया। कलेक्टर बोले- दबाव में नहीं, तथ्यों के आधार पर होगा फैसला कलेक्टर अरुण गर्ग ने कहा – ग्राम इस्लामपुर का नाम बदलने के लिए एक आवेदन मिला है, जिसकी जांच प्रक्रिया अभी चल रही है। प्रदर्शनकारियों ने हमारे सामने करीब 200 साल पुराने रिकॉर्ड और 1897 के दस्तावेज पेश किए हैं। अब इस मामले में दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी। कलेक्टर ने साफ किया कि प्रशासन का काम जल्दबाजी में कोई आश्वासन देना नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर काम करना है। अभी जनगणना का कार्य चल रहा है और नाम बदलने की प्रक्रिया काफी लंबी होती है। जिला प्रशासन केवल पहला स्तर है। इसके बाद फाइल राज्य सरकार और फिर केंद्र सरकार के पास जाती है। इसलिए जो भी फैसला होगा, वह पूरी तरह दस्तावेजों और मेरिट के आधार पर ही लिया जाएगा।