कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने गुरुवार को कानोता में जयपुर बायो फर्टिलाइजर फैक्ट्री पर छापा मारा। किरोड़ी लाल मीणा ने कहा- निरीक्षण के दौरान उर्वरक निर्माण प्रक्रिया, पैकेजिंग, लेबलिंग और भंडारण व्यवस्था में नियमों की अनदेखी सामने आई है। विभागीय अधिकारियों ने नमूने लेकर परीक्षण के लिए भेज दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हीराबाला इंडस्ट्रियल एरिया में कार्रवाई के दौरान मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मीडिया से बातचीत की। मंत्री ने कहा- किसानों के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने खुद पर लगे भ्रष्टाचार और वसूली के आरोपों पर कहा कि ये बेबुनियाद आरोप है। कहते हैं न कि हाथी के पीछे….। बता दें कि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा लगातार प्रदेशभर में खाद-बीज की फैक्ट्रियों पर छापा मार रहे हैं। इससे पहले सीकर में रीको एरिया स्थित श्री बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज और जोधपुर में तीन अलग-अलग फैक्ट्रियों समेत जोधपुर के बोरानाडा में बालाजी मूंगफली फैक्ट्री का भी निरीक्षण किया था। फैक्ट्री के बाहर ताला लगा था, अंदर काम चल रहा था डॉ. किरोड़ी लाल मीणा गुरुवार कानोता स्थित हीराबाला इंडस्ट्रियल एरिया में जयपुर बायो फर्टिलाइजर फैक्ट्री पर पहुंचे। फैक्ट्री के दोनों गेट पर ताला लगा था। मंत्री फैक्ट्री के अंदर पहुंचे तो मजदूर अंदर एक लास्ट कोने के कमरों में भरी गर्मी में काम कर रहे थे। आलम ये था कि सभी लोग पसीना-पसीना हो गए थे। मंत्री ने सीलपैक कट्‌टों को खुलवाकर सैंपल लिया। उन्होंने खाद और बीज के नमूनों का परीक्षण करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मंत्री ने दावा किया कि जैविक उर्वरक निर्माण और भंडारण में कई अनियमितता मिली हैं। जांच में पाया गया कि जैविक उर्वरक का निर्माण निर्धारित मानकों के विपरीत किया जा रहा था। जहां जैविक उर्वरक निर्माण के लिए लगभग 20 डिग्री सेल्सियस तापमान आवश्यक माना जाता है, वहीं इकाई में इसे 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में तैयार किया जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार- अत्यधिक तापमान के कारण उर्वरक में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो सकते हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता प्रभावित होती है। विभागीय अधिकारियों ने नमूने लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पैकेजिंग और लेबलिंग में मिली भ्रामक जानकारी निरीक्षण के दौरान विभिन्न जैविक उर्वरकों के पैकेजों पर भ्रामक और नियमों के विपरीत जानकारियां अंकित मिली। यह उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 की धारा-19 का उल्लंघन माना गया है। अधिकारियों ने इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज और नमूने जब्त किए हैं। रॉ मैटेरियल के रख-रखाव में भी लापरवाही फैक्ट्री में कच्चे माल का रख-रखाव अव्यवस्थित पाया गया। कई जगहों पर आवश्यक पहचान संबंधी लेबल नहीं लगे थे, जिससे सामग्री की पहचान और गुणवत्ता नियंत्रण संबंधी प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच में सामने आया कि दानेदार जैविक उर्वरक की सामान्य वैधता अवधि 6 महीने होती है, जबकि उत्पाद के कंटेनरों पर इसे 24 महीने तक उपयोग योग्य बताया गया था। अधिकारियों के अनुसार यह जानकारी उपभोक्ताओं और किसानों को भ्रमित करने वाली है। निरीक्षण में उर्वरकों का भंडारण भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। इससे अवैध एवं अनियमित भंडारण की स्थिति उजागर हुई, जो गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। किसानों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: कृषि मंत्री कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नकली खाद और बीज बेचने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने खुद पर लग रहे भ्रष्टाचार और वसूली के आरोपों पर कहा कि ये गलत है। कहते है न कि हाथी के पीछे…। — ये खबर भी पढ़िए- कृषि मंत्री ने जोधपुर में 3 फैक्ट्रियों पर मारा छापा:खाद-बीज स्टॉक का किया निरीक्षण, मुनाफाखोरों में मचा हडकंप; मानसून से पहले एक्शन कृषि मंत्री किरोड़ीलाल ने फैक्ट्री पर छापा मारा:फंगस युक्त घटिया मूंगफली मिली, किसानों को बेचा जाता था बीज; चौमूं में तैयार करते सीकर में पैकिंग