बीकानेर के प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल (पीबीएम) सरकारी हॉस्पिटल में डिलीवरी के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई। अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने बताया- सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं को बाजार से मंगवाए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाए थे। इसके बाद ही महिलाओं की तबीयत बिगड़ती गई। हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में कोई गड़बड़ी थी। अधीक्षक ने कहा- 2 जून को ही महिलाओं की हालत बिगड़ने की जानकारी मिल गई थी, जिसके बाद इस इंजेक्शन का उपयोग बंद कर दिया गया। जबकि एक प्रसूता की जेठानी का दावा है कि ऑपरेशन 4 जून को हुआ, जिसके बाद महिला की हालत खराब हुई। जिन ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू में इन महिलाओं का इलाज हुआ, वहां संक्रमण भी मिला है। हॉस्पिटल प्रशासन ने ओटी, आईसीयू में सफाई और फॉगिंग भी करवाई। पहले पढ़िए- क्या बोले मरीजों के रिश्तेदार प्रसूता के पूरे शरीर में सूजन शारदा (21) की जेठानी माया देवी का कहना है- 3 जून शारदा को हॉस्पिटल लाए थे, 4 जून को उसका ऑपरेशन हुआ। डिलीवरी के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। अब उसका 3 बार डायलिसिस हो चुका है। राहिला (19) की रिश्तेदार जुबैदा बानो ने कहा- 3 जून को ऑपरेशन से डिलीवरी हुई थी। फिर उसे ब्लीडिंग होने लगी। डॉक्टर उसे वापस ले गए और ऑपरेशन किया। अभी प्रसूता की पूरी बॉडी पर सूजन है, उसकी हालत खराब है। प्रीति (20) के पति कमल ने बताया- 15 मई से मेरी पत्नी हॉस्पिटल में भर्ती है। वह 6 महीने से प्रेग्नेंट थी। यहां ऑपरेशन के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। डिलीवरी के दूसरे दिन बच्चे की मौत हो गई। 10 से ज्यादा बार प्रीति का डायलिसिस हो चुका है। अभी भी उसकी हालत खराब है। तारा देवी (27) के जेठ झंवर दास ने कहा- प्रीति को ‘K’ वार्ड में शिफ्ट कर दिया। वहां से ICU में शिफ्ट किया गया। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के कारण गड़बड़ी हुई, उसमें जो सॉल्ट होना था, उसमें कोई कमी आने से किडनी इफेक्ट हुई है। प्रसूता का डायलिसिस भी हुआ है। इमरती (20) के भाई लेखराम ने बताया- इमरती को 1 जून को लेकर आए थे। 2 जून की सुबह डिलीवरी हुई थी। उसके बाद दर्द होने पर इंजेक्शन लगाया, लेकिन दर्द नहीं रुका। वो पूरी रात दर्द से तड़पती रही। सारी जांचें भी करवाई, उनमें किडनी फेल होना सामने आया था। फिर आईसीयू में 3 डायलिसिस हो चुके है। अभी उसकी हालत खराब है। अब समझिए… ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का उपयोग सरकारी दवा वितरण व्यवस्था से जुड़े सीनियर डॉक्टर नवल गुप्ता के अनुसार, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के उपयोग को 3 पॉइंट्स में समझा जा सकता है- इंजेक्शन देने के बाद किडनी फेल हो गई शुरुआती जांच के अनुसार, डिलीवरी तक सभी महिलाएं सामान्य थीं, लेकिन बच्चे के जन्म के करीब 2 घंटे बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। पहले अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) की शिकायत हुई, फिर किडनी प्रभावित होने की जानकारी दी गई। इसके बाद एक-एक कर सभी महिलाओं की डायलिसिस शुरू करनी पड़ी। यह सिलसिला इंजेक्शन देने के बाद शुरू हुआ। सबसे पहले भर्ती हुई प्रीति का अब तक 13 बार डायलिसिस हो चुका है। तारा देवी, शारदा, राहिला और इमरती का तीन-तीन बार डायलिसिस किया जा चुका है। इंजेक्शन में गड़बड़ी थी या नहीं, जांच शुरू पीबीएम हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने बताया- अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में कोई गड़बड़ी थी। हालांकि इस इंजेक्शन के कारण महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता। डॉ. घीया ने बताया कि कोटा में सामने आए मामले के बाद हॉस्पिटल ने एहतियात के तौर पर ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बदल दिया था और दूसरी कंपनी का इंजेक्शन उपयोग में लिया गया। 3 जून से पुराने इंजेक्शन का उपयोग बंद कर दिया गया था। सरकारी सप्लाई से ही दवा और इंजेक्शन आते हैं, लेकिन सरकारी सप्लाई नहीं होने की स्थिति में खुद अस्पताल प्रशासन को इसकी खरीद का अधिकार है। इसी अधिकार से पिछले महीने बाजार से ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन खरीदे थे। इन्हीं को प्रसूताओं को लगाया गया था, पता लगाया जा रहा है कि यह इंजेक्शन किस कंपनी के थे। 7 दिन बाद बनाई जांच कमेटी हॉस्पिटल प्रशासन को 2 जून को ही संकेत मिल गए थे, लेकिन जांच कमेटी 7 दिन बाद बनाई गई। तब तक 6 प्रसूताएं किडनी फेल होने के कारण डायलिसिस पर आ चुकी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएम ऑफिस (सीएमओ) ने एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके बाद हॉस्पिटल में लगातार मीटिंग्स की जा रही है। गायनी, नेफ्रोलॉजी, क्रिटिकल केयर और अन्य विभागों के विशेषज्ञों से अलग-अलग रिपोर्ट ली जा रही है। पूरे मामले की जांच के लिए हॉस्पिटल प्रशासन ने 2 अलग-अलग समितियां बनाई हैं। डॉ. बी.सी. घीया ने बताया कि एक समिति प्राचार्य स्तर पर और दूसरी अधीक्षक स्तर पर गठित की गई है। इसमें सारी रिपोर्ट्स देखी जाएंगी। कमेटी में 2 सीनियर गाइनेकोलॉजिस्ट, 1 फिजिशियन और ड्रग कंट्रोलर इंचार्ज भी शामिल किए हैं। इसमें नर्सिंग स्टाफ के इंचार्ज को भी लिया है। स्टरलाइजेशन प्रोसेस की जिम्मदारी उन्हीं की होती है। हमने इसलिए उनको भी शामिल किया है। ड्रग कंट्रोलर ऑफिसर और उनकी तीन सदस्यीय टीम भी पहुंची। इस टीम ने इंजेक्शन के सैंपल लिए हैं। कमेटी की रिपोर्ट्स आज रात तक आने की संभावना है। लापरवाही बरतने वाले स्टाफ पर भी होगी कार्रवाई हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. बीसी घीया ने बताया- डॉक्टर की तरफ से अभी तक कोई लापरवाही सामने नहीं आई है। हालांकि लापरवाही सामने आती है तो निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी। हालांकि कई बार मरीज की इम्युनिटी भी काउंट होती है। फिलहाल OT में डिफोगिंग करवाई है। मामले की जांच दोनों कमेटी कर रही हैं। कोटा प्रकरण से जुड़ रही कड़ियां बता दें कि कोटा मेडिकल कॉलेज में भी बीते दिनों प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले सामने आए थे। वहां जांच में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि बीकानेर और कोटा में अलग-अलग कंपनियों के इंजेक्शन उपयोग में लिए गए थे। इसके बावजूद दोनों मामलों में समान लक्षण सामने आने से जांच एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही है। ये खबर भी पढ़िए… सरकारी हॉस्पिटल में डिलीवरी, 6 महिलाओं की किडनी फेल:बीकानेर के PBM अस्पताल में लापरवाही, एक मरीज वेंटिलेटर पर; अधीक्षक बोले- जांच कमेटी बनाई कोटा के मेडिकल कॉलेज के बाद बीकानेर के PBM हॉस्पिटल में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बीकानेर में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक-एक कर 6 महिलाओं की किडनी फेल हो गई। पूरी खबर पढ़िए
