पूर्व आईपीएस अधिकारी और बंगाल में भाजपा विधायक डॉ. राजेश कुमार सुरोलिया ने कहा है कि ममता बनर्जी 2021 में नंदीग्राम से चुनाव हार गई थीं। चुनाव हारने के बाद उन्होंने मुझे आठ महीने तक कंपलसरी वेटिंग पर रखा। पिछले 10 सालों में मुझे किसी पुलिस पोस्टिंग पर नहीं रखा गया। मुझे केवल सिविल पोस्टिंग दी गई। उन्होंने कहा- व्यक्तिगत तौर पर मुझे बहुत प्रताड़ित किया गया। मुझे तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन मेरा मनोबल नहीं तोड़ा जा सका। मुझे खुशी है कि आज मुझे नए प्लेटफॉर्म पर लोगों की सेवा करने का अवसर मिला है। जयपुर में लघु उद्योग भारती की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में पहुंचे डॉ. सुरोलिया ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने राजनीतिक सफर और बंगाल की राजनीति को लेकर खुलकर बात की। रिटायरमेंट के बाद भी जनसेवा का ही लक्ष्य था आईपीएस से सीधे राजनीति में आने के सवाल पर डॉ. सुरोलिया ने कहा- यह भगवान राम की कृपा है कि मुझे इस लायक समझा गया कि मैं चुनाव लड़कर जीतकर आ सकूं। भाजपा के सीनियर नेताओं ने मुझ पर भरोसा जताया। मैंने पुलिस सेवा में 36 साल बिताए और वहां भी जनसेवा के काम में लगा रहा। राजनीति में आने के बाद जनसेवा का बड़ा मंच मिला। मैं खुद को इसके लिए समर्पित करना चाहता हूं। ‘मैंने सीपीएम, ममता और केंद्र सरकार सभी के साथ काम किया’ उन्होंने कहा- मैंने सीपीएम के साथ भी काम किया, ममता बनर्जी के साथ भी काम किया। दिल्ली में भी सात साल काम किया। मेरे जीवन का उद्देश्य हमेशा राष्ट्र प्रथम रहा है। उन्होंने कहा- ममता बनर्जी मानती थीं कि 2021 में नंदीग्राम चुनाव में उनकी हार में मेरी भूमिका रही है। लेकिन मैंने उस समय भी अपने लोगों से कहा था कि निष्पक्ष चुनाव कराने से एक सिटिंग मुख्यमंत्री भी हार सकती है। हमने कुछ नहीं कराया, केवल निष्पक्ष चुनाव कराया था। राष्ट्र प्रथम की सोच भाजपा से मेल खाती है क्या ममता बनर्जी से टकराव की वजह से भाजपा ने उन्हें टिकट दिया? इस सवाल के जवाब में डॉ. सुरोलिया ने कहा- ऐसा नहीं होता है। मेरी सोच राष्ट्र प्रथम की रही है। भाजपा की सोच भी वही है। दोनों विचारधाराएं एक-दूसरे से मेल खाती हैं। भाजपा ने मुझे उम्मीदवार माना, इसके लिए मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं। गायों की कुर्बानी पर बोले- कानून पहले से मौजूद है गायों की कुर्बानी को लेकर हुए विवाद पर उन्होंने कहा- यह कानून 1950 से है। हमने कोई नया कानून नहीं बनाया है। हम केवल कानून का पालन कर रहे हैं। हमने सुनिश्चित किया कि बंगाल में कहीं भी गाय की कुर्बानी नहीं हो। देश के संसाधनों का लाभ देशवासियों को मिलना चाहिए बांग्लादेशी नागरिकों और सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर उन्होंने कहा- अगर कोई बांग्लादेश का नागरिक है, अपने देश जा रहा है। इसमें कोई गलत बात नहीं है। हमारे देश के संसाधनों का लाभ किसी दूसरे देश के नागरिक को नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा- करीब 30 लाख ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जो वहां के नहीं हैं। इसका मतलब है कि हर महीने करोड़ों रुपए गलत लोगों तक पहुंच रहे थे। यदि यह पैसा सही पात्र लोगों तक पहुंचे तो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। झुंझुनूं के रहने वाले हैं डॉ. राजेश कुमार सुरोलिया बता दें कि झुंझुनूं के मुकुंदगढ़ में जन्मे पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. राजेश कुमार सुरोलिया ने पश्चिम बंगाल की जगतदल विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर राजनीति में नई पारी शुरू की है। रिटायरमेंट के महज 90 दिन बाद चुनाव लड़कर उन्होंने टीएमसी के सोमनाथ श्याम को करीब 15 हजार वोटों से हराया।
