राजसमंद में कांकरोली के द्वारकाधीश प्रभु मोती बंगले और जलमहल में विराजे। शनिवार को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की छठ पर मंदिर में विशेष आयोजन हुआ। पुरुषोत्तम मास के तहत मनोरथों की श्रृंखला में राजभोग दर्शन में प्रभु को मोती बंगले में विराजित किया गया। जानकारी के अनुसार- शयन दर्शन में भगवान का जलमहल मनोरथ सजाया गया। पुरुषोत्तम मास के इक्कीसवें दिन मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। द्वारकाधीश का मनोहारी श्रृंगार श्रृंगार में प्रभु के मस्तक पर सफेद पाग, मोती का लूम तुर्रा, सफेद आड़बंद और मोती के आभूषण और मालाएं धारण कराई गईं। राजभोग दर्शन में अहमदाबाद, बड़ोदा और मेहसाणा सहित प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ लिया। उत्थापन दर्शन शाम 4.30 बजे और भोग-आरती दर्शन शाम करीब 5.45 बजे खुले। इसके बाद रतन चैक में आकर्षक जलमहल मनोरथ सजाया गया। पूरे चैक में यमुना जल का स्वरूप तैयार किया गया। इसमें चांदी की दो छतरियों के नीचे दो गोपियों को स्थापित किया गया। प्रभु के सम्मुख आठ गोपियां लकड़ी के सिंहासनों पर विराजमान की गईं। जलमहल में इत्र मिश्रित जल, कमल, गुलाब और मोगरे के फूलों से विशेष सजावट की गई। विभिन्न स्थानों पर जल फव्वारे लगाए गए। शयन आरती गोस्वामी संजीव कुमार जी महाराजश्री ने संपन्न कराई। मंदिर मुखिया, सहायक मुखिया, भीतरिया, कीर्तनकार और पखावज वादकों ने अपनी सेवाएं अर्पित कीं।