फलोदी के कृषि विज्ञान केंद्र में 15 दिवसीय उर्वरक विक्रेता प्रमाण-पत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम 6 जून से 20 जून 2026 तक चलेगा, जिसमें कुल 30 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र, फलोदी के प्रभारी अधिकारी और प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. गजानंद नागल ने की। ग्राम बीठड़ी, पंचायत समिति फलोदी के प्रगतिशील कृषक संतोषराम कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रहे। उन्होंने प्राकृतिक खेती के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह कृषि उत्पादन को टिकाऊ बनाने, भूमि स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है। संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक किया संतोषराम ने प्रतिभागियों से जैविक और प्राकृतिक कृषि आदानों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने कृषि नवाचारों और अनुभवों को भी साझा किया। डॉ. नागल ने बताया- उर्वरक विक्रेताओं की किसानों तक वैज्ञानिक और सही जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि यह 15 दिवसीय प्रमाण-पत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम उर्वरक नियंत्रण आदेश, उर्वरकों के प्रकार, संतुलित पोषण प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, उर्वरकों के सुरक्षित भंडारण और विपणन जैसे विभिन्न तकनीकी विषयों पर प्रतिभागियों का ज्ञान बढ़ाएगा। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कार्यक्रम का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया। इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ (उद्यानिकी) डॉ. प्रियंका कटारा और विषय विशेषज्ञ (पशुपालन) डॉ. प्रियंका कायथ भी उपस्थित रहीं। उन्होंने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका कटारा ने किया।