उदयपुर में बीजेपी नेता और आरटीओ इंस्पेक्टर के बीच हाईवे पर विवाद का एक वीडियो सामने आया है। दरअसल, उदयपुर-पिंडवाड़ा हाईवे पर एक ट्रैक्टर में पोल के खड्‌ढे खोदने की मशीन लगी थी। इसे देखकर आरटीओ ने ट्रैक्टर को रोककर जब्त किया था। मामले की सूचना पर बीजेपी के गोगुंदा मंडल अध्यक्ष निखिल कोठारी मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने ड्राइवर को अपना स्टाफ बताया। ये भी कहा कि ट्रैक्टर उनका है और ठेके पर दे रखा था। उन्होंने आरोप लगाया कि आरटीओ इंस्पेक्टर ने मामले को रफा-दफा करने के लिए 80 हजार रुपए की रिश्वत मांगी। गोगुंदा थानाधिकारी श्यामसिंह चारण ने बताया कि आरटीओ अधिकारी सुनील चौधरी ने थाने पहुंचकर परिवाद दिया था। मामले की जांच कर रहे हैं। वीडियो और मौके पर मौजूद लोगों से बातचीत करेंगे। मामले पर आरटीओ ज्ञानदेव विश्वकर्मा और डीटीओ मुकेश डाढ़ से बात करने की कोशिश की लेकिन फोन नहीं उठाया। वीडियो आया सामने उदयपुर-पिंडवाड़ा हाईवे पर एक ट्रैक्टर में खड्‌ढे खोदने की मशीन लगी थी। इस पर कोठारी आरटीओ अधिकारी सुनील चौधरी ने ट्रैक्टर को जब्त कर लिया था। इसका ड्राइवर ने विरोध किया और बीजेपी के गोगुंदा मंडल अध्यक्ष निखिल कोठारी को मामले की सूचना दी। बीजेपी नेता मौके पर पहुंचे और मामला बढ़कर गाली-गलौज तक पहुंच गया। बीजेपी नेता ने कहा कि मुझे सब सिस्टम पता है। आवाज ऊंची नहीं करने की बात करते हुए राजकार्य बाधा में मामला दर्ज करवाने की बात कही। 2 मिनट 56 सेकंड के वीडियो में वे कई बार गालियां देते हुए भी दिखे। आरटीओ कर्मचारियों ने बीजेपी नेता के इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बना लिया। बीजेपी नेता बोले- एक लाख में सेंटलमेंट करना चाहते थे मामले को लेकर बीजेपी नेता कोठारी का कहना है कि ट्रैक्टर सीज करने पर दोपहर में आरटीओ ऑफिस में 52 हजार 200 रुपए का कमर्शियल यूज करने का टैक्स भी जमा करवा दिया। तब भी आरटीओ अधिकारी पूरा मामला सेटल करने का पहले 1 लाख रुपए मांग रहे थे। आखिर में 80 हजार रुपए लेकर सेटलमेंट करने की बात कर रहे थे।
नेता ने कहा कि आरटीओ अधिकारी ने कहासुनी में काफी बात कही। इसके बाद थोड़ी बहस हुई लेकिन गाली-गलौच नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि आरटीओ इंस्पेक्टर सुनील चौधरी जानबूझकर ट्रैक्टर ड्राइवर शंकर सिंह को परेशान कर रहे थे। जबकि ट्रैक्टर में लेबर्स बैठे हुए थे। ट्रैक्टर में लगी मशीन से बिजली के पोल को खोदने का काम किया जाता है। मैंने आरटीओ अधिकारी को टोल के यहां रुकने को बोला था लेकिन वह रुके नहीं। इस कारण आगे जाकर मैंने उन्हें रुकवाकर बातचीत की थी।