मानसिक बीमारी के कारण जब मां घर से निकली थी, तब मैं ढाई साल का था। बड़ी बहन सोनवती 10 साल की थी। जबकि छोटी बहन 7 साल की थी। मुझे मां की शक्ल भी याद नहीं है। साल 2022 में पिता का निधन हो गया। इसके बाद मैं पूरी तरह से अकेला हो गया था। यह कहना है भरतपुर के अपना घर आश्रम पहुंचे रोहित का। रोहित अपनी बहन और जीजा के साथ अपनी मां को लेने पहुंचे थे। बेटा मां को पहचान नहीं पाया तो बड़ी बहन ने उसे बताया, जिसके बाद बेटे ने अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। 25 साल बाद मां को देखकर बेटा-बेटी लिपटकर रो पड़े। बीमारी के कारण साल 2001 में घर से निकल गई थी अपना घर आश्रम के सचिव नरेंद्र तिवारी ने बताया-सुखदेई (50) उन्नाव (उत्तर प्रदेश) के आकमपुर की रहने वाली हैं। वे करीब 25 साल पहले साल 2001 में मानसिक रूप से बीमार हो गई थी। इसके कारण अचानक घर से निकल गई। 16 सितंबर 2025 को सुखदेई को अपना घर आश्रम की टीम ने जोधपुर से रेस्क्यू किया। उन्हें भरतपुर के अपना घर आश्रम लाया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। वे करीब 24 सालों सड़कों पर भटकती रहीं। चार दिन पहले घर का पता बताया तो संपर्क किया
4 दिन पहले 1 जून को सुखदेई ने अपने घर के बारे में आश्रम प्रबंधन को बताया। इसके बाद उनके परिजनों को जानकारी दी गई। सुखदेई की बेटी-बेटा और दामाद उन्हें लेने भरतपुर अपना घर आश्रम पहुंचे। बेटे रोहित और बेटी सोनवती की आंखों से आंसू छलक गए और दोनों अपनी मां से लिपटकर रोने लगे। बेटे ने पहली बार अपनी मां को देखा तो पैर छुकर आशीर्वाद भी लिया। बेटा बोला- जब मां गई थीं, तब मैं ढाई साल का था बेटे रोहित ने बताया- जब मां घर से निकली थी। तब मेरी उम्र सिर्फ ढाई साल थी। बड़ी बहन सोनवती 10 साल की थी। जबकि छोटी बहन 7 साल की थी। मुझे मां की शक्ल भी याद नहीं है। मां के घर से जाने के बाद पिता बचन सिंह ने उन्हें काफी ढूंढा, लेकिन मां का कुछ पता नहीं लगा। पिता ने मेरी दोनों बहनों की शादी कर दी। मां के घर से जाने के गम में वे हमेशा दुखी रहते थे। साल 2022 में पिता का निधन हो गया। इसके बाद मैं पूरी तरह से अकेला हो गया था। मैं मिस्त्री का काम करता हूं। 4 दिन पहले अपना घर आश्रम की टीम ने फोन कर मां की डिटेल बताई तो यकीन नहीं हुआ। इसके बाद अपनी बड़ी बहन सोनवती और जीजा धनपाल को लेकर हम अपना घर आश्रम पहुंचे। मां को लेकर घर के लिए रवाना हुए
25 साल बाद मां को देखकर बेटी लिपटकर रो पड़ी और बेटे ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इसके बार महिला परिवार को लेकर घर के लिए रवाना हो गया। अपना घर गिनीज वर्ल्ड ऑफ रिकॉर्ड में शामिल
अपना घर आश्रम के सचिव नरेंद्र तिवारी ने बताया कि अपना घर आश्रम बेसहारा लोगों के लिए मानवीय संस्थान है। भरतपुर के अपना घर आश्रम को गिनीज वर्ल्ड ऑफ रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। अपना घर आश्रम को लार्जेस्ट होमलेस शेल्टर फीमेल की श्रेणी में रखा गया है। इस समय अपना घर आश्रम में 3295 बेसहारा महिलाएं रह रही हैं। ये खबर भी पढ़िए… 16 साल बाद मां मिली तो फूट-फूटकर रोने लगे बेटे:घर से 2300 किलोमीटर दूर आश्रम में थी; ढूंढते-ढूंढते पति की हो चुकी मौत भरतपुर में 16 साल बाद मां से बेटे मिले तो फूट-फूटकर रोने लगे। बेटे मां से ऐसे लिपट गए, मानो उन्हें अपनी खोई हुई दुनिया वापस मिल गई हो। ये पूरा घटनाक्रम अपना घर आश्रम में सोमवार को हुआ। पूरी खबर पढ़िए