शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने गिरल लिग्नाइट माइंस के श्रमिकों की मांगों को लेकर आंदोलन को और व्यापक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार को उन्होंने विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से संवाद किया और मजदूरों की लंबित मांगों व आंदोलन की वर्तमान स्थिति से उन्हें अवगत कराया। विधायक ने कहा कि मजदूरों की यह लड़ाई अब केवल श्रमिकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे क्षेत्र की लड़ाई बन चुकी है। ग्रामीणों को बताया आंदोलन और वार्ताओं का पूरा हाल जनसंपर्क अभियान के दौरान भाटी ने ग्रामीणों को गिरल आंदोलन की वर्तमान स्थिति, प्रशासन के साथ हुई वार्ताओं और अब तक लंबित मांगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि श्रमिक लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उनकी मांगों के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने दिया समर्थन, अधिकारों के लिए एकजुट रहने का आह्वान इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे और उन्होंने आंदोलन को अपना समर्थन देने का भरोसा जताया। भाटी ने लोगों से कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे बड़ी शक्ति होती है। जब तक लोग अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर खड़े नहीं होंगे, तब तक समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं हो सकेगा। 28 दिन से धरनास्थल पर विधायक, डेढ़ माह से जारी है आंदोलन दरअसल, शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी पिछले 28 दिनों से मजदूरों के साथ धरनास्थल पर मौजूद हैं। वहीं श्रमिक बीते डेढ़ माह से अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। 19 मई को मजदूरों ने रैली भी निकाली थी। इस दौरान प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता हुई, लेकिन सहमति नहीं बनने के कारण धरना अब तक जारी है। आंदोलन के अगले चरण की रणनीति पर मंथन विधायक रविन्द्र सिंह भाटी अब आंदोलन के अगले चरण की रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। गांवों में चल रहा जनसंवाद कार्यक्रम भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। धरनास्थल पर हुई कई बैठकों और मजदूर प्रतिनिधियों के साथ लगातार विमर्श के बाद आंदोलन को और व्यापक स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। ‘मजदूरों की मांगें न्यायसंगत, उन्हें अनसुना करना गलत’ जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान भाटी ने कहा कि गिरल लिग्नाइट माइंस के श्रमिक पिछले डेढ़ महीने से अधिक समय से अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और उन्हें अनसुना करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। मजदूरों के अधिकारों की इस लड़ाई को किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा। लिखित निर्णय तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े श्रमिक धरने पर बैठे श्रमिकों ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से उनके अधिकारों की अनदेखी की गई है और अब वे किसी भी परिस्थिति में पीछे हटने वाले नहीं हैं।