चित्तौड़गढ़ में सोमवार को राष्ट्रीय पशुपालक संघ, डीएनटी संघर्ष समिति और मूल ओबीसी महापंचायत के संयुक्त नेतृत्व में जेल भरो आंदोलन आयोजित किया गया। इस दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग चित्तौड़गढ़ पहुंचे और जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई और कहा कि लंबे समय से डीएनटी समाज और अन्य वंचित वर्ग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का अब तक समाधान नहीं हुआ है। आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री का पुतला भी जलाया गया। नेताओं ने बताया कि यह आंदोलन अब केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजस्थान के हर जिले में इसी तरह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 1 जुलाई को जयपुर में बड़े स्तर पर महा-पड़ाव किया जाएगा, जिसमें प्रदेशभर से लोग शामिल होंगे। डीएनटी समाज के लिए 10 फीसदी अलग आरक्षण की प्रमुख मांग
आंदोलन का मुख्य मुद्दा डीएनटी समाज के लिए अलग से 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग रहा। डीएनटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष लालजी राईका ने कहा कि समाज लंबे समय से अपने अधिकारों और हिस्सेदारी की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि विभिन्न आयोगों ने भी डीएनटी समाज को विशेष व्यवस्था देने की सिफारिश की है। आंदोलनकारियों ने मांग की कि डीएनटी समाज को शिक्षा, रोजगार और राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसके साथ ही राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने, आवासीय पट्टे उपलब्ध कराने, जमीन से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने और शिक्षा के बेहतर अवसर देने की मांग भी उठाई गई। उनका कहना है कि राजस्थान में डीएनटी समाज की आबादी बड़ी संख्या में है, लेकिन विकास और प्रतिनिधित्व के मामले में यह वर्ग अब भी पीछे है। इसलिए सरकार को जल्द निर्णय लेकर समाज को उसका अधिकार देना चाहिए। सरकार से मुख्यमंत्री स्तर पर वार्ता की मांग
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने कहा कि पिछले दो सालों से यह आंदोलन लगातार चल रहा है। उनका आरोप है कि पहले भी सरकार के साथ बातचीत हुई थी और समाज की समस्याओं को विस्तार से रखा गया था, लेकिन उसके बाद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। आंदोलनकारियों ने मांग की कि अब मुख्यमंत्री स्तर पर दूसरे दौर की वार्ता जल्द आयोजित की जाए। साथ ही सरकार यह स्पष्ट करे कि उनकी मांगों के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी मांग रखी कि वार्ता की तारीख और समय जल्द घोषित किया जाए ताकि समाज को आगे की दिशा स्पष्ट हो सके। नेताओं का कहना है कि जब तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और आने वाले समय में इसे और व्यापक बनाया जाएगा। आरक्षण के उपवर्गीकरण को बताया जरूरी
आंदोलन में शामिल नेताओं ने कहा कि अब केवल डीएनटी समाज ही नहीं, बल्कि वंचित ओबीसी, वंचित एससी और वंचित एसटी वर्ग भी इस अभियान से जुड़ चुके हैं। उनका मानना है कि वर्तमान आरक्षण व्यवस्था का लाभ सभी जरूरतमंद समुदायों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। इसलिए आरक्षण का उपवर्गीकरण किया जाना चाहिए ताकि हर वर्ग को उसकी आबादी और जरूरत के अनुसार अवसर मिल सके। आंदोलनकारियों का कहना है कि शिक्षा, सरकारी नौकरियों और राजनीति में सभी समाजों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी कदम है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के करीब 150 समाज इस मांग का समर्थन कर रहे हैं और अब एक साझा मंच पर आकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि आरक्षण व्यवस्था में संतुलन लाया जाता है तो इससे समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। युवाओं ने कहा- हक मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष
प्रदर्शन के दौरान विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि समाज के युवाओं में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और वे लगातार आंदोलन से जुड़ रहे हैं। राष्ट्रीय पशुपालक संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक समाज को उसका हक नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। नेताओं ने बताया कि डीएनटी, वंचित ओबीसी, वंचित एससी और वंचित एसटी वर्गों ने मिलकर एक साझा मंच तैयार किया है, जिसके माध्यम से सभी वर्ग अपनी समस्याओं और मांगों को एक साथ उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल आरक्षण का मुद्दा नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक विकास से जुड़ा विषय है। इसी उद्देश्य को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाया जा रहा है और आने वाले दिनों में इसे प्रदेशभर में और मजबूत किया जाएगा।
