राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम दक की ओर से पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर किए गए दुर्व्यवहार का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर पूरे प्रदेश के पूर्व पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों में भारी गुस्सा है। इसी आक्रोश के तहत आज ‘राजस्थान सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान’ की झुंझुनूं जिला इकाई के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्ट्रेट पर इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद उन्होंने जिला कलेक्टर के माध्यम से मह राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपकर मंत्री को तुरंत पद से हटाने की मांग की है। क्या है पूरा मामला संस्थान द्वारा सौंपे गए आधिकारिक ज्ञापन के अनुसार, यह पूरी घटना 25 मई 2026 की है। आरोप है कि सहकारिता मंत्री गौतम दक ने चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला थाने में जाकर वहां अपनी ड्यूटी कर रहे थानाधिकारी (एसएचओ) और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ सरेआम दुर्व्यवहार किया। ज्ञापन में कहा गया है कि मंत्री ने कानून के रखवालों के साथ न केवल बदतमीजी की, बल्कि उनके साथ गाली-गलौज करते हुए अत्यंत अमर्यादित और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया। एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह का व्यवहार किए जाने से प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और आम जनता में सरकार के खिलाफ गहरा रोष है। संस्थान ने उठाई दो प्रमुख मांगें सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान ने राज्यपाल से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है और अपनी दो मुख्य मांगें सामने रखी हैं। संस्थान का कहना है कि मंत्री ने अपने पद की गरिमा और संविधान की शपथ का घोर उल्लंघन किया है। ऐसे में उन्हें मंत्री पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए। मुकदमे की निष्पक्ष जांच: इस घटना के संबंध में डूंगला थाने में मुकदमा नंबर 76/2026 दर्ज किया गया है। मांग की गई है कि इस आपराधिक कृत्य की निष्पक्ष और तेजी से जांच की जाए ताकि कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई हो सके। 15 दिन का अल्टीमेटम, मांगें न मानने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी झुंझुनूं जिला इकाई के अध्यक्ष ने प्रशासन और सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि कानून सबके लिए बराबर है। यदि अगले 15 दिनों के भीतर मंत्री गौतम दक के खिलाफ कोई ठोस और प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले दिनों में प्रदेश के सभी सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी, विभिन्न कर्मचारी संगठन और आम जनता सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी।
