पाली में UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने जल संरक्षण का महत्व बताते हुए कहा- साल 2017 की बात है। मैं बाड़मेर के एक गांव में गया था, वहां पानी की मनुहार हुई। आधा गिलास पानी पीने के बाद बचा हुआ धरती पर गिरा दिया। इस पर उस घर के बुजुर्ग ने उन्हें टोक दिया। कहा- आप एक गिलास घी गिरा देते तो तकलीफ नहीं होती। जितनी तकलीफ आधा गिलास पानी गिराने से हुई है। मैंने कहा- बाबाजी अब तो पानी की समस्या नहीं है, आपके यहां नहर आ गई है। वो बोले- ये तो आज आई है, हमें पता है पानी के लिए हमने कितना कष्ट भोगा है। UDH मंत्री आज पाली में पिंजरा पोल गौशाला में मौजूद रहे। उन्होंने यहां वंदे गंगा जल संरक्षण, जन अभियान कार्यक्रम को संबोधित किया। खर्रा बोले- परात में बैठ कर नहाते थे UDH मंत्री खर्रा ने पूरा किस्सा सुनाते हुए कहा- गिलास में पानी गिराने की बात पर बुजुर्ग बोले- बाड़मेर में पानी की बहुत तकलीफ है। इसलिए 10-10 दिन में एक बार नहाते हैं वो भी परात में बैठकर। जो पानी बचता उसे छानकर उससे कपड़े धोते थे। उसके बाद जो बचा पानी होता था उसका भी रियूज करते थे। जैसे लेटबॉथ और पेड़-पौधों में डालने के लिए। ऐसे में समझा जा सकता है कि पानी का हमारे जीवन में कितना महत्व है। इसलिए हमें पेयजल बर्बाद करने से बचाना चाहिए। 1% पानी सिंचाई और पीने लायक मंत्री खर्रा ने कहा- इस धरती पर बहुत पानी है। लेकिन, अधिकतर पानी खारा है जो न तो पीने के काम आता है और न ही सिंचाई में। सिर्फ 1 प्रतिशत पानी पीने और सिंचाई के योग्य है। इसलिए हमें उसका सोच-समझ कर उपयोग करना होगा। कई देशों में पेयजल संकट जैसे हालात हैं। हमें भी चाहिए की पानी का दुरुपयोग कम से कम करें। वरना आने वाले सालो में पेयजल संकट जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। जनता के सहयोग के बिना अभियान संभव नहीं खर्रा ने कहा- जल संरक्षण को लेकर सरकार वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान चला रही है। जिसक उद्देश्य पेयजल संरक्षण है। लेकिन सरकार को कोई भी अभियान जब तक सफल नहीं हो सकता जब तक की जनता उसमें सहभागिता न निभाएं। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को जनहित के सरकार के अभियानों में सहभागिता निभाने का आह्वान किया और जल संरक्षण को लेकर शपथ दिलाई। गायों ने गुड़-लापसी छोड़, हरा चारा खाया पाली के पिंजरा पोल गौशाला में आयोजित वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान कार्यक्रम में मंत्री खर्रा ने गायों को गुड़ खिलाने का प्रयास किया लेकिन गायों ने नहीं खाया। फिर उन्होंने लापसी खिलाने का प्रयास किया, वह भी गायों ने नहीं खाई। इसके बाद जैसे ही हरा चारा लाया गया तो गायों ने खा लिया। इस पर पूर्व सभापति महेंद्र बोहरा ने कहा- गायें गुड़ नहीं खा रही हैं। खर्रा उनकी बात सुनकर बोले- लगता है इन्हें गोभक्त नियमित गुड़ खिला रहे हैं। इसलिए फिलहाल इस गुड़ को संभालकर रखो ताकि जिस दिन गौभक्त गौशाला में कम आएं। उस दिन गायों को खिलाने के काम आएगा।