डीडवाना में सोमवार को विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू (डीएनटी) समाज ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन किया। इन मांगों में शिक्षा, नौकरियों और राजनीति में 10 प्रतिशत अलग से आरक्षण शामिल है। राष्ट्रीय पशुपालक संघ और डीएनटी संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित ‘जेल भरो आंदोलन’ में हजारों की संख्या में पशुपालक और घुमंतू समाज के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के बाहर पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़कर विरोध जताया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का पुतला भी दहन किया। आंदोलन की शुरुआत स्थानीय पशु प्रदर्शनी मेला मैदान में आयोजित एक महापंचायत से हुई। सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय पशुपालक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह राइका ने कहा कि डीएनटी समाज पिछले दो वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन सरकार समाधान निकालने के बजाय आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 1 जुलाई को जयपुर में महा-पड़ाव डाला जाएगा। राइका ने बताया कि अब इस आंदोलन में वंचित ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग भी शामिल हो गए हैं। वक्ताओं ने आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण लागू करने और “दोस्त प्लस मॉडल” के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक आरक्षण का लाभ पहुंचाने की मांग उठाई। महापंचायत के बाद समाज के लोग एक विशाल रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट की ओर रवाना हुए। हाथों में झंडे और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कलेक्ट्रेट के बाहर भारी बैरिकेडिंग की थी। जैसे ही रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, आक्रोशित प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स पर चढ़ गए और आगे बढ़ने का प्रयास किया। लगभग 15 से 20 मिनट तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका। बाद में, लाल सिंह राइका के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
