राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर मुख्यपीठ) ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) जोधपुर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामला एक स्टूडेंट के नाम पर तैयार दो गोल्ड मेडल का है। जो दीक्षांत समारोह में किसी अन्य स्टूडेंट को दे दिए गए। दीक्षांत समारोह शुरू होने से महज 5 मिनट पहले ये फैसला लिया गया। जस्टिस संजीत पुरोहित की एकल पीठ ने 22 मई को यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि वह याचिकाकर्ता छात्र की मार्कशीट जारी करने के संबंध में अगली सुनवाई तक अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करें। मामले की अगली सुनवाई जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में होगी। ज्यूडिशियल एस्पिरेंट अनुज शुक्ला (याचिकाकर्ता) अपने सीनियर निखिल अजमेरा की मदद से कोर्ट में खुद ही पैरवी कर रहे हैं। बता दें कि भीलवाड़ा के रहने वाले याचिकाकर्ता अनुज शुक्ला ने एनएलयू उड़िसा से साल 2018 से 2023 तक एलएलबी की पढ़ाई की थी। इसके बाद 26 जुलाई 2023 के दीक्षांत समारोह में उन्हें कुल 8 गोल्ड मेडल मिले थे। एलएलबी पूरी करने पर राष्ट्रपति के हाथों अनुज को गोल्ड मेडल मिले थे। दीक्षांत जुलूस से 5 मिनट पहले का चौंकाने वाला फैसला याचिकाकर्ता अनुज शुक्ला एलएलबी के बाद एनएलयू जोधपुर के एलएलएम (आईपीआर लॉ) बैच 2023-24 के छात्र रहे। 23 फरवरी 2025 को आयोजित यूनिवर्सिटी के 17वें दीक्षांत समारोह में उन्हें दो गोल्ड मेडल मिलने थे। इन मेडलों के लिए यूनिवर्सिटी की कमेटी ने 8 फरवरी 2025 की बैठक में अनुज के नाम की सिफारिश की थी, जिसे 15 फरवरी को एकेडमिक काउंसिल ने मंजूरी भी दे दी थी। दीक्षांत समारोह के ब्रोशर में अनुज का नाम छप चुका था और मेडल पर भी उनका नाम लिखा था। लेकिन 23 फरवरी को दीक्षांत जुलूस शुरू होने में 5 मिनट पहले परीक्षा नियंत्रक (एग्जाम कंट्रोलर) ने उन्हें रोक दिया। अनुज को बताया गया कि ‘री-इवैल्यूएशन’ के कारण वे गोल्ड मेडल के हकदार नहीं हैं। बिना सुनवाई का अवसर दिए, दोनों मेडल उसी क्लास की एक अन्य छात्रा को दे दिए गए। ‘री-इवैलुएशन’ का पेचीदा खेल और विवि की नीति इस पूरे विवाद की जड़ एलएलएम फर्स्ट सेमेस्टर का ‘रिसर्च मेथोडोलॉजी’ सब्जेक्ट है। अनुज ने इस परीक्षा में 82 अंक प्राप्त किए थे, जो री-इवैल्यूएशन के बाद घटकर 65 हो गए। अनुज ने 4 जनवरी 2024 को ईमेल कर इसका जवाब मांगा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। परीक्षा विभाग ने अनुज को 82 अंकों के आधार पर ही ग्रेड शीट जारी की थी, जिससे उनका कुल स्कोर 441/480 और सीजीपीए 9.19/10 था। इसी आधार पर 8 फरवरी को कमेटी ने अनुज (875 अंक) को उनकी सहपाठी (872 अंक) से बेहतर मानते हुए योग्य ठहराया था। लेकिन दीक्षांत समारोह के दिन परीक्षा नियंत्रक ने अचानक घटे हुए अंकों को आधार बनाकर पूरा फैसला पलट दिया। गोल्ड मेडल देने/रद्द करने का अधिकार सिर्फ ‘एकेडमिक काउंसिल’ को हाईकोर्ट में अनुज ने खुद पैरवी करते हुए अपनी याचिका में कई गंभीर कानूनी सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि एनएलयू के नियमों के अनुसार गोल्ड मेडल देने या रद्द करने का एकमात्र अधिकार ‘एकेडमिक काउंसिल’ को है, परीक्षा नियंत्रक को नहीं। दीक्षांत समारोह (23 फरवरी) के दिन ऐन वक्त पर लिए गए इस फैसले को कुलपति प्रो. (डॉ.) हरप्रीत कौर की स्वीकृति 25 फरवरी को मिली, यानी जब मेडल पहले ही बांटे जा चुके थे। याचिका के अनुसार, 17 मार्च 2025 को परीक्षा विभाग ने अनुज को एक नई मार्कशीट थमाई, जिसे बैक डेट 23 फरवरी से सत्यापित किया गया था। अनुज ने इसे अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद से उन्हें आज तक सही मार्कशीट नहीं मिली है। आरटीआई मांगी तो हुआ चौंकाने वाला खुलासा अनुज ने सूचना के अधिकार के तहत जब 23 फरवरी 2025 की बैठक की जानकारी मांगी तो एनएलयू के लोक सूचना अधिकारी ने 23 सितंबर 2025 को चौंकाने वाला जवाब दिया। उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों से सामने आया कि ऐन वक्त पर गोल्ड मेडल याचिकाकर्ता को नहीं देकर किसी और को देने के लिए बैठक की गई थी। 23 फरवरी को बताई गई इस बैठक में यूनिवर्सिटी के चार सीनियर प्रोफेसर शामिल बताए गए। लेकिन इसके दस्तावेजों पर किसी के भी साइन के नीचे तारीख नहीं है। हैरानी की बात ये भी सामने आई कि 23 फरवरी को ही अचानक निर्णय बदल कर गोल्ड मेडल किसी और को दे भी दिया और वीसी के साइन 25 को करवाए गए। हाईकोर्ट में सुनवाई और एनएलयू को निर्देश इस मामले में सबसे पहले 6 नवंबर 2025 को जस्टिस सुनील बेनीवाल ने यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किए थे। अब 22 मई की ताजा सुनवाई में एनएलयू की ओर से अधिवक्ता श्रेयांश मर्डिया उपस्थित हुए। उन्होंने याचिकाकर्ता के ‘संशोधन आवेदन’ पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। जस्टिस संजीत पुरोहित ने उन्हें समय देते हुए मार्कशीट रोके जाने को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।
