जैसलमेर जिले में 31 मई के बाद ईंटें पकना पूरी तरह से बंद हो जाएंगी। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों का हवाला देते हुए 31 मई के बाद ईंट भट्टों में जलाई (ईंट पकाने का काम) पर पूरी तरह रोक लगा दी है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी जगदीश चौधरी ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में चल रहे एक मामले (रामदास बनाम राजस्थान राज्य) में इस साल 24 जनवरी को एक बड़ा आदेश जारी हुआ था। इसके तहत अगर 31 मई के बाद कोई भी ईंट भट्टा चलता हुआ पाया गया, तो ऐसी स्थिति में प्रशासन सीधे कानूनी कार्रवाई करेगा, जिसमें भट्ठा सीज (जब्त) करना, भारी-भरकम जुर्माना (पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति) वसूलना और जेल भेजना शामिल है। इसके लिए भट्ठा मालिक खुद जिम्मेदार होंगे। इसी आदेश और मुख्यालय के नियमों को ध्यान में रखकर जैसलमेर के स्थानीय मौसम, पर्यावरण, मिट्टी और मजदूरों की उपलब्धता के आधार पर ईंट भट्टों को साल में केवल 6 महीने (1 दिसंबर से 31 मई तक) ही काम करने की मंजूरी दी गई थी। अब वह तय समयसीमा खत्म हो रही है। पर्यावरण सुधारने के लिए तय हुआ ‘सिक्स मंथ फॉर्मूला’ जैसलमेर की गर्म जलवायु और संवेदनशील पर्यावरण को देखते हुए प्रशासन ने यह ‘सिक्स मंथ फॉर्मूला’ लागू किया है। इसके तहत सर्दियों और शुरुआती गर्मियों (दिसंबर से मई) में तो ईंटें बनाने की छूट रहेगी, लेकिन तेज गर्मी और मानसून के महीनों में भट्टों से निकलने वाले धुएं पर लगाम लगाई जाएगी, जिससे वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। आदेश नहीं माना तो सख्त कार्रवाई होगी प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जिले के सभी ईंट भट्टा संचालकों को सख्त हिदायत दी है। क्षेत्रीय अधिकारी ने अपील की है कि सभी संचालक 31 मई तक अपने-अपने भट्टों में आग बंद कर लें। अगर 31 मई के बाद कोई भी ईंट भट्टा चलता हुआ पाया गया, तो उसे ‘वायु अधिनियम 1981’ और अन्य पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन का दोषी माना जाएगा। ऐसी स्थिति में प्रशासन सीधे कानूनी कार्रवाई करेगा, जिसमें भट्ठा सीज (जब्त) करना, भारी-भरकम जुर्माना (पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति) वसूलना और जेल भेजना शामिल है। इसके लिए भट्ठा मालिक खुद जिम्मेदार होंगे। जिले में नई ईंटों का उत्पादन बंद होगा, दाम बढ़ने की आशंका इस फैसले के बाद जून महीने से जैसलमेर में नई ईंटों का उत्पादन बंद हो जाएगा। हालांकि, भट्टा संचालकों के पास 31 मई तक तैयार की गई ईंटों का जो स्टॉक होगा, वे उसे बेच सकेंगे। लेकिन जानकारों का मानना है कि उत्पादन बंद होने से आने वाले दिनों में ईंटों की किल्लत हो सकती है और इनके दाम भी बढ़ सकते हैं।