कोटा में गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी का संकट गहराता जा रहा है। लोग बूंद-बूंद को तरसने लगे हैं। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर पानी माफिया एक्टिव हो गए हैं। सरकारी बोरिंग तक पर इनका कब्जा है। कई माफिया तो अपने प्राइवेट बोरिंग से पानी बेच रहे हैं। एक-एक प्राइवेट बोरिंग से 40-50 कनेक्शन तक दिए गए हैं। कई जगहों पर पानी की मात्रा और समय भी ये माफिया ही तय करते हैं। इन माफियाओं ने जलदाय विभाग की तर्ज पर बाकायदा बस्तियों में पाइपलाइन बिछा रखी है। इसके बदले मोटी रकम वसूली जा रही है। दैनिक भास्कर की टीम ने कोटा के 5 इलाकों (नयागांव, आंवली, रोजड़ी, बरडा और क्रेशर बस्ती) में जाकर ग्राउंड इनवेस्टिगेशन की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। शिवनगर : आधा घंटा पानी की सप्लाई के लिए हर महीने 600 रुपए देने होते हैं दैनिक भास्कर की टीम सबसे पहले कोटा के शिवनगर इलाके में पहुंची। सड़क किनारे उतरकर टीम बस्ती में एक मकान तक गई, जहां लवली काम करती मिलीं। मकान के बाहर काले रंग के पाइप दूसरे मकानों से जुड़े हुए थे, जिनमें वाल्ब लगे थे। लवली से जब पूछा- क्या यहां सरकारी पाइपलाइन आ रही है? लवली ने बताया- सरकारी लाइन तो यहां 2 साल पहले डाली थी, लेकिन अभी तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई है। घर में पानी की व्यवस्था कैसे होती है? इस पर लवनी ने कहा- हमने यहां प्राइवेट कनेक्शन ले रखा है। ₹600 रुपए महीने का चार्ज देना होता है। रोज आधा घंटा पानी मिलता है। इसमें पीने लायक पानी भर लेते हैं। रोजमर्रा के काम के लिए भी इसी पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार पैसे देकर टैंकर मंगवाना पड़ता है। रोज सुबह पानी आता है, अगर एक्स्ट्रा समय के लिए चाहिए तो ₹50 अलग से देने पड़ते हैं। इसी बस्ती में रहने वाले विजेंद्र ने बताया- सुबह आधे घंटे पानी आता है, लेकिन उसमें भी प्रेशर कम ही रहता है। कभी एक मटका तो कभी 2 मटके भर पाते हैं। पीने के लिए पानी हाईवे के पास से लाते हैं। हम ₹500 महीना प्राइवेट बोरिंग वाले को देते हैं। भास्कर टीम की जांच में सामने आईं ये 3 बातें.. हर जगह पाइपों का जंजाल भास्कर ने नयागांव, आंवली, रोजड़ी, बरडा और क्रेशर बस्ती में जाकर वहां की स्थिति का जायजा लिया। हर बस्ती और हर गली में चारों तरफ पानी की सप्लाई के लिए बिछाई गई प्राइवेट पाइप लाइनें ही नजर आईं। मकानों के बाहर वॉल्व से कनेक्शन किए हुए थे। प्राइवेट या सरकारी बोरिंग से सप्लाई हो रही पानी की लाइनों में एक मोटा पाइप निकला हुआ था। उसके बाद वॉल्व से उसमें कई कनेक्शन किए हुए नजर आए। थोड़ी-थोड़ी दूर पर मकानों पर इन पाइपों के जॉइंट और वॉल्व फिक्स किए गए थे। हर एक बोरिंग से दो से तीन गलियों तक पाइप लाइनें बिछाई हुई थीं। हालांकि गर्मी का मौसम आते ही कई में पानी सूख गया है। ज्यादातर अभी भी चल रहे हैं। जुलाई तक कई बोरिंग में पानी नहीं आता, लेकिन पूरे साल इसी तरह लोगों को पानी खरीदना पड़ता है। सरकारी बोरिंगों पर दबंगों का कब्जा बरडा बस्ती पहुंचने पर अंदर एक बोरिंग नजर आई, जिसमें दो-चार लोग पानी भरते दिखे। पूछने पर पता चला कि यह सरकारी बोरिंग है, लेकिन इस बोरिंग से भी पानी की सप्लाई घरों में की जा रही है। महिला रामवती और संजू ने बताया कि सरकारी बोरिंगों पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। वे अपने मिलने वालों को वहां से पानी भरने देते हैं। इसके अलावा सरकारी बोरिंग से पानी की सप्लाई कर रहे हैं। अगर कोई विरोध करता है तो वे लड़ने आ जाते हैं। इसलिए हमने तो सरकारी बोरिंग से पानी लेना ही छोड़ दिया। प्राइवेट बोरिंग वाले से पानी लेते हैं तो एक दिन छोड़कर एक दिन पानी मिलता है, जिसके लिए ₹1000 देते हैं। स्थानीय महिला रेहाना ने बताया कि बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ता है। सरकारी बोरिंग से पानी के लिए भी ₹400 मांगते हैं, जबकि प्राइवेट वाले ₹1000 मांगते हैं। सरकारी बोरिंग जिस घर के सामने लगी है, वहां पर उनका ही कब्जा हो गया है। कोई देखने-सुनने वाला नहीं है। यहां दस से ज्यादा प्राइवेट बोरिंग वाले और पंद्रह से ज्यादा सरकारी बोरिंग हैं। सरकारी बोरिंग में भी दो-तीन ही चल रही हैं, जिन पर दबंगों ने कब्जा जमाया हुआ है। उनसे लड़ नहीं सकते, इसलिए ज्यादा रकम देकर पानी लेना पड़ता है। पानी के टैंकर दो दिन में एक बार रोजड़ी, बरडा बस्ती और आंवली में यह बात सामने आई कि सरकारी टैंकर से जो पानी सप्लाई होता है, वह 2 दिन में एक बार होता है। रोजड़ी शिव मंदिर के पास रहने वाली मोहनी सुमन ने बताया- दो-तीन दिन में एक बार टैंकर का पानी आता है। एक ड्रम पानी भरकर देकर जाता है। पीने के पानी के लिए हमने भी एक प्राइवेट कनेक्शन लिया था, लेकिन अब उसमें पानी नहीं आता। ऐसे में फोरलेन जाकर पानी भरकर लाना पड़ता है। रोजमर्रा के काम के लिए परेशान होना पड़ता है। कन्हैया लाल सुमन ने बताया- टैंकर में जो पानी आता है, वह तो पीने लायक ही नहीं होता, पता नहीं कहां से भरकर लाते हैं। यहां पर एक टंकी लगी नजर आई। यह केडीए की तरफ से लगाई गई है, जिसमें नीचे नल जोड़े गए हैं। यहां पर महिलाएं पानी भरती नजर आईं। टंकी से पानी बूंद-बूंद ही आता दिखा। इसमें भी दो-तीन दिन में एक बार एक टैंकर डालते हैं, इससे आपूर्ति पूरी कैसे होगी। भास्कर टीम फोरलेन पर पहुंची, जहां पानी की लाइनें हैं। यहां से लोग पीने का पानी भरकर घर ले जाते हैं। पास ही पशुओं के पीने के पानी की व्यवस्था है। उसी के पास से लोग पानी भरते हैं। सरकारी बोरिंग पर कब्जे की शिकायत है तो एक्शन लेंगे इन इलाकों में नगर निगम, केडीएस और जलदाय विभाग की तरफ से सरकारी बोरिंग करवाई गई है, क्योंकि यहां सरकारी पाइपलाइन से पानी की सप्लाई नहीं है। केडीए के एक्सईएन ललित ने कहा- जो सरकारी बोरिंग लगाई जाती है, वहां स्थानीय लोग समिति बनाकर उसकी देखरेख और मेंटेनेंस का काम करवाते हैं। इन बोरिंग से भी अगर पानी रुपए लेकर दिया जा रहा है तो जरूर इसको दिखवाएंगे। पीएचईडी विभाग के अधीक्षण अभियंता (सुपरिटेंडेंट इंजीनियर) दीपक कुमार झा ने बताया- गर्मी में इन इलाकों में रेगुलर टैंकर जा रहे हैं। अगर कहीं नहीं पहुंच रहे हैं तो उसको दिखवाते हैं। प्राइवेट बोरिंग से पानी की सप्लाई की शिकायत तो है, लेकिन सरकारी बोरिंग की हमारे पास शिकायत नहीं है। अगर ऐसा है तो कार्रवाई की जाएगी। पानी के लिए तरस रहे हैं लोग एडवोकेट बीटा स्वामी ने कहा- यह सबसे बड़ी बात है कि चंबल किनारे होकर ये इलाके पानी के लिए तरस रहे हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोग तीस-तीस साल से ज्यादा से बसे हुए हैं। उनके पास आधार कार्ड है, वे वोट डालते हैं, बिजली विभाग के कनेक्शन हैं, लेकिन पानी के कनेक्शन नहीं हैं। प्राइवेट बोरिंग से एक साथ कई जगह सप्लाई देने की वजह से भूजल स्तर भी गिर रहा है। जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन भी दिया था कि कैंप लगाकर यहां कनेक्शन जारी करेंगे, लेकिन अब तक उसका इंतजार है। आंवली-रोजड़ी तक जल्द पहुंचेगा पानी जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता दीपक कुमार ने बताया- आंवली-रोजड़ी में पेयजल लाइन डालने के लिए ₹248 लाख की बजट घोषणा हुई थी, जिसका काम चल रहा है। केवल नेशनल हाईवे की क्रॉसिंग ही पेंडिंग है, जिसकी स्वीकृति भी आ चुकी है। यह काम होते ही इन इलाकों में जल्द ही पानी की सप्लाई शुरू हो जाएगी। आंवली-रोजड़ी में फिर पानी की समस्या नहीं होगी। वहीं, अमृत 2 योजना का काम भी चल रहा है। कोटा दक्षिण और उत्तर दोनों की ही कॉलोनियों में पानी पहुंचाने के लिए काम किया जाएगा। अमृत योजना के बाद सौ से ज्यादा इलाकों में पानी की लाइनें पहुंचेंगी और पानी की सप्लाई होगी। इनमें धर्मपुरा, रानपुर, बोरखेड़ा समेत सभी इलाके हैं, जहां अभी तक पानी की समस्या बनी हुई है।
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