तनावमुक्त और हिंसामुक्त समाज के संकल्प के साथ वर्ष 1981 में शुरू हुई वैश्विक संस्था ‘द आर्ट ऑफ लिविंग’ ने अपनी स्थापना के 45 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर राजस्थान के प्रतिष्ठित राजपरिवारों के सदस्यों और पश्चिमी राजस्थान के पूज्य मंदिर के महंत ने बेंगलुरु स्थित इंटरनेशनल सेंटर में आध्यात्मिक गुरु व मानवतावादी नेता गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर से आत्मीय भेंट की।
गुरुदेव से मिलने वाले शिष्टमंडल में जैसलमेर की राजमाता श्रीमती रसेश्वरी राजलक्ष्मी व युवराज कुमार जन्मेजय सिंह भाटी, मयूरभंज (ओडिशा) की महारानी श्रीमती रश्मि राज्यलक्ष्मी भंजदेव, जसोल (बालोतरा) के कुंवर हरिश्चंद्र सिंह, दासपान (जोधपुर) के ठाकुर प्रवीण सिंह व ठाकुरानी शिवाली सिंह, गोगुंदा (उदयपुर) के ठाकुर विश्व वर्धन सिंह तथा श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर (जसोल) के महंत गणेश पुरी जी महाराज शामिल थे। अद्भुत शांति और सुचारु व्यवस्था ने जीता दिल बेंगलुरु आश्रम की यात्रा ने सभी अतिथियों पर गहरी छाप छोड़ी। जैसलमेर की राजमाता रासेश्वरी राजलक्ष्मी ने इस अनुभव को “दुनिया से परे का एहसास” बताते हुए संस्था द्वारा संचालित गौशाला, वृक्षारोपण और शिक्षा कार्यों की सराहना की। युवराज जन्मेजय सिंह ने कहा, “जैसे ही आप परिसर में प्रवेश करते हैं, भीतर एक अद्भुत शांति का अनुभव होने लगता है।” ठाकुर प्रवीण सिंह ने बिना किसी शोर-शराबे के हजारों स्वयंसेवकों द्वारा संभाली जा रही अनुशासित व्यवस्था पर आश्चर्य व्यक्त किया। नदी पुनर्जीवन और जल संरक्षण की उम्मीद पश्चिमी राजस्थान के जल संकट का उल्लेख करते हुए कुंवर हरिश्चंद्र सिंह और महंत गणेश पुरी जी ने संस्था द्वारा किए जा रहे नदी पुनर्जीवन व वर्षा जल संरक्षण के प्रयासों को सराहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि गुरुदेव की ये पर्यावरण पहलें मरुधरा के लोगों के लिए जीवन बदलने वाली साबित होंगी। सभी अतिथियों ने हाल ही में (10 मई 2026 को) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित विश्व के सबसे बड़े ध्यान मंदिर में विशेष सत्संग में भी भाग लिया। राजस्थान की जेलों और शिक्षा में बड़ा बदलाव गुरुदेव की प्रेरणा से द आर्ट ऑफ लिविंग राजस्थान में सामाजिक परिवर्तन की बड़ी अलख जगा रही है। संस्था जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, बीकानेर सहित राज्य की प्रमुख जेलों में कैदी पुनर्वास कार्यक्रम के तहत 45,000 से अधिक बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला चुकी है। इसके अलावा, राज्य के दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में 60 निःशुल्क ‘श्री श्री ज्ञान मंदिर’ विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जो विशेषकर बालिकाओं को मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर यह संस्था 182 देशों में 1 बिलियन (100 करोड़) से अधिक लोगों के जीवन को स्पर्श कर चुकी है।