राजस्थान में चारागाह और वन क्षेत्र (ओरण) के संरक्षण को लेकर जयपुर में आज बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। आज सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन से ओरण बचाओ पदयात्रा निकाली गई, जिसमें जैसलमेर सहित प्रदेशभर से सैकड़ों लोग शामिल हुए। यह पदयात्रा मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर सरकार का ध्यान पर्यावरण संरक्षण और ओरण भूमि की सुरक्षा की ओर आकर्षित करने के लिए निकाली गई, लेकिन पुलिस ने पद यात्रियों को भवानी निकेतन के पास ही रोक लिया। भवानी निकेतक के पास पद यात्रियों और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हो गई। पदयात्रा में शामिल बाड़मेर जिले के शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार पर निशाना साधा है। सरकार गंभीर नहीं दिख रही भाटी ने कहा कि जैसलमेर की अंतरराष्ट्रीय सीमा से बड़ी संख्या में बुजुर्ग लोग जयपुर पहुंचे हैं, जिन्होंने 1965 और 1971 के युद्ध में देश के लिए योगदान दिया था, लेकिन आज उन्हें अपनी जायज मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह सरकार के लिए चिंतन का विषय है और ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाना चाहिए। भाटी ने आरोप लगाया कि वर्तमान में ओरण भूमि का बड़ा हिस्सा राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, जिससे अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ रही हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में किसानों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार की ओर से कोई स्पष्ट नीति या गाइडलाइन सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा अतिक्रमण के मामलों पर भी सरकार गंभीर नहीं दिख रही है। धरातल पर नहीं उतरी घोषणाएं उन्होंने खेजड़ी संरक्षण को लेकर प्रस्तावित बिल का जिक्र किया। कहा कि सरकार ने सदन में बिल लाने का वादा किया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया। विश्नोई समाज सहित कई वर्गों ने इस मुद्दे पर आंदोलन किया, लेकिन सरकार की घोषणाएं अभी तक धरातल पर नहीं उतरी हैं। तनोट माता मंदिर से शुरू हुई थी पदयात्रा प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वे 21 जनवरी को जैसलमेर के तनोट माता मंदिर से पदयात्रा शुरू कर जयपुर पहुंचे हैं। कड़ाके की ठंड से लेकर अब भीषण गर्मी तक नंगे पैर यात्रा कर रहे लोगों का कहना है कि वे ओरण, गोचर भूमि, खेजड़ी पेड़, नदियों, नालों और तालाबों के संरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पदयात्रा के दौरान जय जय जैसाण के नारों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
