नपुंसकता के इलाज के नाम पर धांधली के आरोपों में घिरे भंडारी हॉस्पिटल की परेशानियां बढ़ सकती हैं। जिन डॉ. चिराग भंडारी के असिस्टेंट पर अवैध इंजेक्शन बनाने और विदेशों में भेजने का आरोप था, अब उन्हीं उन्हीं पर अवैध प्रैक्टिस का भी आरोप है। दरअसल, राजस्थान मेडिकल काउंसिल में डॉ चिराग का रजिस्ट्रेशन एमबीबीएस-एमस के तौर पर है। जबकि, हॉस्पिटल की वेबसाइट पर उन्हें एन्ड्रोलॉजी का स्पेशलिस्ट बताया गया है। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार का कहना है कि- दूसरे सब्जेक्ट की प्रैक्टिस करना गलत है। हालांकि, डॉ चिराग का कहना है कि एमएस के बाद कोई रजिस्ट्रेशन होता ही नहीं है। सबसे पहले पढ़िए- हॉस्पिटल की वेबसाइट पर क्या है? हमारी एंड्रोलॉजी टीम का नेतृत्व डॉ.चिराग भंडारी जैसे अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है। जो पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य क्षेत्र में एक विश्वसनीय विशेषज्ञ हैं। व्यापक प्रशिक्षण और अनुभव के साथ डॉ.चिराग भंडारी पुरुष बांझपन, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन और हार्मोनल असंतुलन जैसी स्थितियों के लिए विशेषज्ञ उपचार प्रदान करते हैं। रजिस्ट्रार बोले- दूसरी प्रैक्टिस करना गलत राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) के रजिस्ट्रार डॉ.गिरधर गोयल ने बताया कि डॉ.चिराग भंडारी का रजिस्ट्रेशन इस सब्जेक्ट का नहीं है। उन्होंने बताया कि उनका रजिस्ट्रेशन एमएस जनरल सर्जरी के लिए है। आरएमसी और एनएमसी के नियमों के हिसाब से वो जनरल सर्जरी की प्रैक्टिस कर सकते हैं। अगर वे कोई स्पेशलिटी या सुपर स्पेशलिटी की प्रैक्टिस करते हैं तो वैध डिग्री और उसका रजिस्ट्रेशन आरएमसी से कराना आवश्यक है। वे अपनी डिग्री के अलावा और किसी विषय या विशेषज्ञता की प्रैक्टिस करते हैं तो गलत है। डॉ. चिराग का तर्क- ऐसा कोई रजिस्ट्रेशन होता ही नहीं भास्कर ने पक्ष जानने के लिए डॉ. चिराग भंडारी से बात की। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसा कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होता है। RMC में MBBS और MS का रजिस्ट्रेशन होता है। उसके बाद का रजिस्ट्रेशन नहीं होता। फेलोशिप का रजिस्ट्रेशन नहीं होता। एंड्रॉलोजी का कहीं पर भी रजिस्ट्रेशन नहीं होता। आपको जो चलाना है चलो दो। अब क्या हो सकती है कार्रवाई? राजस्थान में प्रैक्टिस करने के लिए डॉक्टर को राजस्थान मेडिकल काउंसिल से रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक होता है। रजिस्ट्रेशन के लिए डिग्री और दस्तावेत आरएमसी को पेश करने होते हैं। जांच में सही पाए जाने पर आरएमसी उनका रजिस्ट्रेशन करता है। अगर कोई डॉक्टर रजिस्ट्रेशन के अलावा गलत प्रैक्टिस में पाया जाता है तो आरएमसी की जीबीएम संबंधित डॉक्टर के खिलाफ रजिस्ट्रेशन अस्थाई सस्पेंड करने के साथ ही परमानेंट कैंसिल कर सकता है। एक्सट्रीम मामलों में संबंधित डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर भी की जा सकती है। दो दिन पहले अस्पताल प्रशासन ने बताया था योग्य भास्कर ने मामले में 11 अप्रैल को हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ कान्तिमल भंडारी से बात की थी। उन्होंने भी डॉ. चिराग भंडारी की क्वालिफिकेशन को लेकर दावा किया था। भंडारी हॉस्पिटल से जुड़े अवैध इंजेक्शन बेचने के तार दरअसल, सूरत में क्यूरीमेड लाइफ साइंसेज (Curimed Life Sciences) में ड्रग्स डिपार्टमेंट की टीम को TRIMIX नाम के एक इंजेक्शन के बारे में पता चला। जांच की तो पता चला कि TRIMIX नाम का कोई इंजेक्शन या दवा डीसीजीआई से अप्रूव ही नहीं है। जबकि, देश में कोई भी दवा बेचने से पहले अप्रूवल जरूरी है। इंजेक्शन का बिल ‘Oh man’ फार्मेसी नाम से कटा हुआ था। उसमें रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर जयपुर के डॉ. चिराग भंडारी का मिला। हॉस्पिटल में ड्रग्स डिपार्टमेंट की टीम ने किया था सर्च इसके बाद गुजरात ड्रग्स डिपार्टमेंट ने इसके बारे में डीसीजीआई को सूचित किया। डीसीजीआई ने राजस्थान ड्रग्स डिपार्टमेंट को ‘oh man’ फार्मेसी के बारे में पता करने को कहा। जांच में सामने आया कि इस नाम से कोई भी फार्मेसी को लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। फिर बिल पर लिखे नंबर और oh man फार्मेसी के बारे में ऑनलाइन सर्च किया गया। ‘ओह मैन’ नाम एक वेबसाइट मिली, जिसमें सेक्सुअल डिसऑर्डर से पीड़ित मरीजों की टेली कंसल्टेंसी (ऑनलाइन कंसलटेशन) की जाती है। इसका संबंध भंडारी अस्पताल में स्थित जयभवानी फार्मेसी से है। इसके बाद सेंट्रल टीम और राजस्थान ड्रग्स डिपार्टमेंट की टीम ने गुरुवार (9 अप्रैल) को जयभवानी फार्मेसी पर छापा मारा। हालांकि, रेड में न तो भंडारी हॉस्पीटल और न जय भवानी फार्मेसी में TRIMIX नाम का कोई इंजेक्शन नहीं मिला। ड्रग डिपार्टमेंट ने कार्रवाई के लिए लिखा पत्र इस मामले में अब ड्रग डिपार्टमेंट ने डॉ.चिराग भंडारी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल को लेटर लिखा है। इसके अलावा जयभवानी फार्मेसी को नोटिस भी जारी किया है। ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि अवैध इंजेक्शन और इंजेक्शन की सप्लाई के मामले में डीसीजीआई को भी रिपोर्ट भेज दी गई है। …. इसी केस से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… नपुंसकता के इलाज के नाम पर अवैध इंजेक्शन का खेल:डॉक्टर के असिस्टेंट ने पर्चियां पढ़कर सीखा फॉर्मूला, जयपुर से कोरिया-युगांडा तक करते सप्लाई नपुंसकता के इलाज के दावों के नाम पर अवैध इंजेक्शन का कारोबार जयपुर से ऑपरेट हो रहा था। बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टर का असिस्टेंट इसका मास्टरमाइंड है। पूरी खबर पढ़िए…
