अक्टूबर 2019 सीकर जिले के अलोदा गांव में रात करीब दस बजे एक घर के भीतर अचानक उठी चीख ने सन्नाटे को चीर दिया। आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोगों ने दरवाजे तक आकर सुना, मगर फिर वापस लौट गए। कुछ मिनट बाद सब शांत हो गया। इतनी खामोशी कि जैसे किसी ने आवाजों को जबरन दबा दिया हो। किसी को नहीं पता था कि उसी घर के अंदर एक ऐसी कहानी लिखी जा रही थी, जो पांच साल बाद कोर्ट में ‘राक्षसी प्रवृत्ति’ कहलाएगी। अगले दिन शाम को आलोदा निवासी एक पिता रामगोपाल खाटूश्यामजी थाने पहुंचा। आंखों में चिंता, आवाज में घबराहट और शब्दों में दर्द था। उसने पुलिस से कहा- ‘मेरी 19 साल की बेटी प्रेम गायब है… शायद किसी ने उठा लिया।’ पुलिस ने सामान्य गुमशुदगी मानकर मामला दर्ज कर लिया। तीन दिन बाद पुलिस के सामने एक और अजीब बात आई। दरअसल दूसरे गांव करड़ से राजेन्द्र नाम का एक व्यक्ति अपने भाई की गुमशुदगी लिखवाने आया था। उसका भाई भी उसी रात से गायब था। दो लोग… दो परिवार… एक ही रात। शुरुआत में यह महज संयोग लगा, लेकिन पुलिस को शक हो गया था किसी अनहोनी का। पुलिस ने गायब युवती 19 साल की प्रेम और 38 साल के गणपत की कॉल डिटेल्स निकाली। यहीं से कहानी ने करवट ली। गायब होने से पहले दोनों के बीच लगातार फोन कॉल हुए थे। पुलिस ने CCTV खंगाले तो पलसाना गांव के पेट्रोल पंप के कैमरे में गणपत दिखा। वह किसी का इंतजार करता नजर आया। कुछ सेकेंड बाद एक गाड़ी उसकी बाइक के पीछे धीरे-धीरे चलती दिखाई दी। फुटेज धुंधली थी, लेकिन पीछा साफ दिख रहा था। जांच अधिकारी ने स्क्रीन रोककर कहा — ‘यह मुलाकात नहीं… सेटअप लगता है।’ जांच अभी आगे बढ़ ही रही थी कि इसी बीच पुलिस के पास सूचना आई कि जीणमाता की पहाड़ियों से बदबू आ रही है । पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को झाड़ियों के बीच दो लाश दिखी। दोनों के चेहरों की पहचान होते ही सन्नाटा छा गया- ये प्रेम और गणपत ही थे। अब अपहरण की कहानी साफ हो चुकी थी। लेकिन असली सवाल अभी शुरू हुआ था। अगर दोनों का अपहरण हुआ था तो वे साथ कैसे मरे? पुलिस ने परिवार से दोबारा पूछताछ शुरू की। पिता ने फिर वही कहानी दोहराई मगर इस बार जांच अधिकारी को उसपर ना सिर्फ शक था, बल्कि वो लगातार उस पर नजर बनाए हुए था। पुलिस को लड़की के पिता की आंखों में दुख कम और सतर्कता ज्यादा नज़र आई। जैसे वह हर शब्द तोलकर बोल रहा हो। इसी बीच गांव में अफवाहें फैलने लगीं। किसी ने कहा लड़की प्रेम संबंध में थी। किसी ने कहा घर में कई दिनों से तनाव था, लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आया। गांव का डर, रिश्तों का दबाव और सामाजिक खामोशी सच को ढक रही थी। जैसे ही फॉरेंसिक रिपोर्ट आई तो जांच टीम भी सन्न रह गई। दोनों की हत्या पहाड़ियों में नहीं हुई थी। उन्हें कहीं और मारा गया और शव बाद में फेंके गए। उसी समय पुलिस को एक नया CCTV फुटेज मिला। वीडियो में कुछ लोग युवक को जबरन गाड़ी में बैठा रहे थे। जैसे ही वीडियो साफ हुआ, जांच अधिकारी की सांस अटक गई। उनमें से एक चेहरा ऐसा था जिसे देखकर पूरा केस उलट सकता था। वह कोई दुश्मन नहीं था… बल्कि ऐसा व्यक्ति था जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाता है। अब सवाल था क्या गुमशुदगी सिर्फ एक कहानी थी? क्या किसी ने सच छुपाने के लिए पूरा नाटक रचा था? और आखिर उस रात घर के अंदर क्या हुआ था, जिसकी चीखें गांव ने सुनी थीं लेकिन समझ नहीं पाया था? सच दरवाजे पर खड़ा था… बस खुलासा बाकी था। कल राजस्थान क्राइम फाइल्स पार्ट-2 में पढ़िए आगे की कहानी…
