Financial Year 2026-27: दुनिया 1 जनवरी को नया साल मनाती है। पटाखे फूटते हैं, जश्न होता है। लेकिन भारत में सरकार, कंपनियां, टैक्सदाता और पूरा वित्तीय तंत्र अपना असली नया साल ठीक तीन महीने बाद यानी 1 अप्रैल को मनाता है। यह परंपरा इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी है कि ज़्यादातर लोग कभी पूछते ही नहीं कि आखिर ऐसा क्यों है। नौकरीपेशा लोग इसी के हिसाब से टैक्स बचाते हैं, कंपनियां इसी तारीख पर अपने खाते बंद करती हैं और सरकार का बजट भी इसी चक्र के इर्द-गिर्द घूमता है। तो आखिर अप्रैल से मार्च का यह सायकल कहां से आया?

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