दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि केवल एक देश या बाजार पर निर्भर रहना कितना सुरक्षित है। ऐसे माहौल में विशेषज्ञ निवेशकों को घरेलू बाजार के साथ-साथ वैश्विक निवेश पर भी ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। दरअसल अंतरराष्ट्रीय निवेश का मतलब भारत की विकास क्षमतापर सवाल उठाना नहीं है, बल्कि वैश्विक बाजारों के इक्विटी रिटर्न जोखिम को संतुलित करना है।