कोटा में 7 साल पुराने कॉन्स्टेबल मर्डर केस में एससी/एसटी कोर्ट ने फैसला सुनाया है। न्यायाधीश मनोज कुमार गोयल ने 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इनमें एक पिता और उसके 3 बेटे भी शामिल हैं। साथ ही, दोषी के 3 दामाद भी शामिल हैं। कोर्ट ने 9 दोषियों पर 20-20 हजार और एक दोषी पर 30 हजार का जुर्माना लगाया है। लिफ्ट परियोजना के चुनाव जीतने के बाद मेघराज अपने बेटों और दामादों के साथ मिलकर कॉन्स्टेबल अभिमन्यु बागरी के घर में घुसकर गोली मारी थी। इलाज के दौरान अभिमन्यु की अस्पताल में मौत हो गई थी। कोर्ट ने 135 पेज में फैसला सुनाया है।
अब 4 पॉइंट में समझिए पूरा मामला.. 1. ट्रैक्टर ट्रॉली पुलिस ने पकड़ी, बेटे पर था शक अभिमन्यु बागरी के बड़े भाई मथुरा लाल ने बताया कि अभिमन्यु 1998 बैच का कॉस्टेबल था। वह ग्रामीण एसपी ऑफिस में तैनात था, जबकि मेरा बड़ा बेटा प्रवीण भी कॉन्स्टेबल है। वह उस समय ग्रामीण पुलिस लाइन में तैनात था। आरोपियों की बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली पुलिस ने पकड़ी थी। आरोपी को मेरे बड़े बेटे पर शक था। 2. समझाइश के दौरान थप्पड़ मारा था वारदात से एक-दो दिन पहले मेरा बड़ा बेटा प्रवीण सिमलिया में ड्यूटी पर जा रहा था। इस दौरान आरोपी मेघराज ने पीछे से टक्कर मार दी थी। इसी बात को लेकर मेरा भाई अभिमन्यु आरोपी मेघराज से समझाइश के लिए गया था। वहां दोनों के बीच बहस हुई और अभिमन्यु ने मेघराज को थप्पड़ मार दिया था। अगले दिन गांव में बालापुरा लिफ्ट परियोजना के चुनाव थे, जिसमें मेघराज चुनाव जीत गया था। 3. घर में घुसकर गोली मारी, इलाज के दौरान दम तोड़ा चुनाव जीतने के बाद मेघराज ने अपने बेटों और दामादों के साथ मिलकर हमारे घर पर हमला कर दिया और छोटे भाई अभिमन्यु को गोली मार दी। मैं भी उस वक्त कनवास थाने में तैनात था। आरोपियों ने मुझ पर भी दबाव बनाने की कोशिश की और नौकरी से हटाने का प्रयास किया। 4. दोषियों को आजीवन कारावास की सजा शिष्ट लोक अभियोजक (सरकारी वकील) रितेश मेवाड़ा ने बताया कि यह घटना 4 फरवरी 2019 को हुई थी। इस मामले में मेघराज नागर (60), उसके बेटे तीरथराज (32), कुशराज नागर (29), रामराज नागर (27) और अन्य दिनेश धाकड़ (30), भगवान (40), नवीन कुमार (39), हेमराज (48), ओम प्रकाश (50), शैलेन्द्र (24) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अभिमन्यु मोगिया के भतीजे पंकज ने कैथून थाने में इस घटना की शिकायत दर्ज कराई थी।
