सिलवासा के नामो मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में 27 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक भारतीय निवारक एवं सामाजिक चिकित्सा संघ का 53वां राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पीजीआई चंडीगढ़ की प्रोफेसर डॉ. मधु गुप्ता को प्रतिष्ठित धनवंतरी ओरेशन सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान दमन एवं दीव, दादरा एवं नगर हवेली तथा लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल ने दिया है। देश की तरक्की का जरिया डॉ. मधु गुप्ता ने कहा कि अगर भारत को 2047 तक विकसित देश बनना है, तो टीकों की बहुत बड़ी भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि टीकाकरण सिर्फ बीमारियों से बचाने का काम नहीं करता, बल्कि इससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, गरीबों को राहत मिलती है और समाज में बराबरी बढ़ती है। उन्होंने बताया कि पहले साल 1978 में बच्चों को केवल चार तरह के टीके लगाए जाते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर बारह हो गई है। उन्होंने कहा कि चेचक, पोलियो और नवजात टिटनेस जैसी बीमारियां भारत से पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि साल 2000 में केवल 58 प्रतिशत बच्चों को डीपीटी-3 टीका लगता था, जबकि साल 2024 तक यह बढ़कर 94 प्रतिशत हो गया है। छोटे बच्चों की मौतों में भी काफी कमी आई है। कोविड टीकाकरण से बढ़ा देश का भरोसा डॉ. गुप्ता ने कहा कि कोविड-19 के समय भारत ने अपने टीके खुद तैयार किए और करोड़ों लोगों को लगाए। ‘मिशन मैत्री’ के तहत भारत ने दूसरे देशों को भी टीके उपलब्ध कराकर मदद की। उन्होंने बताया कि कोविन और यू-विन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से टीकाकरण का रिकॉर्ड रखना और लोगों तक समय पर टीके पहुंचाना आसान हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि पीजीआई ने नए टीकों की जांच, उनकी सुरक्षा की निगरानी और सरकार को सलाह देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रोटावायरस, टायफाइड, खसरा-रूबेला और एचपीवी जैसे टीकों पर भी काम किया गया है। अंत में डॉ. मधु गुप्ता ने कहा कि यदि भारत को 2047 तक विकसित देश बनाना है, तो हर उम्र के लोगों का टीकाकरण जरूरी है और इस दिशा में लगातार प्रयास करते रहना होगा।
