सलूम्बर जिले में सोमवार, 2 मार्च होलिका दहन किया जाएगा, जबकि 3 मार्च को धुलंडी (रंगोत्सव) मनाई जाएगी। इस साल होली पर्व पर तिथि, भद्रा काल और चंद्र ग्रहण का विशेष संयोग बन रहा है, जिसके चलते ज्योतिषाचार्यों ने शास्त्रों के आधार पर 2 मार्च को ही होलिका दहन को श्रेष्ठ बताया है। इस बार सोमवार को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि रहेगी, जो शाम 5:56 बजे तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी और प्रदोष काल भी रहेगा। हालांकि, इसी दौरान भद्रा काल भी शुरू हो जाएगा, जो अगले दिन प्रातः 5:29 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस प्रकार, 2 मार्च को प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि तो रहेगी, लेकिन रात्रि में भद्रा का प्रभाव भी रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शास्त्रों में होलिका दहन पूर्णिमा के दिन किया जाना चाहिए, जो इस बार 3 मार्च को पड़ रही है। लेकिन, उस दिन ग्रस्तोदित चंद्र ग्रहण होने और प्रदोष काल से पहले ही पूर्णिमा समाप्त हो जाने के कारण धर्मसिंधु के आधार पर पूर्व दिवस यानी 2 मार्च को होलिका दहन करना अधिक उचित माना गया है। पंचांग के अनुसार, 3 मार्च को भारत में चंद्रोदय से पूर्व ही चंद्र ग्रहण प्रारंभ हो जाएगा, जिससे देशभर में ग्रस्तोदित ग्रहण दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक काल प्रातः 5:14 बजे से प्रभावी रहेगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। सलूम्बर शहर में होली चौक, पुलिस चौकी के पास, द्वारिका मंदिर के सामने और अन्य कई स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। शहर की सबसे ऊंची होली सुथार वाड़ी में 30 फीट की बनाई गई है।
