लुधियाना के खैहरा बेट गांव में अवैध माइनिंग के आरोपों को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ जहां ग्रामीण और किसान पिछले कई दिनों से धरने पर बैठकर माइनिंग को नाजायज बता रहे हैं, वहीं लुधियाना डीसी कार्यालय ने प्रेस नोट जारी कर इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित स्थल पर चल रहा कार्य पूरी तरह वैध है और इसे जल संसाधन विभाग द्वारा ‘डी-सिल्टिंग’ (गाद निकासी) के लिए औपचारिक मंजूरी दी गई है। उधर किसानों ने धरने को तेज करने के लिए आज 11 बजे किसान और राजनीतिक दलों को बुलाया है। प्रशासन का दावा- गाद निकालने के लिए टेंडर प्रशासनिक स्पष्टीकरण के अनुसार, वर्ष 2025 में आई भीषण बाढ़ के कारण दरिया में रेत और गाद जमा हो गई थी, जिससे पानी का प्राकृतिक बहाव रुक गया था। भविष्य में बाढ़ के खतरे को टालने और बांध को मजबूती प्रदान करने के लिए तकनीकी सलाहकार समिति की सिफारिश पर ई-टेंडरिंग के जरिए ठेकेदार नियुक्त किया गया है। इस परियोजना के तहत भारी मशीनरी के उपयोग की अनुमति भी दी गई है ताकि बांध की मरम्मत और बहाव को चौड़ा करने का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके। धरने को तेज के लिए किसान नेताओं से मांगा समर्थन दूसरी ओर, प्रशासन के इस तर्क से असंतुष्ट किसानों और डेढ़ दर्जन गांवों के लोगों ने अपने संघर्ष को और तेज करने का निर्णय लिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि डी-सिल्टिंग के नाम पर अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है। अपनी मांग मनवाने के लिए ग्रामीणों ने आज रविवार सुबह 11 बजे विभिन्न किसान संगठनों और राजनेताओं को समर्थन के लिए बुलाया है। अब देखना यह होगा कि राजनीतिक दलों के दखल के बाद यह मामला शांत होता है या प्रशासन बलपूर्वक इस विरोध को खत्म करवाता है।