जालोर उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को उपभोक्ता सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग ने कोरोना से हुई मृत्यु के मामले में क्लेम खारिज करने पर बीमा कंपनी को परिवादिनी को 10 लाख रुपए की बीमा राशि ब्याज सहित चुकाने के आदेश दिए हैं। साथ ही मानसिक वेदना, परिवाद खर्च और राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में राशि जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। कोरोना मृत्यु के क्लेम से इनकार पर आयोग की सख्ती
उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जालोर के पीठासीन अधिकारी घनश्याम यादव और सदस्य निरंजन शर्मा ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया। आयोग ने माना कि कोरोना महामारी से मृत्यु होने के बावजूद क्लेम न देना उपभोक्ता सेवा में कमी है। 2019 में ली थी 10 लाख की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी
परिवादिनी जयमाला सिसोदिया ने आयोग में पेश परिवाद में बताया कि उनके पति जितेन्द्र सिंह सिसोदिया के नाम से 12 नवंबर 2019 को आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 10 लाख रुपए की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली गई थी। पॉलिसी की वैधता 11 नवंबर 2022 तक थी। 13 मई 2021 को कोरोना से हुई मृत्यु
जयमाला सिसोदिया के अनुसार 13 मई 2021 को उनके पति का कोरोना महामारी के कारण निधन हो गया। इसके बाद बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम प्रस्तुत किया गया, लेकिन कंपनी ने कोरोना से मृत्यु को आधार बनाकर क्लेम देने से इनकार कर दिया। सरकारी दिशा-निर्देशों के बावजूद क्लेम नहीं दिया गया
आयोग ने बीमा कंपनी के तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद क्लेम न देना सेवा में कमी है। आयोग ने बीमा कंपनी को उपभोक्ता हितों के खिलाफ जिम्मेदार ठहराया। बीमा राशि, जुर्माना और खर्च चुकाने के आदेश
आयोग ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड को आदेश दिया कि वह परिवादिनी को 10 लाख रुपए की बीमा राशि ब्याज सहित 45 दिन में अदा करे। इसके साथ मानसिक वेदना और आर्थिक क्षति के लिए 30 हजार रुपए तथा परिवाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपए का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में 1 लाख जमा करने के निर्देश
आदेश की अवहेलना होने पर अतिरिक्त ब्याज देय होगा। भविष्य में इस तरह की सेवा में कमी न हो, इसके लिए आयोग ने बीमा कंपनी को राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष में एक लाख रुपए जमा करने के निर्देश भी दिए हैं।