भोजपुरी और बॉलीवुड फिल्मों में अपनी अलग पहचान बना चुके अभिनेता विनय आनंद इन दिनों आध्यात्मिक यात्रा पर हैं। खाटूश्यामजी और सालासर बालाजी के दर्शन के बाद वे जयपुर पहुंचे, जहां जलमहल के सामने स्थित खजाना महल और ज्वेलरी म्यूजियम देखकर भावुक नजर आए। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में विनय आनंद ने अपने संघर्ष, करियर में आए उतार-चढ़ाव, ओटीटी पर वापसी, लक फैक्टर और आस्था पर खुलकर बात की। साथ ही उन्होंने मामा गोविंदा के बयानों और इंडस्ट्री की सच्चाइयों पर भी बेबाक राय रखी। सवाल: खाटू श्यामजी मंदिर दर्शन करके आए है, किस तरह का अहसास है? विनय आनंद: पिछले काफी समय से खाटूश्यामजी का बुलावा आ रहा था। मुझे एक दोस्त ने कहा कि विनय आपने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है, इतना काम कर रहे हो। आपने 70 फिल्में भोजपुरी में कर रखी हैं, बॉलीवुड में आमदनी अठ्ठनी खर्चा रुपया, दिल ने फिर याद किया, सौतेला, लो मैं आ गया जैसी फिल्में कर चुके हो। लेकिन बॉलीवुड में वापसी नहीं हो रही है। तो मैंने कहा कि कुछ समझ में नहीं आ रहा है, पता नहीं चल रहा है कि सही रोल नहीं मिल रहा है या कुछ और कारण है। यहां पर दोस्त ने कहा कि आप कभी खाटूश्यामजी गए हो? मैंने कहा कि कभी नहीं, मुझे तो इसकी जानकारी भी नहीं है। उसने सलाह दी कि आप खाटू जाओ और दर्शन करो, वे हारे का सहारा है। वह आपकी मनोकामना पूरी करेंगे। इसके बाद मैं कई लोगों से मिला, हर कोई खाटू श्यामजी जाने की सलाह देता रहा। अचानक से इतने लोगों ने एक साथ कभी ऐसे नहीं बोला, मन में लगा कि खाटूश्यामजी पुकार रहे हैं कि बेटा तू आ। इसी बीच मुझे एकता कपूर का एसीपी विक्रांत शो ओटीटी के लिए ऑफर हो गया। मैं दो महीने से तड़प रहा था। आज जैसे ही मैंने दर्शन किए, मैं रोने लगा। उनसे कहा कि बाबा मेरा कोई साथ नहीं दे रहा है, भोजपुरी में तो नाम कमा लिया है, लेकिन हिन्दी में कोई साथ नहीं दे रहा है। इसके बाद सालासर बालाजी के दर्शन करके जयपुर आया हूं। जयपुर में मेरे दोस्त अनूप श्रीवास्तव जी मुझे अक्सर कहा करते थे कि विनय खजाना महल देखो। मैं सीधे यहां आ गया। यहां देखकर लगा क्या नजारा है, लोगों की लाइनें लगी हुई हैं। रामसेतू का पत्थर यहां तैरते हुए दिख रहा है, मेरा सौभाग्य है कि मैंने इन पत्थरों के हाथ लगाया और इन्हें तैराया। मैंने अपनी जिंदगी में पहली बार यह अनुभव किया है। ऐसा अनुभव लेने के लिए रामेश्वरम में जाना होगा, लेकिन मुझे तो जयपुर में ही मिल गया। सवाल: एसीपी विक्रांत किस तरह का शो है और किस तरह का किरदार है? विनय: मैं पहली बार ओटीटी पर डेब्यू कर रहा हूं। यह कमाल की थ्रिलर वेबसीरीज है, एकता कपूर और बालाजी टेलीफिल्म्स का इसके लिए धन्यवाद। मुझे खुशी है कि मैं वापसी कर रहा हूं। इसके अलावा एक मेरी फिल्म मकान भी आने वाली है। यह मेरी बॉलीवुड में बड़े स्तर पर वापसी है, बेहद खुश हूं। सवाल: फिल्मी बैग्राउंड से आप आते हैं, आपके मामा गोविंद इंडस्ट्री में सक्रिय हैं, क्या कारण रहा कि हिन्दी छोड़कर भोजपुरी में जाना पड़ा? विनय: ठीक है, गोविंदाजी मेरे मामा हैं, यह अच्छी बात है। लेकिन आदमी के खुद के स्ट्रगल होते हैं और उसे खुद ही स्ट्रगल करना पड़ता है। अपनी राह खुद बनानी पड़ती है। 60 फिल्में भोजपुरी और 10 फिल्में हिन्दी में करने के बाद हिन्दी में करने में इतना समय लग गया तो मैं समझ गया कि यह स्ट्रगल मेरा है। इसमें मेरा कोई साथ नहीं देगा, इसमें मुझे ही संघर्ष करना होगा। मैं कठिन मेहनत कर रहा हूं और जानता हूं कि लोग इतना एप्रिशिएट करता हूं तभी तो इतना काम कर चुका हूं। बस मैं यही कहूंगा कि अच्छे लोगों को इग्नॉर नहीं करना चाहिए, अच्छे आर्टिस्ट बहुत हैं। इन्हें भी एप्रिशिएशन काम के जरिए मिलना चाहिए। सवाल: गोविंदा ने अभी कहा है कि मेरे परिवार को साजिश के साथ तोड़ा जा रहा है, इन्हें काम नहीं मिले, इस पर आप क्या कहेंगे? विनय: गोविंदाजी अब पॉलिटिकल व्यक्ति बन चुके हैं। इतने बड़े स्टार होने के साथ वे एक पॉलिटिशियन है। पहले कांग्रेस में थे, अब शिवसेना से जुड़े हुए हैं। बीजेपी को सपोर्ट भी करते हैं। वे कहेंगे कि मेरे साथ कॉन्स्पिरेसी हो रही है तो यह बड़ी बात नहीं है। एक पॉलिटिशियन के साथ यह चीजें होती हैं, इसलिए जेड प्लस सिक्योरिटी मिलती है। बिना किसी बात के तो मशीनगन वाले सुरक्षाकर्मी नहीं मिलते हैं। हर जगह विपरीत पार्टी के लिए न चाहते हुए भी सपोर्ट करते हुए बोलते हैं तो नुकसान तो होता ही है। दोस्त, दुश्मन और दीवाने बन ही जाते हैं। दुश्मन न चाहते हुए बन रहे तो यह उनके प्रोफेशन की प्रॉब्लम है। सवाल: बालाजी के भक्त हैं, आप धार्मिक यात्राओं पर भी निकले हैं, कितनी एनर्जी मिल रही है? विनय: देखिए एक बात तो पक्की है, मेहनत तो हम सभी कर रहे हैं। लेकिन कृपा ईश्वर ही करते हैं। बॉलीवुड में लक फैक्टर बहुत महत्वपूर्ण हैं। मुझे यह पता चल गया है, मुझे सद्बुद्धि मिल गई है, मैं अपने रूट्स पर वापस आ गया हूं। इसलिए मैं आज शक्तियां लेने जा रहा हूं। जैसे उज्जैन में महाकाल हैं, वे गलत समय को भी सही कर देते हैं। भगवान से बड़ा कोई नहीं है। हम कितने भी प्रेक्टिकल हो जाएं, जब बैंड बजती है तो अच्छे से अच्छा आदमी भी नतमस्तक हो जाता है। आप देखिए अंबानीजी को, पैसे की कोई कमी नहीं है, लेकिन वे भक्ति में लीन हैं। उनसे हमें सीखना चाहिए कि पैसे कितने भी हों, डाउन टू अर्थ और भगवान ही सर्वोपरि हैं।
