राजस्थान क्राइम फाइल्स में आज जालोर का 17 वर्ष पुराना केस। जालोर रेलवे स्टेशन के पास एक घर में परिवार के चार लोग एक सुबह बेहोश हालत में मिले। इनमें से एक की मौत हो गई थी। यह बात आस-पड़ोस से दूर-दूर तक फैलते देर न लगी। परिवार को हॉस्पिटल ले जाया गया तो एक और मौत हो गई। परिवार के दो लोग दम तोड़ चुके थे और दो की हालत गंभीर थी। उन्हें पहले जोधपुर और फिर जयपुर रेफर किया गया। अफसोस उन दोनों को भी नहीं बचाया जा सका। एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से शहर में दहशत का माहौल हो गया। अब सवाल यह था कि क्या ये सामूहिक आत्महत्या थी या हत्या? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 3 जुलाई 2007 को जालोर का एक व्यक्ति अपने परिवार के साथ घर पर था। बारिश हो रही थी। व्यक्ति परिवार से कहता है कि वह अपने पैतृक गांव जाकर सुबह तक लौट आएगा। पत्नी सुबह खाना खिलाकर रवाना करती है। घर में दो बेटे और बेटी पिता से कहते हैं- सुबह जल्दी आ जाना। पिता गांव की ओर निकल जाता है। 4 जुलाई 2007 को पिता सुबह 8:30 बजे वापस लौटता है। डोर बेल बजाता है तो कोई दरवाजा नहीं खोलता। उसे अनहोनी की आशंका होती है। वह दरवाजा तोड़ देता है। घर में दाखिल होते ही उसके होश उड़ जाते हैं। घर में पूरा परिवार लहूलुहान मिलता है। वह चिल्ला कर आस-पड़ोस के लोगों को इकट्ठा करता है। लोग आकर परिवार के सदस्यों को संभालते हैं। पत्नी, बड़े बेटे और बेटी की सांसें चल रही होती हैं। इधर छोटा बेटा दम तोड़ चुका होता है। व्यक्ति को कुछ समझ नहीं आता कि उसके परिवार के साथ यह क्या हो गया। उसे लगता है कि किसी ने लूट के इरादे से हमला किया, लेकिन घर की स्थिति देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि वारदात लूट के इरादे से की गई है। इधर पुलिस व एफएसएल की टीम घर पहुंचती है। घर में जो दृश्य दिखता है उससे पता चलता है कि पूरा परिवार रात में एक साथ खाना खाता है। खाने के बर्तन व एक टिफिन भी होता है। इधर जालोर के हॉस्पिटल में परिचित व पड़ोस के लोग पहुंचते हैं। अस्पताल में इलाज के दौरान पत्नी की मौत हो जाती है। पहले बेटे और फिर पत्नी की मौत के बाद व्यक्ति पूरी तरह से टूट जाता है। सभी के दिमाग में यही सवाल उठता है कि रात में ऐसा क्या हो गया? पुलिस मौके से सबूत जुटाने में लग जाती है। एफएसएल टीम भी वहां से खाने व खून के सैंपल लेती है। परिवार की किसी से रंजिश नहीं थी। घर में कोई लूट नहीं हुई थी। ऐसे में किसी को समझ नहीं आ रहा था कि यह हत्या हुई क्यों? 3 जुलाई की रात को इस घर में हुआ क्या था? अस्पताल में भर्ती बड़े बेटे व बेटी की तबीयत बिगड़ने लगती है। उन दोनों को 5 जुलाई को पहले जोधपुर अस्पताल में भर्ती किया जाता है। हालत में सुधार नहीं होने पर 8 जुलाई को जयपुर एसएमएस अस्पताल ले जाया जाता है। जयपुर एसएमएस हॉस्पिटल में बेटे को कुछ होश आता है। पुलिस बयान लेती है। बेटा जो कुछ बताता है वो सुनकर पिता के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। बेटा ने बताया कि 3 जुलाई को रात 8 बजे डोर बेल बजी। दरवाजा खोला तो उनका एक परिचित गेट पर हाथ में टिफिन लिए खड़ा था। बोला- बारिश तेज है। मैं यहीं रुक जाता हूं। उसके लाए टिफिन से सभी ने खाना खाया। 10 बजे के करीब वह घर से निकला और रात 12 बजे लौटा। तब उसके हाथ में रबड़ी की कुल्फी थी। वह चार पैकट लाया। सभी ने खाए, लेकिन परिचित ने बोला कि वह खाकर आया है। कुल्फी खाते ही उसे बेहोशी छाने लगी और सभी बेहोश हो गए। उसे जब हल्का होश आया तो उसने देखा कि परिचित उसकी बहन पर कुल्हाड़ी से वार कर रहा है। उसने रोकने की कोशिश की तो परचित ने उस पर भी वार किया, जिससे वह फिर बेहोश हो गया। उसके बाद उसे कुछ याद नहीं था। क्या उस परिचित ने ही परिवार के सदस्यों की हत्या की? ऐसा क्या कारण रहा जो इतनी निर्मम तरीके से पूरे परिवार की जान ले ली? कल राजस्थान क्राइम फाइल्स, पार्ट–2 में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब…
